जापान के हाथ लगी बड़ी कामयाबी:समुद्र में दुर्लभ खनिज ढूंढे, नई खोज से 500 वर्षों की जरूरत पूरी होगी, चीन पर निर्भरता होगी खत्म

5 महीने पहलेलेखक: टोक्यो से भास्कर के लिएजूलियन रायल
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काइमी की यह छलांग जापान के समुद्र में 6 हजार किमी की गहराई में मिले दुर्लभ खनिजों को निकालने का पहला बड़ा कदम है। - Dainik Bhaskar
काइमी की यह छलांग जापान के समुद्र में 6 हजार किमी की गहराई में मिले दुर्लभ खनिजों को निकालने का पहला बड़ा कदम है।

जापानी शोध पोत काइमी ने 8023 मीटर समुद्री गहराई को छूने का नया रिकॉर्ड बनाया है। यह पोत टेक्टोनिक्स प्लेट और बड़े भूकंप आने की वजहों की पड़ताल कर रहा है। लेकिन काइमी की यह छलांग जापान के समुद्र में 6 हजार किमी की गहराई में मिले दुर्लभ खनिजों को निकालने का पहला बड़ा कदम है। ताकि दुर्लभ खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता खत्म हो सके।

दरअसल, जापान की यह सारी कवायद चीन के इर्दगिर्द घूमती है। राजनयिक विवाद के बाद चीन ने दुर्लभ खनिजों के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया था। वर्तमान में, जापान में आयातित सभी दुर्लभ धातुओं में चीन की हिस्सेदारी करीब 58 फीसदी है।

टोक्यो के इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के एसोसिएट प्रोफेसर स्टीफन नेगी कहते हैं कि 2000 में जब पूर्वी चीन सागर में द्वीपों पर चीन और जापान के बीच विवाद भड़क गया, बीजिंग ने जापान को बेचे जाने वाले दुर्लभ-पृथ्वी खनिजों पर प्रभावी रूप से प्रतिबंध लगा दिया था। ये खनिज नेस्क्ट जेनेरेशन टेक्नोलॉजी के लिए अहम हैं। तभी से टोक्यो ने नए स्रोतों की तलाश शुरू कर दी थी।

दुर्लभ खनिजों में दुनिया का नेतृत्व करेगा जापान

  • जापान एजेंसी फॉर मरीन-अर्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों को ओगासावारा द्वीप के समुद्र तल में दुर्लभ खनिज और येट्रियम मिले हैं। करीब 400 वर्ग किमी के इलाके को चिह्नित किया गया है।
  • यह 16 मिलियन टन दुर्लभ ऑक्साइड है, जिसमें 780 साल की घरेलू जरूरत जितना येट्रियम, 620 वर्षों की जरूरत जितना यूरोपियम, 420 सालों का टर्बियम और 730 साल का डिस्प्रोसियम का भंडार है।
  • ये दुर्लभ धातुएं टेक्नोलॉजी, रक्षा और परमाणु क्षेत्र के लिए अहम हैं।

34 दुर्लभ खनिजों का स्टॉक 180 दिन कर रहा जापान

जापान दुर्लभ खनिजों के भंडार को तेजी से बढ़ा रहा है। वो घरेलू फर्मों को विदेशी माइन में हिस्सेदारी और ई-व्हीकल, संचार डिवाइस व अन्य मूल्यवान खनिजों के लिए कच्चे माल को संसाधित करने की क्षमता में मदद करेगा। अब तक जापान के पास 34 दुर्लभ खनिजों का रणनीतिक भंडार 60 दिनों को था, जिसे बढ़ाकर 180 दिन किया जा रहा है। ताकि घरेलू फर्मों का काम प्रभावित न हो।

चीन प्राकृतिक संसाधनों के लिए दुनिया से करार कर रहा

दुर्लभ खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता जापान के लिए खतरनाक है। चीन प्राकृतिक संसाधनों के भंडार तक पहुंच बनाने के लिए अन्य देशों से करार कर रहा है। मिसाल के लिए, कांगो दुनिया में कोबाल्ट का सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन चीन ने कांगो सरकार के साथ समझौता किया है ताकि देश में खनन किए गए सभी कोबाल्ट का 60 प्रतिशत गलाने के लिए चीन भेज दिया जाए।

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