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UN में 3 महापुरुषों का जिक्र:मोदी ने चाणक्य की कूटनीति, दीनदयाल के अंत्योदय और टैगोर की निर्भीकता के सिद्धांत का हवाला दिया; UN को भी खरी-खरी

न्यूयॉर्क23 दिन पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित किया। 18 मिनट के भाषण में उन्होंने वैश्विक सहयोग, वैक्सीन और आतंकवाद समेत कई मुद्दों पर मजबूती से बात रखी। भाषण की शुरुआत में भारतीय लोकतंत्र की विविधताओं और परंपराओं का महत्व बताया। भारत का गौरवशाली इतिहास बताया तो संयुक्त राष्ट्र को प्रासंगिकता बनाए रखने की नसीहत भी दी।

पीएम ने भारत के 3 बड़े महापुरुषों का नाम लिया। उनकी बातों के जरिए संयुक्त राष्ट्र को अपनी प्रभावशीलता बनाए रखने की नसीहत दी। पीएम ने चाणक्य की कूटनीति, दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और गुरु रबीन्द्रनाथ टैगोर की निर्भीकता के सिद्धांत का हवाला दिया। आइए जानते हैं इन महापुरुषों का नाम लेकर मोदी ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में किन संदर्भों को सामने रखा..

पंडित दीनदयाल उपाध्याय: एकात्म मानववाद और अंत्योदय
मोदी ने जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद और अंत्योदय का जिक्र किया। कहा- मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं कि 'यस डेमोक्रेसी कैन डिलेवर' यानी लोकतंत्र ही नतीजे दे सकता है। उपाध्याय कहा करते थे एकात्म मानववाद। यह पूरी मानवता का विचार है। अंत्योदय का विचार है। विकास सर्वसमावेशी और सर्वव्यापी हो या सर्व उपलब्ध हो।

हमने 7 वर्षों में 43 करोड़ लोगों को बैंकिंग और 50 करोड़ लोगों को क्वॉलिटी हेल्थ सेक्टर से जोड़ा। बड़ी-बड़ी संस्थाओं ने माना है कि वहां के नागरिकों के लिए जमीन का रिकॉर्ड होना जरूरी है। दुनिया में कई देशों में ऐसे लोग हैं जिनके पास जमीन का रिकॉर्ड नहीं है। हम भारत में ड्रोन मैपिंग कराकर लोगों को जमीन का रिकॉर्ड दे रहे हैं। इससे लोगों को बैंक लोन और ओनरशिप दिला रहे हैं। विश्व का हर 6वां व्यक्ति भारतीय है। जब भारत विकास करता है तो दुनिया का विकास होता है। व्हेन इंडिया रिफॉर्म, वर्ल्ड ट्रान्सफॉर्म।

आचार्य चाणक्य: काम सही समय पर न हो तो समय उस कार्य की सफलता को समाप्त कर देगा
प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए भारत के महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य की सीख दी। कहा- आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले कहा था- कालातिक्रम, कालएव फलन तीमति। यानी, जब सही समय पर सही काम नहीं किया जाता, तो समय ही उस सही कार्य की सफलता को समाप्त कर देता है।

UN को खुद को प्रासंगिक बनाए रखना है तो उसे अपनी प्रभावशीलता को बनाए रखना होगा। UN पर आज काफी सवाल खड़े हो रहे हैं। इन सवालों को हमने क्लाइमेट और कोविड क्राइसिस के दौरान देखा है। आतंकवाद और अफगानिस्तान के संकट ने इन सवालों को ज्यादा गहरा कर दिया।

रबीन्द्रनाथ टैगोर: सब दुर्बल, अपने शुभ पथ पर निर्भीक होकर आगे बढ़ें
प्रधानमंत्री ने संबोधन के आखिर में कहा- मैं नोबल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर की बात के साथ भाषण को विराम देना चाहूंगा। उन्होंने कहा था- सब दुर्बल अपने शुभ पथ पर निर्भीक होकर बढ़ें, सभी दुर्बलताएं और शंकाएं समाप्त हो जाएंगी। यह संदेश यूएन के लिए जितना प्रासंगिक है, उतना ही हर जिम्मेदार देश के लिए भी प्रासंगिक है। हमारा साझा प्रयास विश्व में शांति बढ़ाएगा। विश्व को स्वस्थ और समृद्ध बनाएगा।

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