लिंक्डिन के 23,000 कर्मचारियों पर सर्वे:कोरोना के बाद बदला दफ्तर का माहौल, साथियों से गम बांटना चाहते हैं कर्मचारी

न्यूयाॅर्क19 दिन पहले
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दफ्तर में अपनी परेशानियों का जिक्र न करना गुजरे जमाने की बात हो गई है। लोग अब दफ्तर में व्यक्तिगत परेशानियों को अपने सहकर्मियों से शेयर कर रहे हैं। कोरोना ने दुनिया में बहुत कुछ बदला है और दफ्तरों का नया माहौल इसी बदलाव का नतीजा है। यह खुलासा लिंक्डिन के नए सर्वे से हुआ है।

लिंक्डिन ने दुनिया भर के 23,000 कर्मचारियों पर सर्वे किया
सर्वे के मुताबिक, कर्मचारी ऐसा बॉस और सहकर्मी चाहते हैं, जो उनकी निजी परेशानियों और भावनाओं को समझे। लिंक्डिन ने दुनिया भर के 23,000 कर्मचारियों पर सर्वे किया, जिसमें 61 फीसदी लोगों ने माना कि दफ्तरों में सॉफ्ट स्किल्स की उतनी ही जरूरत है, जितनी की हार्ड स्किल्स की।

एक अन्य सर्वे में यह बात सामने आई है कि जिन कर्मचारियों को लगता है कि उनके मैनेजर उन्हें नहीं समझते, वे नई नौकरियों की तलाश शुरू कर देते हैं। सोशल प्लेटफॉर्म ने हाल में कर्मचारी बेहतरी रिपोर्ट में पाया है कि जिन कर्मचारियों को लगता है कि कंपनी उनका ख्याल रख रही है, वे कंपनी में अपनी भूमिका से संतुष्ट हैं और नौकरी बदलना नहीं चाहते।

कोरोना के बाद जिंदगी मुश्किल हुई है
कंपनियों के लिए जरूरी कि वे कर्मचारियों का ख्याल रखें अमेरिका में पीपुल साइंस एट हेमू की संस्थापक डॉ. जेसी विजडम कहती हैं कि कोरोना के बाद जिंदगी मुश्किल हुई है। कर्मियों की कमी है। ऐसे में कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे कर्मचारियों का ख्याल रखें और उनकी जरूरी चीजों पर तुरंत ध्यान देना शुरू कर दें।

सॉफ्ट स्किल्स यानी कर्मचारियों से इमोशन बॉन्ड
दफ्तर में अपने सहकर्मियों का सहयोग, उनसे बेहतर बातचीत करने के साथ ही उनकी भावनाओं का सम्मान करना दफ्तर की सॉफ्ट स्किल्स समझी जाती हैं। साथ ही मैनेजरों के लिए यह भी जरूरी है कि वे अपने सहयोगियों के साथ खुद ही बातचीत की शुरुआत करें और उन्हें सुनें। वे उन्हें ऐसा महसूस कराएं कि वे उस समूह का हिस्सा हैं।