UNGA में मोदी का भाषण:प्रधानमंत्री ने पाक-चीन का नाम लिए बगैर फटकार लगाई; PM के भाषण की 5 अहम बातें और उनके मायने

न्यूयॉर्क2 महीने पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। चीन और पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्ष मोदी से पहले बोल चुके थे। मोदी ने इन दोनों देशों को तो इस विश्व मंच से जवाब दिया ही, साथ ही ये भी साफ कर दिया कि खुद संयुक्त राष्ट्र में सुधार की कितनी जरूरत है। यहां 5 पॉइंट्स में जानिए कि किस देश या किस मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने क्या कहा।

पाकिस्तान
मसला क्या था: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को कश्मीर और अफगानिस्तान पर काफी जहर उगला था। उन्होंने कई बार भारत और कश्मीर का नाम भी लिया था। मोदी जब शनिवार को बोलने खड़े हुए तो हमेशा की तरह उन्होंने पाकिस्तान का नाम ही नहीं लिया, लेकिन जवाब करारा दिया।

प्रधानमंत्री का जवाब- जो देश आतंकवाद को पॉलिटिकल टूल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें ये समझना होगा कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है, जितना वो दुनिया के लिए है।

अफगानिस्तान
मसला क्या था: पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान में दखलंदाजी कर रहा है। पंजशेर में उसने तालिबान की मदद के लिए एयरफोर्स का चुपके से इस्तेमाल किया। इमरान खान सरकार तालिबान के कंधे पर बंदूक रखकर दुनिया को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रही है।

मोदी का जवाब: यह तय करना होगा कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद और आतंकी हमलों के लिए न हो पाए। इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि अफगानिस्तान का इस्तेमाल कोई देश अपने स्वार्थ के लिए नहीं कर सके। इस वक्त अफगानिस्तान की महिलाओं, बच्चों और माइनोरिटीज को मदद की जरूरत है और इसमें हमें अपनी जिम्मेदारी निभानी ही होगी।

चीन
मसला क्या था: हिंद और प्रशांत महासागर में चीन रोज नई चालों के जरिए दबदबा बढ़ाने की साजिशें रच रहा है। इस क्षेत्र के छोटे देशों का दबा रहा है। उससे निपटने के लिए ही क्वॉड और ऑकस संगठन बना है।

मोदी का जवाब- हमारे समंदर भी हमारी साझी विरासत हैं। ध्यान रखना होगा कि ओशन रिर्सोसेज का हम ‘यूज करें, एब्यूज नहीं’। समंदर इंटरनेशन ट्रेड की लाइफलाइन हैं। इन्हें एक्सपान्शन (विस्तार) और एक्सक्लूजन (काटना) से बचाना होगा। नियमों का पालन हो। इसके लिए दुनिया को एक साथ ‌आवाज उठानी होगी।

संयुक्त राष्ट्र को नसीहत
क्या मसला था:
सिक्योरिटी काउंसिल में अब भी पांच ही देश हैं। भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सदस्यता में चीन अड़ंगे लगाता है। वीटो का बेजा इस्तेमाल हो रहा है। ये पांच देश ही एक तरह से वर्ल्ड ऑर्डर तय कर रहे हैं।

मोदी का जवाब- प्रधानमंत्री ने इसे भारत के मशहूर कूटनीतिज्ञ चाणक्य के विचार के हवाले से समझाया। कहा-जब सही वक्त पर सही काम नहीं किया जाता, तो वक्त ही उस काम की कामयाबी को खत्म कर देता है। संरा को प्रासंगिग बनाए रखना है तो उसे इफेक्टिवनेस और भरोसा बढ़ाना होगा। UN पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। क्लाइमेट क्राइसिस और कोविड के दौर में हमने इन सवालों का सामना किया। क्लाइमेट क्राइसिस, अफगानिस्तान, प्रॉक्सी वॉर और आतंकवाद के दौर में यह सवाल गहरे हो गए हैं।

वैक्सीन इश्यू और भारत का महत्व
क्या मसला था:
भारत में कोविड दूसरी लहर के वक्त वैक्सीन एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी गई थी। इससे दुनिया के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया था। अमीर देशों पर आरोप लगे कि उन्होंने वैक्सीन का ओवर स्टॉक किया और गरीब देशों को तन्हा छोड़ दिया।

मोदी का जवाब: भारत ने DNA वैक्सीन तैयार कर ली है। RNA और नेजल वैक्सीन पर काम अंतिम दौर में है। भारत एक बार फिर दुनिया के प्रति जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं, इसलिए फिर वैक्सीन एक्सपोर्ट करने का फैसला किया है।