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नेपाल में राजनीतिक घमासान:ओली और प्रचंड के हाथ से अब पार्टी का नाम भी गया, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पार्टियों का 3 साल पुराना विलय रद्द किया

काठमांडु9 महीने पहले
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  • सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग का फैसला पलटकर ऋषि कात्याल को सौंपा नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी का टाइटल

नेपाल में राजनीतिक उठा-पटक तेज होती जा रही है। ताजा घटनाक्रम में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और उनके धुर विरोधी पुष्पा कमल दहल प्रचंड के हाथ से अब नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी का नाम भी छिन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए साल 2018 में हुए ओली और प्रचंड की पार्टी का विलय रद्द कर दिया है। कोर्ट ने नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) के टाइटल का अधिकार सीनियर कम्युनिस्ट लीडर ऋषि कात्याल को सौंप दिया।

जस्टिस कुमार रेगमी और बोम कुमार श्रेष्ठ ने रविवार को करीब 3 साल पुराने मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जब इस नाम की पार्टी पहले से ही रजिस्टर्ड है तो उसी नाम से नई पार्टी कैसे बन सकती है। फैसले के बाद कात्याल के वकील दंडपाणि पॉडेल ने अपनी जीत पर खुशी जताई।

कात्याल की पार्टी का नाम भी NCP था
ऋषि कात्याल पुराने कम्युनिस्ट नेता हैं। उन्होंने साल 2018 में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (UML) और उनके धुर विरोधी पुष्पा कमल दहल प्रचंड की पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सेंटर) के बीच विलय के बाद कोर्ट में एक रिट दाखिल की थी। जिसमें कात्याल ने दावा किया था कि कानून एक ही नाम के साथ दो दलों के अस्तित्व की अनुमति नहीं देता है। दरअसल कात्याल ने पहले से ही चुनाव आयोग में नेपाली कांग्रेस पार्टी के नाम से रजिस्ट्रेशन करवाया हुआ था।

चुनाव आयोग का फैसला पलटा
2017 के नेपाल के चुनाव में यूएमएल ने 121 और माओवादी सेंटर ने 53 सीटें जीती थीं। बाद में ओली और प्रचंड के बीच एक समझौते के तहत दोनों ने अपनी पार्टी का विलय कर लिया। विलय के बाद 2018 में नई पार्टी का नाम नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी रखा गया। ये लगभग दो-तिहाई सीटों के साथ संसद में सबसे बड़ी पार्टी बन गई।

ओली खुश तो प्रचंड हुए निराश
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने खुशी जताई है। ओली के वित्त मंत्री बिष्णु पांडे ने कहा कि हम फैसले का सम्मान करते हैं, हम न्यायपालिका की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं। वहीं, प्रचंड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उम्मीदों से परे बताया है। प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट ने फैसले के बाद एक आपात बैठक भी की।

संसद भंग करने का फैसला भी रद्द कर दिया था
ओली और प्रचंड के बीच पहले से ही पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद को लेकर खींचतान मची हुई है। फिलहाल, दोनों गुट दो दलों के रूप में काम कर रहे थे, हालांकि प्रधानमंत्री ओली ने 20 दिसंबर को संसद भंग कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार का फैसला रद्द करते हुए संसद को बहाल कर दिया। अब नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी का टाइटल हाथ से जाने से दोनों दलों का विलय खत्म हो गया है। ऐसे में दोनों को पुरानी वाली स्थिति में लौटना होगा। यानी अपने पुराने दल के साथ ही काम करना होगा। या फिर से विलय के लिए आवेदन करना होगा, जो कि मुमकिन नहीं लग रहा है।

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