अमेरिका / नासा ने एस्ट्रोनॉट राजा चारी को 3 मिशन के लिए चुना, सुनीता-कल्पना के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले तीसरे भारतवंशी

राजा चारी। राजा चारी।
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राजा चारी।राजा चारी।

  • एस्ट्रोनॉट राजा जॉन वुरपुत्तूर चारी से पहले सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला ही नासा के अंतरिक्ष मिशन के लिए चुनी गई थीं
  • चारी अगस्त 2017 में नासा के आर्टेमिस प्रोगाम के लिए 18 हजार आवेदकों में से 11 चुनिंदा लोगों में शामिल थे, अब 2 साल की ट्रेनिंग पूरी की

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2020, 09:36 PM IST

ह्यूस्टन. नासा ने तीन स्पेस मिशन के लिए भारतमूल के अमेरिकी एस्ट्रोनॉट राजा जॉन वुरपुत्तूर चारी का चयन किया है। स्पेस एजेंसी ने शुक्रवार को चारी समेत 11 नए एस्ट्रोनॉट्स के नामों की घोषणा की। चारी अमेरिकी एयरफोर्स के कर्नल हैं और एफ-35 बेड़े इंटिग्रेटेड टेस्ट फोर्स के डायरेक्टर के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं। वे अमेरिकी स्पेस मिशन के लिए चुने गए भारतीय मूल के तीसरे व्यक्ति हैं। उनसे पहले कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स नासा के मिशन में शामिल हो चुकी हैं।

चारी अगस्त 2017 में नासा के आर्टेमिस प्रोगाम के लिए 18 हजार आवेदकों में से चुने गए 11 लोगों में शामिल थे। उन्होंने शुक्रवार को दो साल की बेसिक एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग पूरी कर ली और अब नासा के इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन, चांद और मंगल मिशन के तैयार हैं।

नासा की परंपरा के मुताबिक चारी को सिल्वर पेन मिला

शुक्रवार को जॉन्सन स्पेस सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें सभी 11 ग्रैजुएट्स के साथ सिल्वर पेन दिया गया। नासा की परंपरा के मुताबिक, अंतरिक्ष में जाने के बाद उन्हें दूसरे एस्ट्रॉनाट्स से यह पेन अदला-बदली करना होगा। इस परंपरा की शुरुआत 1959 में मर्करी मिशन के लिए चुने गए 7 एस्ट्रोनॉट्स के साथ हुई थी। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्राइडेनस्टीन ने कहा कि ये अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ एस्ट्रोनॉट हैं। यह इनके लिए हमारे एस्ट्रोनॉट कॉर्प्स में शामिल होने का अमूल्य समय है।

मुझे शिक्षा के मूल्य अपने पिता से मिले: चारी

चारी के पिता हैदराबाद से अमेरिका चले गए थे। चारी ने कहा कि शिक्षा के मूल्य मुझे पिता श्रीनिवास वी चारी से मिले। पिता का मानना था कि भारत में स्कूल जाना और शिक्षा प्राप्त करना अधिकार नहीं विशेषता है। यह एक ऐसी बात थी जो मेरे परिवार पर काफी हद तक लागू होती थी। इसलिए हमने कभी स्कूल जाने में आनाकानी नहीं की। मैं जानता हूं कि हमारे पिता को हमें स्कूली शिक्षा देने के लिए कितना त्याग करना पड़ा। मैं सोचता हूं कि शायद हममें और दूसरों में यही सबसे बड़ा अंतर था।

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