रूस-यूक्रेन में नया विवाद:रूस बोला- जंग का डर हटाने के लिए सेना वापस बुला रहे; यूक्रेन ने कहा- रूसी दावे पर भरोसा नहीं

5 महीने पहले

समाचार एजेंसी AFP की खबर के अनुसार, यूक्रेन के पास तैनात रूसी सैनिक अपने ठिकानों पर वापस लौट रहे हैं। इसको लेकर मॉस्को ने कहा है कि यूक्रेन के पास तैनात कुछ सेनाएं अपने ठिकानों पर लौट रही हैं, क्योंकि सीमाओं पर रूसी सेना की तैनाती से यूक्रेन को इस बात का डर सता रहा था कि रूस उस पर कभी भी हमला कर सकता है। रूस ने कहा है कि इस कदम से यूक्रेन का डर खत्म करने में मदद मिलेगी। हालांकि रूस ने यह भी कहा कि यूक्रेन सीमा से कुछ ही सैनिकों की वापसी हो रही है और बड़े पैमाने पर अभ्यास अभी भी जारी है।

यूक्रेन को है संदेह

CNN कि एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने रूस की सैनिकों की वापसी वाली घोषणा पर संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा, रूस की ओर से लगातार विभिन्न बयान दिए जा रहे हैं, इसलिए हमारा नियम है: देखें और फिर विश्वास करें। जब हम सैनिकों को वापस जाते देख नहीं लेते, तब हम डी-एस्केलेशन में विश्वास नहीं करेंगे।

नाटो की राय

नाटो के प्रमुख जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने रूस के इस कदम का स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि डी-एस्केलेशन का कोई संकेत नहीं मिला है। नाटो प्रमुख ने कहा कि रूस, यूक्रेन की सीमा पर सैन्य निर्माण के बीच एक राजनयिक समाधान की तलाश में हो सकता है, लेकिन अगर रूस सच में समाधान चाहता है तो उसे डी-एस्केलेशन दिखाना होगा। मास्को ने कूटनीति जारी रखने के संकेत दिए हैं। यह सतर्क आशावाद के लिए आधार हो सकता है। स्टोलटेनबर्ग ने कहा, रूस के पास अभी भी पीछे हटने, युद्ध को टालने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने का समय है। रूस दावे पर पश्चिमी देशों से सधी हुई प्रतिक्रिया आई है। ब्रिटिश पीएम बोरिस जानसन ने कहा कि रूस के साथ कूटनीतिक वार्ता का रास्ता खुला है लेकिन जमीनी स्तर पर खुफिया जानकारी उत्साहजनक नहीं है।

टकराव को टालने की कोशिश
रूस के शीर्ष राजनयिक ने सोमवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सुरक्षा मांगों के मसले पर पश्चिमी मुल्‍कों के साथ बातचीत जारी रखने की सलाह दी थी। इसके बाद जर्मन चांसलर ओलाफ स्काल्ज युद्ध को टालने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के लिए मास्को पहुंचे, जहां दोनों के बीच यूक्रेन की सुरक्षा को लेकर बातचीत की। उनसे मुलाकात के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि हम यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहते, पर नाटो को लेकर कीव का मसला तुरंत हल किया जाना चाहिए। उसे नाटो का सदस्य न बनाया जाए। शुल्ज ने कहा कि वार्ता जारी है। रूस का सेना हटाना स्वागत योग्य है।

भारत 85% कच्चा तेल दूसरे देशों से मंगाता है
संकट से भारत को बड़ा नुकसान हो रहा है, क्योंकि जरूरत का 85% कच्चा तेल बाहर से खरीदना होता है। आईआईएफएल सिक्युरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता कहते हैं कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। चुनाव बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 15 रुपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध भारत के लिए चिंता की बात है क्योंकि भारत 85% कच्चा तेल दूसरे देशों से मंगाता है।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध भारत के लिए चिंता की बात है क्योंकि भारत 85% कच्चा तेल दूसरे देशों से मंगाता है।

गतिरोध से सऊदी अरब को फायदा, भारत के लिए परेशानी

यूक्रेन-रूस गतिरोध से दुनिया में तेल के दाम तेजी से चढ़े हैं। इस संकट का सबसे बड़ा फायदा सऊदी अरब को हो सकता है। वह इस संकट में खुद को वैश्विक राजनीति में फिर से स्थापित का मौका देख रहा है, क्योंकि बीते 4 साल सऊदी शाही परिवार ने मुश्किल भरे रहे हैं। अब सऊदी अरब अमेरिका का कट्‌टर समर्थक बनकर उभरा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, इसका वैश्विक कच्चे तेल उत्पादन क्षमता का 55 फीसदी हिस्से पर कब्जा है। ताजा संकट से उसके पास तेल की इतनी मांग बढ़ चुकी है कि वह उसे पूरा नहीं कर पा रहा है। बढ़ी हुई मांग और कीमतों के चलते सऊदी को इस साल 375 अरब डॉलर (करीब 28 लाख करोड़ रुपए) का राजस्व मिल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो 2012 के बाद सबसे बड़ा राजस्व होगा। 2012 में उसे 400 अरब डॉलर(30 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा मिले थे। बीते साल उसे करीब 200 अरब डॉलर (करीब 15 लाख करोड़ रुपए) मिले थे। जबकि 2020 में महज 145 अरब डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपए) ही थे। यानी इस साल राजस्व दोगुना होने के आसार है।

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नई सैटेलाइट इमेज में दिखी थी सैन्य गतिविधियां

रूस के ऐलान से कुछ देर पहले ही यूक्रेन के पास कई स्थानों पर रूसी सैन्य गतिविधियों को दिखाती हुई नई सैटेलाइट इमेज सामने आई थी। इन तस्वीरों में बेलारूस, क्रीमिया और पश्चिमी रूस में भारी संख्या में तैनात बलों की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। पिछले कई हफ्ते से रूसी सेना के निर्माण पर नजर रख रही अमेरिका की मैक्सार टेक्नोलॉजीज ने ये तस्वीरें जारी की है।

बॉर्डर पर मौजूद रूस की सेना के टैंकों के साथ आर्टिलरी और सैनिकों की सैटेलाइट तस्वीर।
बॉर्डर पर मौजूद रूस की सेना के टैंकों के साथ आर्टिलरी और सैनिकों की सैटेलाइट तस्वीर।

बीती रात यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में 16 फरवरी को रूसी आक्रमण की घोषणा की थी, जिसके बाद रूस ने कहा, दक्षिणी और पश्चिमी सैन्य इकाइयाँ ... अपनी सैन्य चौकियों में वापस जाना शुरू कर देंगी।

सैटेलाइट इमेज में यूक्रेन की सीमा पर रूसी सेना के हेलिकॉप्टर और टैंक्स दिखाई दे रहे थे।
सैटेलाइट इमेज में यूक्रेन की सीमा पर रूसी सेना के हेलिकॉप्टर और टैंक्स दिखाई दे रहे थे।

बातचीत बेनतीजा
विवाद शांत करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की थी, जो बेनतीजा रही। बातचीत के दौरान बाइडेन ने पुतिन से युद्ध टालने की अपील की और चेतावनी भी दी कि अगर युद्ध हुआ तो रूस को करारा जवाब मिलेगा।

अमेरिकी रुख को देखते हुए रूस ने अमेरिका को सनकी तक कह डाला। बातचीत के कुछ देर बाद ही अमेरिका ने यूक्रेन स्थित अपने दूतावास को खाली करने का निर्देश भेज दिया। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच हालात स्थिरता को लेकर बात नहीं बन पाई है।

वहीं, समाचार एजेंसी रायटर की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन का भी कहना है कि अभी भी दोनों मुल्‍कों के बीच बातचीत के रास्‍ते बंद नहीं हुए हैं। तनाव को खत्म कराने की कोशिशें जारी हैं। दरअसल रूस ने यूक्रेन की सीमाओं पर एक लाख 30 हजार से ज्यादा सैनिक तैनात कर दिए हैं। इसको लेकर पश्चिमी मुल्‍क सतर्क हो गए हैं।

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