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आर्मी चीफ का कार्यकाल बढ़ाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक; इमरान ने दिया था 3 साल का सेवा विस्तार

8 महीने पहले
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पाकिस्तान के आर्मी चीफ को सरकार ने 19 अगस्त को 3 साल का सेवा विस्तार दिया था। (फाइल)
  • पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सेना प्रमुख को सिर्फ राष्ट्रपति ही सेवा विस्तार दे सकते हैं
  • कोर्ट के मुताबिक, अगर कैबिनेट ने इसका अनुमोदन किया था तो वह भी तकनीकी तौर पर ठीक नहीं
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने आर्मी चीफ के एक्सटेंशन पर अस्थायी रोक लगा दी। सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा तीन दिन बाद रिटायर होने वाले हैं। इमरान खान सरकार ने अगस्त में उन्हें 3 साल का सेवा विस्तार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा, “आर्मी चीफ का कार्यकाल बढ़ाने का संवैधानिक अधिकार पाकिस्तान के राष्ट्रपति के पास सुरक्षित है। इस मामले में उनकी तरफ से आदेश या अधिसूचना जारी नहीं की गई।” 

बुधवार को फिर सुनवाई होगी
बाजवा को एक्सटेंशन दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा ने इसे खारिज कर दिया। हालांकि, इसी याचिका को उन्होंने जनहित याचिका के तौर पर मंजूर किया। सुनवाई के बाद जस्टिस खोसा ने केंद्र सरकार की उस अधिसूचना पर अस्थायी रोक लगा दी, जिसमें बाजवा को तीन साल सेवा विस्तार दिया गया था। अगली सुनवाई बुधवार 27 नवंबर को होगी। इमरान सरकार ने 19 अगस्त को जारी अधिसूचना में सेना प्रमुख को तीन साल का एक्सटेंशन दिया था। 

कैबिनेट के फैसले पर भी तल्खी
हाल ही में लाहौर हाईकोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को इलाज के लिए विदेश जाने की मंजूरी दी थी। सरकार इससे नाराज थी क्योंकि वो नवाज से सिक्युरिटी बॉन्ड के तौर पर 700 करोड़ रुपए मांग रही थी। मामले पर चीफ जस्टिस और प्रधानमंत्री इमरान के बीच बयानबाजी भी हुई। अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नया झटका दिया है। बाजवा के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से कहा, “आर्मी चीफ का कार्यकाल बढ़ाने का संवैधानिक अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास है।” इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा, “राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही कैबिनेट ने सेवा विस्तार दिया है।” इस पर जस्टिस खोसा नाराज हो गए। उन्होंने कहा, “आपकी कैबिनेट में 25 सदस्य हैं। 11 ने ही इसका समर्थन किया। बाकी 14 सदस्यों के दस्तखत कहां हैं?” चीफ जस्टिस ने बुधवार को अगली सुनवाई के आदेश दिए। 

प्रधानमंत्री को हद में रहने के लिए कह चुके हैं चीफ जस्टिस
पिछले हफ्ते खोसा ने प्रधानमंत्री इमरान खान को हद में रहने की नसीहत दी थी। उन्होंने प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना कहा था- आप न्यायपालिका पर तंज न कसें। यह 2009 के पहले वाली ज्युशियरी नहीं है, अब वक्त बदल चुका है। सरकार और न्यायपालिका के बीच विवाद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को इलाज के लिए विदेश जाने की मंजूरी से जुड़ा है। सरकार चाहती थी कि नवाज 700 करोड़ रुपए का सिक्युरिटी बॉन्ड भरकर विदेश जाएं। नवाज ने जब इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की तो उसने बिना शर्त यात्रा की इजाजत दे दी। इमरान इसी बात पर न्यायपालिका से नाराज हैं

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