पाकिस्तान / कारोबारियों ने आर्मी चीफ से कहा- मुल्क के आर्थिक हालात अंधेरी सुरंग जैसे; रोशनी की उम्मीद नहीं

जनरल बाजवा ने अर्थव्यवस्था सुधार की दिशा में इसी महीने देश के शीर्ष कारोबारियों से मुलाकात की थी। (फाइल) जनरल बाजवा ने अर्थव्यवस्था सुधार की दिशा में इसी महीने देश के शीर्ष कारोबारियों से मुलाकात की थी। (फाइल)
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जनरल बाजवा ने अर्थव्यवस्था सुधार की दिशा में इसी महीने देश के शीर्ष कारोबारियों से मुलाकात की थी। (फाइल)जनरल बाजवा ने अर्थव्यवस्था सुधार की दिशा में इसी महीने देश के शीर्ष कारोबारियों से मुलाकात की थी। (फाइल)

  • आर्मी चीफ जनरल बाजवा ने अर्थव्यवस्था सुधार की दिशा में इसी महीने देश के शीर्ष कारोबारियों से मुलाकात की थी
  • इमरान और मंत्रियों को इस गुप्त बैठक से दूर रखा गया, अब इसकी कुछ बातें सामने आईं हैं

दैनिक भास्कर

Oct 16, 2019, 06:08 PM IST

इस्लामाबाद. आर्मी चीफ जनरल बाजवा पाकिस्तान के आर्थिक हालात सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने देश के शीर्ष कारोबारियों के साथ गुप्त बैठक की थी। इसकी कुछ जानकारी मीडिया में लीक हो गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मीटिंग में कारोबारियों ने सेना प्रमुख से कहा- पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था अंधेरी सुरंग जैसी हो गई है, हमें कहीं उम्मीद की किरण नजर नहीं आती। यह मीटिंग इस महीने के शुरू में हुई थी। पहले सेना और सरकार ने ऐसी किसी कवायद से इनकार किया लेकिन बाद में कैबिनेट ने इसे सौजन्य भेंट बताया। 

 

सरकार की शिकायत
सेना प्रमुख और कारोबारियों के इस मीटिंग पर एक रिपोर्ट ‘द डॉन’ अखबार में प्रकाशित हुई। इसके मुताबिक, ‘कारोबारियों ने जनरल बाजवा से मीटिंग में कुछ बेहद अहम मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा- हमें वर्तमान आर्थिक परिस्थितियां किसी अंधेरी सुरंग की तरह नजर आ रही हैं। इसमें कहीं भी रोशनी नजर नहीं आती। अगर आपातकालीन उपाय नहीं किए गए तो हालात बद से बदतर होते जाएंगे।’

 

टैक्स सिस्टम से बर्बादी
रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबारियों की एक शिकायत यह थी कि सरकार ने नए टैक्स लगाए हैं। इसमें भी सबसे बड़ी परेशानी ये है कि बढ़ाया हुआ या नया टैक्स उन कारोबारियों को ही देना पड़ रहा है जो पहले से ही इसके बोढ तले दबे हुए हैं। ऐसे में बिजनेस हाउसेज का मनोबल गिरना बिल्कुल स्वाभाविक है। पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच के लिए ‘नेशनल अकांटेबिलिटी ब्यूरो’ यानी नैब एजेंसी बनाई गई है। कारोबारियों ने आर्मी चीफ से कहा कि इसके अफसरों को बिजनेस की कोई जानकारी नहीं है और ये प्रताड़ित करते हैं। 

 

सत्ताधारी दल में ही विरोध
इमरान खान की पार्टी पीटीआई में ही सरकार की आर्थिक नीतियों और नैब का विरोध होने लगा है। कुछ सदस्य सार्वजनिक तौर पर अफसरों की बदमिजाजी और मनमाने रवैये से खफा हैं। उनका कहना है कि आर्थिक जांच एजेंसी में इस विषय के एक्सपर्ट होने चाहिए। यह पारंपरिक पुलिसिंग के तौर पर काम नहीं कर सकती। इससे अवाम में गुस्सा बढ़ रहा है।  

 

बड़ी कंपनियां देश छोड़ने की राह पर
वर्तमान में पाकिस्तान की विकास दर सिर्फ 2% है। यह सरकारी आंकड़ा है। विशेषज्ञ इसे भी सही नहीं मानते। बजट घाटा 8.9% हो चुका है। यह 30 साल में सर्वाधिक है। नेस्ले और टोयाटा जैसी कंपनियां देश से कारोबार समेटने लगी हैं। एफएटीफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा है। आईएमएफ ने उसे 6 बिलियन डॉलर के कर्ज पर रजांदी तो दी है, लेकिन बेहद कड़ी शर्तों पर। इसकी पहली किश्त का कुछ ही हिस्सा इमरान सरकार को मिला है। शर्तें पूरी नहीं हुईं तो कर्ज अटक जाएगा। और अगर पूरी की गईं तो अवाम के सड़कों पर उतरने का खतरा है क्योंकि इससे महंगाई बेतहाशा बढ़ेगी। डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया 170 के स्तर पर पहुंच चुका है।

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