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11 दिन में तीसरा मंगल मिशन:अमेरिका का परसेवरेंस रोवर लॉन्च, मंगल पर ऑक्सीजन बनाना लक्ष्य; हाल ही में यूएई ने होप और चीन ने तियानवेन-1 सैटेलाइट लॉन्च किए थे

वॉशिंगटन15 दिन पहले
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपना मंगल मिशन फ्लोरिडा के केप केनेवरल एयरफोर्स स्टेशन से लॉन्च किया।
  • परसेवरेंस में 1000 किलो का रोवर और करीब 2 किलो का ड्रोन जैसा छोटा हेलीकॉप्टर
  • इससे पहले 19 जुलाई को यूएई ने और 23 जुलाई को चीन ने अपने-अपने मिशन मंगल ग्रह के लिए रवाना किए हैं

अमेरिका का परसेवरेंस यान मंगल पर गुरुवार को रवाना हो गया। यह दुनिया में पिछले 11 दिनों में तीसरा मंगल मिशन है। इससे पहले 19 जुलाई को यूएई ने और 23 जुलाई को चीन ने अपने-अपने मिशन मंगल ग्रह के लिए रवाना किए हैं।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपना मंगल मिशन फ्लोरिडा के केप केनेवरल एयरफोर्स स्टेशन से लॉन्च किया। मिशन अमेरिकी समयानुसार 7:50 बजे सुबह (भारतीय समय में 5:20 बजे शाम) को लॉन्च हुआ। 18 फरवरी 2021 को मंगल के जेजेरो क्रेटर पर इसकी लैंडिंग होगी। यह मिशन मंगल के समय से एक साल (पृथ्वी के 687 दिन) तक चलेगा। इस मिशन के तहत पहली बार मंगल में एक छोटा हेलिकॉप्टर उड़ाया जाएगा। इस मिशन का लक्ष्य मंगल पर ऑक्सीजन बनाना है।

मंगल पर पहुंचने की होड़ में मौजूदा तीनों मिशन नए और दिलचस्प उद्देश्यों को लेकर जा रहे हैं। इनमें पानी की तलाश, वहां ऑक्सीजन बनाने से लेकर इतिहास में पहली बार मंगल पर हेलीकॉप्टर उड़ाने के प्रयास तक हैं। जानिए, क्या हैं इनकी खासियत और ये वहां और क्या-क्या करने वाले हैं...

परसेवरेंस में 7 फीट की रोबोटिक आर्म, 19 कैमरे और एक ड्रिल मशीन भी है जो मंगल की सतह के फोटो, वीडियो और नमूने लेंगे।

परसेवरेंस, अमेरिका: ऑक्सीजन बनाएगा, नमूने लेगा और पानी भी खोजेगा

खासियतः परसेवरेंस में दो उपकरण हैं- 1000 किलो का रोवर और करीब 2 किलो का ड्रोन जैसा छोटा हेलीकॉप्टर, जो रोवर के संपर्क में रहेगा। सोलर पैनल, कार्बन ब्लेड जो गति देंगे और एंटीना। रोवर प्लूटोनियम पावर का इस्तेमाल करेगा, जो करीब 10 साल चलेगी। इसमें 7 फीट की रोबोटिक आर्म, 19 कैमरे और एक ड्रिल मशीन भी है, जो मंगल की सतह के फोटो, वीडियो और नमूने लेंगे।

क्या करेगा: कार्बन डाइऑक्साइड से ऑक्सीजन बनाएगा, मौसम को परखेगा, जिनका मंगल यात्री सामना करेंगे। पानी की खोज। मार्स एनवायरमेंटल डायनामिक्स एनालाइजर जानकारी देगा कि मंगल के हालात इंसानों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। तापमान, वायुदाब, रेडिएशन, धूल का अध्ययन करेगा।

तियानवेन-1, चीन: पहला मिशन जो परिक्रमा लगाएगा, लैंड करेगा, रोवर का काम भी करेगा

खासियतः तियानवेन का अर्थ है स्वर्ग से सवाल। वजन 5000 किलो। ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर प्रमुख। पैराशूट जो रोवर को आसानी से उतरने में मदद करेगा। कैमरे, 4 सोलर पैनल। सॉफ्ट लैंडिंग के लिए पैराशूट, पथरीली या उबड़-खाबड़ सतह पर रुकने और स्पीड कम करने के लिए कैप्सूल और रेट्रो-रॉकेट। क्रूज शिप, जिसमें 7 रिमोट सेंसिंग उपकरण लगे हैं।

क्या करेगाः 2-3 महीने चक्कर काटेगा। इससे लैंडिंग के हालात पता लगेंगे और नाकामी को रोका जा सकेगा। क्रूज शिप रिमोट सेंसिंग उपकरणों के जरिए मंगल का अध्ययन, पत्थरों की जांच, पानी या बर्फ की तलाश करेगा। पहला मिशन जो मंगल का चक्कर लगाएगा, लैंड करेगा और रोवर का काम भी करेगा।

होप ऑर्बिटर, यूएई: पता करेगा कि मंगल पर मौजूद पानी कैसे और कहां गया

खासियतः यूएई का पहला मंगल मिशन। जापान के तनेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च। ऊंचाई 6 फीट और वजन करीब 1360 किलो। गर्मी से बचाने वाले कवच, सोलर पैनल जो लॉन्च के बाद खुद ही फैल जाएंगे और सूरज की रोशनी से चार्ज होते रहेंगे। एंटीना जो धरती से संपर्क करेगा। इनके अलावा तीन उपकरण लगे हैं- हाई-रिजोल्यूशन कैमरा, इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रो-मीटर और तीसरा अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रोमीटर।

क्या करेगाः यह ऑरबिट में घूमता रहेगा। इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रो-मीटर धूल, बर्फ, बादल, नमी का अध्ययन करेगा। इसी धूल के कारण मंगल का तापमान प्रभावित होता है। हाइड्रोजन, कार्बन मोनो ऑक्साइड और ऑक्सीजन का पता लगाएगा। माना जाता है कि पहले मंगल पर पानी था। होप पता लगाएगा कि उस पानी का क्या हुआ?

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1. जापान के स्पेस सेंटर से मंगल के लिए सैटेलाइट भेजा गया

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