पड़ोसी देश में सियासी उथल-पुथल:ओली की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने नेपाली संसद भंग की, विपक्ष कोर्ट जाएगा

6 महीने पहलेलेखक: काठमांडू से भास्कर के लिए अभय राज जोशी
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नेपाली प्रधानमंत्री- केपी शर्मा ‘ओली’ - Dainik Bhaskar
नेपाली प्रधानमंत्री- केपी शर्मा ‘ओली’

नेपाल में शुक्रवार देर रात राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने संसद भंग कर दी। इससे पहले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ‘ओली’ ने संंसद भंग करने और दो चरणों में मध्यावधि चुनाव कराने की सिफारिश की। राष्ट्रपति ने दोनों ही सिफारिशें मान लीं।

राष्ट्रपति कार्यालय ने बयान जारी कर कहा- ‘मौजूदा पीएम ओली और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के सरकार बनाने के दावे अपर्याप्त हैं। इसलिए संसद भंग की जाती है। अब नेपाली संविधान के मुताबिक मध्यावधि चुनाव होंगे।’

हालांकि नेपाल की विपक्षी पार्टियों ने राष्ट्रपति के संसद भंग करने और नवंबर में चुनाव कराने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फैसला राष्ट्रपति भंडारी और ओली के पक्ष में जाएगा तो देश में चुनाव होंगे।

ओली विरोधी माओवादी पार्टी के मुखिया प्रचंड ने विपक्षी पार्टियों के साथ मीटिंग के बाद कहा- ‘विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट फिर संसद को बहाल करेगा और लोकतंत्र अपना काम करेगा।’

कोर्ट में विपक्ष का पक्ष मजबूत: वरिष्ठ वकील ओम प्रकाश अर्याल का कहना है कि संसद को फिर से बहाल कराने के लिए विपक्ष के पास पर्याप्त मौके हैं। पीएम इस्तीफा दिए बगैर राष्ट्रपति को नई सरकार चुनने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए नहीं कह सकते। जैसे ही ओली ने राष्ट्रपति से कहा कि वे सरकार नहीं बना सकते हैं, तो उन्हें सरकार बर्खास्त कर नए सिरे से सरकार गठन की कोशिश करनी चाहिए थी।

अब आगे क्या

  • सुप्रीम कोर्ट संसद को बहाल कर सकता है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो विपक्ष सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर देंगे और चुनाव के बहिष्कार की धमकी देंगे, पर अंततः चुनाव में भाग लेंगे।
  • चुनाव कराने के लिए एक गैर-पक्षपाती टेक्नोक्रेट सरकार का गठन किया हो सकता है, क्योंकि विपक्ष को डर है कि सत्तारूढ़ दल द्वारा चुनाव में धांधली होगी।
  • यदि विपक्ष चुनाव का बहिष्कार करता है, तो लोगों की सीमित भागीदारी वाला चुनाव होगा।