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  • On The Second Day Of The Statement On Russia, Trying To Tell China As Its Own, The Taliban Also Considered China As Their Friend

तालिबान ने चीन को अपना दोस्त बताया:तालिबान के प्रवक्ता ने चीनी मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा- उइगर मुसलमानों को पनाह नहीं देंगे, चीन के कर्मचारियों को सुरक्षा मुहैया कराएंगे

काबुल/बीजिंग4 महीने पहले
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तालिबान के प्रवक्ता सुशील शाहीन ने कहा है कि तालिबान चीन को अफगानिस्तान के ‘मित्र’ के रूप में देखता है।      -फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
तालिबान के प्रवक्ता सुशील शाहीन ने कहा है कि तालिबान चीन को अफगानिस्तान के ‘मित्र’ के रूप में देखता है। -फाइल फोटो

अफगानिस्तान पर तेजी से कब्जा जमाते तालिबान ने शनिवार को चीन को लेकर अपना रुख साफ किया। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से तालिबान के प्रवक्ता सुशील शाहीन ने कहा है कि तालिबान चीन को अफगानिस्तान के ‘मित्र’ के रूप में देखता है। उसने चीन को आश्वस्त किया कि वह उसके अशांत शिंजियांग प्रांत के उइगुर इस्लामी चरमपंथियों को पनाह नहीं देगा। साथ ही उसने उम्मीद जताई कि युद्ध से ध्वस्त हो चुके अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण के लिए चीन उसके यहां निवेश करेगा।

शाहीन ने दावा किया कि अफगानिस्तान के 85% हिस्से पर तालिबान कब्जा कर चुका है। ऐसे में वह चीनी निवेशकों और कामगारों की सुरक्षा की गारंटी देता है। पिछले हफ्ते चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा था कि अफगानिस्तान का मामला दोनाें देशों को प्रभावित कर सकता है इसलिए बीजिंग और इस्लामाबाद को मिलकर क्षेत्रीय शांति को बनाकर रखना होगा। हालांकि इस पेशकश पर चीन की प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस हफ्ते चीन अपने करीब 210 नागरिकों को एक विशेष फ्लाइट के जरिए अफगानिस्तान से बीजिंग ले जा चुका है।

अब रूस से चीन तक आतंक बढ़ने का खतरा

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे का दायरा बढ़ने के साथ ही रूस और चीन सतर्क हो गए हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि तालिबान मध्य एशियाई देशों की सीमाओं का सम्मान करे। ये देश कभी सोवियत संघ का हिस्सा थे। पिछले हफ्ते चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा था कि अफगानिस्तान में सबसे बड़ी चुनौती युद्ध और अराजकता को रोकने की होगी। शंघाई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी में मध्य-पूर्व मामलों के विशेषज्ञ फैन होंगडा ने कहा, ‘अफगानिस्तान में अराजकता अन्य देशों में फैल सकती है। इससे क्षेत्रीय अशांति पैदा होगी।’ जानिए तालिबान के बढ़ते प्रभाव के बीच पड़ोसी देशों की क्या चिंता है...

भारत में 20 से ज्यादा आतंकी समूहों से खतरा

भारत में अफगानिस्तान के राजदूत फरीद मामुंडजे ने कहा, ‘तालिबान की 20 से अधिक आतंकी समूहों से घनिष्ठता है। ये संगठन रूस से भारत तक पूरे क्षेत्र में काम करते हैं। तालिबान का वर्चस्व बढ़ने पर वे भारत के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।’

रूस में पड़ोसी देशों में लोगों के आने की आशंका

आशंका है कि तालिबानी कार्रवाई के कारण कई लोग पड़ोसी मध्य एशियाई देशों जैसे ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान में शरण ले सकते हैं। ये देश रूस के पड़ोसी हैं। रूस को चिंता है कि यहां सुरक्षा का संकट खड़ा हो सकता है।

पाक में 70 हजार को मारने वाला टीटीपी बड़ा खतरा
पाकिस्तान ने 90 के दशक में तालिबान को अफगानिस्तान की सत्ता में आने में मदद की थी। अब उसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के दोबारा खड़े होने की चिंता सता रही है। इस आतंकी संगठन पर 70 हजार लोगों की मौतों का दोष है। कहा जा रहा है कि टीटीपी पाकिस्तान में चीनी प्रोजेक्ट को निशाना बना सकता है। पाक को अफगानिस्तान से 5 लाख शरणार्थियों की आने की भी आशंका है।

भास्कर एक्सपर्ट - मेजर जनरल (रिटायर्ड) पीके चक्रवर्ती

भारत का रुख साफ नहीं, पर हमें बात करनी चाहिए

  • भारत को किस बात की चिंता करनी चाहिए? भारत का रुख अभी क्या है?

भारत का रुख स्पष्ट नहीं है। हालांकि भारत को तालिबान से चर्चा करना चाहिए। हमें विश्वास पैदा करना होगा कि हम दूसरे देश के मामलों में बात कर सकते हैं। हमें नहीं डरना चाहिए कि हम दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में बात करेंगे तो वो कश्मीर जैसे मामलों में हस्तक्षेप करने लगेंगे।

  • तालिबान से भारत के संबंध कैसे रहे हैं?

हमारे संबंध तालिबान के खिलाफ लड़ने वालों से रहे हैं। हम 2001 में नादर्न एलायंस को सपोर्ट कर रहे थे, जो तालिबान से टक्कर ले रहा था।

  • आईएस-तालिबान के संघर्ष के चलते भारत के लिए कोई चुनौती?

अफगान लड़ने में कमजोर नहीं हैं लेकिन वो हवाई क्षेत्र और आधुनिक हथियारों के मामले में कमजोर हैं। आईएस और तालिबान कभी लड़ते तो कभी एक हो जाते हैं। दोनों आतंकी संगठन हैं।

  • हमारी सीमा तो अफगानिस्तान से दूर है?

लाहौर एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही 15 मिनट में हम अफगान क्षेत्र में पहुंच जाते हैं। पाकिस्तान के अलावा फ्यूल लेना होगा या मदद की जरूरत पड़ेगी तो अफगान ही हमारा मददगार होगा।

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