19 जनवरी को म्यांमार के सागैंग इलाके में लोग एक कार्यक्रम के लिए पंडाल में इकट्ठा हो रहे थे। नैंग को नाम का एक युवक पंडाल से कुछ दूरी पर खड़ा था। तभी आसमान में कुछ फाइटर जेट्स दिखाई दिए और देखते ही देखते उन्होंने बम गिराने शुरू कर दिए। नैंग ने अपनी पत्नी और बच्चे को पकड़ा और पंडाल की तरफ भागना शुरू कर दिया। जब तक वो पंडाल में पहुंचा वहां चारों तरफ आग लग चुकी थी। इस हमले में नैंग की मां समेत 8 लोगों की मौत हो गई।
म्यामांर में सेना की तरफ ऐसे हवाई हमले अब लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए अब कई मानवाधिकार संगठनों और देशों ने म्यांमार को जेट फ्यूल देने पर ही बैन लगाने की मांग की है। दरअसल पिछले साल नवंबर के महीने में म्यांमार की सेना पर आरोप लगे थे कि वो सिविल एयरलाइन के लिए मिलने वाले जेट फ्यूल का इस्तेमाल भी अपने हमलों के लिए कर रही है।
2022 में केवल हवाई हमले में 460 लोगों की मौत हुई
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक म्यामांर में हवाई हमले रोज की कहानी बनते जा रहे हैं। सेना अपने विरोधियों को ढूंढ़ने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इसके चलते वो आम लोगों को निशाना बना रही है। म्यामांर विटनेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 6 महीनों में वहां 135 इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं।
1 फरवरी को म्यांमार में तख्तापलट के दो साल पूरे हो चुके हैं। साल 2021 में सेना ने वहां चुनी हुई आंग सान सू की सरकार को गिरा दिया था और उन्हें पकड़कर जेल में डाल दिया था। तब से लोग अलग-अलग तरीकों से सेना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। BBC के मुताबिक जब सेना विरोधियों का सामना करने में जमीन पर कमजोर पड़ने लगी तो उसने आसमान से हवाई हमले कर लोगों पर आफत बरसाना शुरू कर दिया है।
म्यांमार की न्यूज वेबसाइट ईरावडी के मुताबिक दो साल में वहां 31022 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें 460 लोग एक साल में की गई एयर रेड में मारे जा चुके हैं। हवाई हमलों में मरने वाले ज्यादातर छोटे बच्चे हैं। UN के मुताबिक एयर रेड से परेशान होकर वहां 11 लाख लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
लगातार 30 मिनट तक अंधाधुंध गोलियां चलाईं
BBC की रिपोर्ट के मुताबिक म्यांमार की सेना स्कूलों को अपने निशाने पर ले रही है। पिछले साल सितंबर के महीने में येत कोने गांव में जब 9 साल की जिन अपने स्कूल जा रही थी उसी दौरान उसके अंकल ने दो हेलिकॉप्टर देखे। वो समझ गए थे कि ये हमला करने वाले हैं। हेलिकॉप्टर्स को देखकर स्कूल में मौजूद लोगों ने चीखना शुरू कर दिया और वो स्कूल में डेस्क के नीचे और अलग-अलग जगहों पर छुपने लगे।
स्कूल पर कई रॉकेट गिरे। चारों और मलबा फैलने लगा। टीचर ने BBC को बताया कि सैनिक गोलियों से भी स्कूलों की दीवारों पर हमला कर रहे थे। ये गोलीबारी और पूरे आधे घंटे तक जारी रही । इस हमले में 6 बच्चों समेत 12 लोगों की मौत हुई। ये तो सिर्फ एक स्कूल की कहानी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी से नवंबर 2021 तक 444 स्कूल पूरी तरह से तबाह हो चुके थे। तब से इस संख्या में इजाफा ही हुआ है।
चीन और रूसी फाइटर जेट्स से हमले
हाल ही में UN ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया था कि म्यांमार अपने ही लोगों को मारने के लिए तेजी से अपने हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। म्यांमार पाबंदियों के कारण दूसरे देशों से हथियार नहीं खरीद सकता है। इसके चलते वो खुद अपने हथियार बना रहा है।
इस काम में भारत, अमेरिका और जापान समेत 13 देशों की कंपनियां म्यांमार का साथ दे रही हैं। वहीं BBC की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि म्यामांर लोगों पर एयर रेड करने के लिए जिन एयरक्राफ्ट्स का इस्तेमाल कर रहा है वो रूस और चीन के हैं।
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