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चीन और पाकिस्तान की गुटबंदी:एक दिन पहले भारत में NSA लेवल मीटिंग में दोनों नहीं आए, दूसरे दिन खुद उसी मुद्दे पर मीटिंग की

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
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अमेरिका, चीन और रूस के प्रतिनिधियों के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री। - Dainik Bhaskar
अमेरिका, चीन और रूस के प्रतिनिधियों के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री।

अफगानिस्तान मुद्दे पर चीन और पाकिस्तान की दोहरी नीति सामने आई है। भारत में एक दिन पहले अफगानिस्तान को लेकर NSA स्तर की मीटिंग में दोनों देशों ने शामिल होने सो मना कर दिया। ठीक एक दिन बाद गुरुवार को दोनों देशों ने उसी मुद्दे पर अमेरिका और रूस के साथ इस्लामाबाद में मीटिंग की।

इस्लामाबाद में ट्रोइका प्लस की बैठक को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि शांति और स्थिरता को मजबूत करने में मदद के लिए तालिबान की इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान (IEEA) सरकार के साथ बातचीत जारी रहनी चाहिए।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान को तत्काल मानवीय मदद उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। साथ ही तालिबान की खुलकर तरफदारी की। उन्होंने कहा कि कोई भी फिर से सिविल वॉर नहीं चाहता है जिससे अर्थव्यवस्था फिर से चरमरा जाए और अस्थिरता आए। सभी चाहते हैं कि आतंकवादियों से प्रभावी तरीके से निपटा जाए। हम सब शरणार्थियों के संकट से बचना चाहते हैं।

चार देशों की अफगानिस्तान की स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन चार देशों की अफगानिस्तान की स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका है। अफगानिस्तान में शांति केवल पाकिस्तान के लिए नहीं विश्व के लिए भी जरूरी है। विदेश मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान आज आर्थिक पतन के कगार पर खड़ा है और अंतरराष्ट्रीय वित्त पोषण समाप्त होने के साथ विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की बात तो दूर, वेतन देना भी मुश्किल हो गया है। हमारा मानना है कि तालिबान लोगों के साथ जुड़ने में रुचि रखते हैं, क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति और समर्थन चाहते हैं।

बुधवार को भारत में हुई बैठक में शामिल हुए थे 8 देश।
बुधवार को भारत में हुई बैठक में शामिल हुए थे 8 देश।

भारत की बैठक से दूर रहे चीन-पाकिस्तान
इससे पहले भारत में आयोजित NSA लेबल की मीटिंग से चीन और पाकिस्तान ने किनारा कर लिया था। पाकिस्तान ने जहां इसमें शामिल होने से सीधे मना किया था, वहीं चीन ने शेड्यूल का हवाला देकर दूरी बना ली थी। भारत ने भी अफगानिस्तान के मुद्दे पर ही मीटिंग बुलाई थी।

इसमें ईरान, रूस के अलावा मध्य एशियाई देश ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान, कजाखस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान शामिल थे। मीटिंग में सभी देशों ने अफगानिस्तान के मौजूदा हालात पर चिंता जताई और कहा है कि वहां से आतंक और ड्रग्स की तस्करी को रोका जाना चाहिए।

​​​​​​मुद्दा तो वही है, लेकिन भारत के साथ बैठक नहीं करना चाहता चीन
भारत और पाकिस्तान की बैठकों का मुद्दा एक ही है- अफगानिस्तान के हालात को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है, ताकि वहां के लोग अमन और चैन से भरी खुशहाल जिंदगी जी सकें। इसके बाद भी चीन ने भारत में हुई बैठक में शामिल होने से शेड्यूल का बहाना बनाकर मना कर दिया।

कहीं न कहीं इसका मतलब निकाला जा सकता है कि चीन भारत के साथ बैठक नहीं करना चाहता है। भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा-विवाद चल रहा है। दोनों देश कई बैठकें कर चुके हैं, लेकिन उनका कोई हल नहीं निकला। दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर भी तनातनी चल रही है। चीन के प्रभुत्व को बढ़ने से रोकने के लिए भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ मिलकर रणनीति बना रहा है। ऐसे में चीन का भारत की बैठक में शामिल न होना दोनों देशों के तनावपूर्ण रिश्ते की तरफ इशारा कर रहा है।