2 दिन बाद कबूलनामा:पाकिस्तानी फौज ने कहा- बलूचिस्तान में हमारे 10 सैनिक मारे गए, बलूचिस्तान के विद्रोही संगठन ने ली जिम्मेदारी

रावलपिंडी8 महीने पहले
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दो दिन चले कयासों के बाद आखिरकार शुक्रवार को पाकिस्तानी सेना ने एक बयान जारी कर मान लिया कि बलूचिस्तान में विद्रोही गुट ने उसके 10 सैनिकों को मार गिराया है। इसके पहले सरकार के दबाव में मीडिया ने भी सैनिकों के मारे जाने की खबर को लगातार दबाने की कोशिश की थी। पाकिस्तान आर्मी के मीडिया विंग ने कहा- हमारे 10 सैनिकों की शहादत हुई है। हालात का जायजा लिया जा रहा है। यह कुर्बानी बेकार नहीं जाने दी जाएगी।

कैसे हुआ हमला
बताया जाता है पाकिस्तानी सेना की यूनिट पर हमला बुधवार तड़के तब हुआ जब वो बलूचिस्तान में एक सीक्रेट ऑपरेशन कर रही थी। बलूचिस्तान के केच जिले के एक गांव में कुछ लोगों को गिरफ्तारी के लिए सैनिक पहुंचे थे। इसी दौरान उनको विद्रोहियों ने घेर लिया और फायरिंग शुरू कर दी। भागने की कोशिश में 10 सैनिकों की मौत हो गई, क्योंकि वो मैदानी इलाका था। घटना में एक विद्रोही के भी मारे जाने की खबर है।

कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि विद्रोहियों ने सैनिकों की एक चेक पोस्ट पर भी कब्जा कर लिया। इसके बाद फौज की एक और टुकड़ी को इलाके में सर्च ऑपरेशन के लिए भेजा गया, हालांकि उसके हाथ कुछ नहीं आया।

पाकिस्तानी सेना पर अब अफगानिस्तान की तरफ से भी हमले हो रहे हैं। NSA ने गुरुवार को खुद संसद के सामने इस बात का खुलासा किया था। (फाइल)
पाकिस्तानी सेना पर अब अफगानिस्तान की तरफ से भी हमले हो रहे हैं। NSA ने गुरुवार को खुद संसद के सामने इस बात का खुलासा किया था। (फाइल)

घटना छिपाने की कोशिश
बुधवार को हुई घटना को दो दिन छिपाने की कोशिश की गई। इसके बाद लोकल मीडिया में कुछ सैनिकों के शव दिखाए गए। दबाव बढ़ने पर शुक्रवार को सुबह फौज ने माना कि 10 सैनिक मारे गए हैं और इलाके में स्पेशल यूनिट ऑपरेशन के लिए भेजी गई है। फौज ने कहा- हम इस इलाके में हमलावरों को खत्म करके रहेंगे, भले ही इसके लिए कितनी भी बड़ी कीमत चुकानी पड़े। प्रधानमंत्री इमरान खान ने मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

CPEC है निशाने पर
पाकिस्तानी सेना और सरकार का कहना है कि बलूचिस्तान के विद्रोही नहीं चाहते कि यहां चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी सीपैक का काम पूरा हो। इसके लिए वो लगातार सिक्योरिटी फोर्सेस पर हमला कर रहे हैं। हाल ही में सेना से संबंधित एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पिछले साल देश में आतंकी हमलों में 56% इजाफा हुआ और यह सरकार और फौज दोनों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। पिछले हफ्ते होम मिनिस्टर शेख रशीद ने कहा था कि मुल्क में आतंकी हमले बढ़ने का खतरा है। उन्होंने अपोजिशन से अपना मार्च में होने वाला लॉन्ग मार्च रद्द करने की भी अपील की थी। पिछले हफ्ते लाहौर के अनारकली बाजार में हुए ब्लास्ट में 12 लोग मारे गए थे।