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  • Order in China remove foreign computer equipment and software from all government offices, implement indigenous technology in 3 years

ट्रेड वॉर / चीन में आदेश- सभी सरकारी दफ्तरों से विदेशी कंप्यूटर-उपकरण और साॅफ्टवेयर हटाओ, स्वदेशी लाओ

ट्रेड वाॅर के बीच चीन ने अमेरिका को तगड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है। ट्रेड वाॅर के बीच चीन ने अमेरिका को तगड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है।
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ट्रेड वाॅर के बीच चीन ने अमेरिका को तगड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है।ट्रेड वाॅर के बीच चीन ने अमेरिका को तगड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है।

  • चीन ने डेल, एचपी, माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियों को झटका देने की तैयारी की
  • अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने चीन की कंपनियों के साथ कारोबार पर रोक लगाई थी

Dainik Bhaskar

Dec 10, 2019, 05:48 AM IST

बीजिंग. ट्रेड वाॅर के बीच चीन ने अमेरिका को तगड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है। उसने पश्चिमी टेक्नोलॉजी और उससे जुड़े कंप्यूटर-उपकरणों को देश से हटाने का निर्णय लिया है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कम्युनिस्ट सरकार ने सभी सरकारी और सार्वजनिक कार्यालयों को आदेश दिया है कि वह आने वाले तीन साल में अपने यहां से विदेशी कंप्यूटर, उनके उपकरणों (हार्डवेयर) और सॉफ्टवेयर हटा दें। उनकी जगह देश में बने कंप्यूटर-उपकरण और सॉफ्टवेयर लगाएं, ताकि टेक्नोलॉजी में देश आत्मनिर्भर हो सके।

ट्रेड वाॅर अब टेक्नोलॉजी कोल्ड वाॅर में बदला

विदेशी टेक्नोलॉजी पर रोक लगाने से डेल, एचपी, माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों को झटका लगेगा, क्योंकि चीन उनके ऑपरेटिंग सिस्टम और उपकरणों के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेड वाॅर अब टेक्नोलॉजी कोल्ड वॉर में बदल गया है, क्योंकि पहले अमेरिका ने चीन की टेक्नोलॉजी को सीमित करने का प्रयास किया था। 


ट्रम्प ने चीन की कंपनियों के साथ कारोबार पर रोक लगाई थी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने इस साल मई की शुरुआत में अमेरिकी कंपनियों को चीन की दूरसंचार कंपनी हुवावे के साथ कारोबार करने पर रोक लगा दी थी। तब ट्रम्प ने साफ कर दिया था कि अगले दो दशकों तक दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच वास्तविक लड़ाई टेक्नोलॉजी को लेकर होगी। इसके बाद गूगल, इंटेल और क्वालकॉम ने हुवावे के साथ कारोबार बंद करने का ऐलान किया था। 


बड़ी चुनौती: चीन के कंप्यूटरों में भी चिप और प्रोसेसर अमेरिकी

चीन में 3 साल में सभी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर बदलना सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि उसमें विंडोज, माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों के सॉफ्टवेयर इस्तेमाल हो रहे हंै। इसके अलावा चीन की लेनोवो जैसी कंपनियां भी अमेरिकी चिप-प्रोसेसर लगा रही हैं। 

30% अगले साल तक, 2021 तक 50% और बाकी 2022 तक हटेंगे
रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी आदेश में कहा गया है कि दफ्तरों से 2 से 3 करोड़ विदेशी कंप्यूटर-उपकरण अगले साल तक देशी से बदलने होंगे। यह देश के सरकारी-सार्वजनिक दफ्तरों में इस्तेमाल हो रहे कुल सिस्टम का 30%हैं। इसके बाद 2021 तक 50% और बाकी बचे 20% विदेशी कंप्यूटर-उपकरणों को 2022 तक बदले जाने काे कहा गया है।

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