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पाकिस्तान में सिविल वॉर के हालात:हिंसक प्रदर्शन कर रही TLP में फौजियों के शामिल होने का दावा, इमरान बोले- इस्लाम का सियासी फायदा उठा रहा संगठन

इस्लामाबादएक महीने पहले

पाकिस्तान में गृह युद्ध के हालात पैदा हो गए हैं। फ्रेंच एम्बेसडर को मुल्क से बाहर निकालने के नाम पर आंदोलन कर रही कट्टरपंथी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) ने सोमवार को देश बंद बुलाया है। इमरान सरकार ने TLP से जुड़े किसी भी कार्यक्रम की मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी है। कराची और लाहौर में दो दिन की हिंसा में 8 लोग मारे जा चुके हैं। सोशल मीडिया पर फौजियों के कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें दावा किया गया है कि पाकिस्तानी फौज में विद्रोह हो गया है और कुछ सैनिक TLP में शामिल हो गए हैं।

दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री इमरान खान ने TLP के बहाने मजहबी जमातों और पार्टियों पर निशाना साधा। कहा- यह अफसोस की बात है कि कुछ सियासी और मजहबी जमातें इस्लाम का गलत फायदा उठा रही हैं।

भारत पर ठीकरा
सोमवार देर शाम इमरान ने देश के नाम पैगाम दिया। कहा- अगर हम फ्रांस के राष्ट्रपति को वापस भेजते हैं तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन पाकिस्तान पर मुसीबत आ जाएगी। टेक्सटाइल इंडस्ट्री बंद हो जाएगी, हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। हम बड़ी मुश्किल से अर्थव्यवस्था सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। दंगों में 4 पुलिसकर्मी मारे गए और 800 जख्मी हैं। हमने 3 लाख ट्ववीट्स ट्रैक किए। इनमें 70% फेक यानी फर्जी हैं। भारत की 600 न्यूज साइट्स प्रोपेगंडा कर रही हैं। 380 वॉट्सअप ग्रुप भी यही कर रहे थे। पाकिस्तान में सिविल वॉर बताया जा रहा है।

मीडिया कवरेज पर बैन
सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो शेयर किए गए हैं, जिनमें कुछ पाकिस्तानी सैनिक नौकरी छोड़कर TLP में शामिल होने की बात कह रहे हैं। एक वीडियो में तो सैनिक अपने हथियार कट्टरपंथी नेता के हाथों में सौंपते नजर आ रहे हैं। दो सैनिकों ने अपने नाम बताकर संगठन में शामिल होने का दावा किया। यह इसलिए सही माना जा सकता है क्योंकि, सैनिक जो बता रहे हैं उसे मेनस्ट्रीम मीडिया ने भी कवर किया था।

हामिद मीर, आरजू काजमी और सलीम सैफी जैसे कई मशहूर पत्रकारों ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खुलकर बताया है कि TLP मामले की कवरेज से रोका गया है। तीन दिन से ज्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।

हजारों कट्टरपंथी सड़कों पर उतरे
सोमवार को TLP ने पाकिस्तान बंद का आह्वान किया था। देश के ज्यादातर हिस्सों में इसे बड़ी कामयाबी मिलती देखी गई। इस्लामाबाद और रावलपिंडी जैसे प्रमुख शहरों में किसी भी एंट्री पर रोक लगा दी गई है। यहां पुलिस ने बीच रोड पर कंटेनर लगाकर इन्हें ब्लॉक कर दिया। इसके बावजूद हजारों TLP समर्थक सड़कों पर मौजूद हैं। रविवार को कराची और लाहौर में पुलिस की फायरिंग में 8 लोगों के मारे जाने की खबर है। सरकार ने 3 मौतों की पुष्टि की है।

TLP प्रमुख की पिटाई का वीडियो वायरल
सोमवार सुबह ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें TLP प्रमुख साद रिजवी जैसा नजर आने वाला व्यक्ति है। उसको जमीन पर लिटाकर बेरहमी से पीटा जा रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद हिंसा पहले से ज्यादा भड़क सकती है।

दूसरी तरफ, इमरान खान ने पहली बार इस मामले में बयान दिया। एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान खान ने कहा- मजहबी जमातें और राजनीतिक दल इस्लाम का गलत फायदा उठा रहे हैं। मैंने पैगम्बर के अपमान का मामला पूरी दुनिया के सामने रखा। हम इसे सहन नहीं कर सकते।

पाकिस्तान में हिंसक प्रदर्शन की वजह
TLP की मांग है कि फ्रांस में पैगम्बर साहब का अपमान हुआ था, इसलिए पाकिस्तान से फ्रेंच एम्बेसेडर को फौरन निकाला जाए। इमरान सरकार ने इस पर संसद में बहस कराने का वादा किया था। बिल लाने के पहले ही TLP प्रमुख को 12 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया गया। TLP मजहबी और सियासी पार्टी है। पिछले चुनाव में उसे 24 लाख वोट मिले थे। इमरान सरकार फ्रांस के खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले सकती, क्योंकि इससे यूरोपियन यूनियन और अमेरिका उसके खिलाफ हो जाएंगे। इधर, सियासी मजबूरियों के चलते TLP पर बैन तो लगा दिया गया लेकिन, सरकार और फौज सख्त कदम उठाने से डर रही है।

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