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स्विट्जरलैंड में नई पहल:बुजुर्गों को ध्यान में रखकर टाइम बैंक योजना शुरू, वॉलंटियर्स के तौर पर युवा जुड़ रहे

बर्न10 दिन पहले
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अपना वक्त किसी की मदद में लगाइए, ये टाइम बैंक में सेव रहेगा, भविष्य में जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकेंगे। - Dainik Bhaskar
अपना वक्त किसी की मदद में लगाइए, ये टाइम बैंक में सेव रहेगा, भविष्य में जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकेंगे।

67 साल की क्रिस्टिना स्कूल से रिटायर होने के बाद अकेले ही जीवन बिता रही थीं। जीवन बसर के लिए उन्हें सरकार से पर्याप्त पेंशन मिल जाती है। उन्होंने घर का एक हिस्सा किराए पर भी उठा रखा है। इसलिए उन्हें किसी तरह की चिंता नहीं है। इसके बावजूद वे 87 साल के एक बीमार बुजुर्ग की देखभाल में जुट गई थीं। एक दिन किराएदार ने क्रिस्टिना से पूछा कि आप यह सब पैसे के लिए कर रही हैं, तो क्रिस्टिना ने कहा नहीं...मैं पैसों के लिए नहीं बल्कि अपना समय बैंक में सुरक्षित रखने के लिए कर रही हूं।

जब मैं बूढ़ी हो जाऊंगी और चलने-फिरने में असमर्थ रहूंगी, तब मैं इस सेव किए गए समय को वापस ले सकूंगी। दरअसल स्विट्जरलैंड ने ‘टाइम बैंक’ योजना शुरू की है। इसके तहत देश के नागरिक किसी की मदद के लिए अपना समय देकर उसे ‘अर्जित पूंजी’ के रूप में टाइम बैंक में सेव कर सकते हैं। भविष्य में जरूरत पड़ने पर वे इसका उपयोग भी कर सकेंगे। स्विट्जरलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह योजना खासतौर पर अकेले रह रहे बुजुर्गों को ध्यान में रखकर तैयार की है।

इसके तहत देश के लोग अपनी इच्छा से जरूरतमंद बुजुर्गों की सेहत खराब होने पर ध्यान रख सकते हैं। या अकेलापन दूर करने के लिए बुजुर्गों के साथ वक्त बिता सकते हैं। बुजुर्गों को दिया गया यह वक्त इन वॉलंटियर्स के सामाजिक सुरक्षा खाते में ‘टाइम यूनिट’ के रूप में जमा हो जाता है। जब ये वॉलंटियर्स वृद्धावस्था में पहुंचेंगे और उन्हें भी किसी काम में मदद की जरूरत होगी तो टाइम बैंक उनके लिए वॉलंटियर की व्यवस्था करेगा। जितना समय उन्होंने टाइम बैंक में जमा किया होगा, उतने ही वक्त के लिए वे भी मदद पा सकेंगे।

दुनियाभर में बुजुर्गों की जनसंख्या बढ़ रही है, संतानें नौकरी और करियर के चलते साथ नहीं रह पातीं। ऐसे में यह कॉन्सेप्ट काफी मददगार साबित हो रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, न्यूजीलैंड, स्पेन और ग्रीस जैसे देश भी इस सिस्टम को अपना चुके हैं। सिंगापुर भी इसे जल्द लागू करने पर विचार कर रहा है। इस कॉन्सेप्ट पर सबसे पहले चर्चा अमेरिकी प्रोफेसर एडगर चान ने 1980 में शुरू की थी। उस वक्त अमेरिका में रीगन की सरकार ने बड़े पैमाने पर सामाजिक कार्यक्रमों में कटौती कर दी थी। प्रो. चान ने इसे विकल्प के तौर पर पेश किया था।

वॉलंटियर्स द्वारा काम में लगाए गए वक्त की ट्रैकिंग करता है टाइम बैंक
टाइम बैंक का कॉन्सेप्ट लेन-देन के मॉडल पर बना है। इसके तहत आईटी सेवाएं, सलाह लेना, बच्चों की देखभाल, सैलून संबंधी मदद, गार्डनिंग, घर में सुधार या कोई अन्य समय लेने वाला काम शामिल है। काम में लगने वाले समय को टाइम बैंक द्वारा ट्रैक किया जाता है। ये समय टाइम यूनिट के रूप में जमा होता जाता है। योजना में स्विस युवा बड़ी संख्या में जुड़ रहे हैं। इनका मानना है कि ढलती उम्र में उन्हें भी सहारे की जरूरत होगी, तब ये बचाया वक्त ही काम आएगा।

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