म्यांमार में लोकतंत्र समर्थकों पर फिर फायरिंग:सुरक्षाबलों की गोलीबारी में 33 लोगों की मौत, दिल्ली में लोगों ने प्रदर्शन कर मोदी से मदद मांगी

नेपितॉ/नई दिल्ली9 महीने पहले
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दिल्ली में चिन रिफ्यूजी कमेटी के सदस्यों ने गुरुवार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री से दखल देने की मांग की। - Dainik Bhaskar
दिल्ली में चिन रिफ्यूजी कमेटी के सदस्यों ने गुरुवार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री से दखल देने की मांग की।

म्यांमार में सुरक्षाबलों ने गुरुवार को प्रदर्शनकारियों पर एक बार फिर फायरिंग की। लोकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, फायरिंग में कम से कम 33 लोग मारे गए हैं। इधर, राजधानी दिल्ली में चिन रिफ्यूजी कमेटी के सदस्यों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री से दखल देने की मांग की। इन लोगों ने म्यांमार की सेना का समर्थन करने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ नारेबाजी भी की।

इससे पहले 28 फरवरी को लोकतंत्र की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर भी पुलिस ने फायरिंग की थी। इसमें 18 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। वहीं, 20 फरवरी को हुई फायरिंग में 3 लोगों की मौत हुई थी। इनमें एक महिला भी शामिल थी।

नवंबर में सेना ने तख्तापलट कर सत्ता पर कब्जा कर लिया था, इसके बाद वहां लगातार प्रदर्शन जारी हैं।
नवंबर में सेना ने तख्तापलट कर सत्ता पर कब्जा कर लिया था, इसके बाद वहां लगातार प्रदर्शन जारी हैं।

सेना ने चुनाव नतीजे मानने से इनकार किया था
म्यांमार में तख्तापलट के बाद से ही लोग सैन्य शासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। हर बार सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरती है। सत्ता संभाल रही सेना ने लोकतंत्र समर्थकों से सख्ती से निपटने की बात कही है। देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू की को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके बाद से ही म्यांमार में प्रदर्शनों का दौर जारी है। नवंबर में हुए चुनाव में सू की पार्टी ने जोरदार जीत दर्ज की थी, लेकिन सेना ने धांधली की बात कहते हुए परिणामों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

हालात बताते हुए रो पड़े थे राजदूत, सेना ने बर्खास्त किया
यूनाइटेड नेशन (UN) में म्यांमार के राजदूत क्यॉ मो तुन इस घटना के बारे में बताते हुए रो पड़े थे। तुन ने UN से अपील की थी कि म्यांमार के सैन्य शासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और लोकतांत्रिक व्यवस्था को फौरन बहाल करने की मांग की थी। म्यांमार के सैन्य शासन ने UN में सेना के खिलाफ आवाज उठाने वाले अपने राजदूत को पद से बर्खास्त कर दिया है।

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