इमरान खान की फजीहत:सर्बिया में PAK एम्बेसी ने पूछा- 3 महीने से सैलरी नहीं मिली, क्या यही नया पाकिस्तान है

इस्लामाबाद7 महीने पहले

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की उनके ही अफसरों ने फजीहत कर दी। सर्बिया में पाकिस्तानी एम्बेसी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें महंगाई के मुद्दे को लेकर इमरान खान पर तंज कसा। पूछा- तीन महीने से हमें सैलरी नहीं मिली। क्या यही नया पाकिस्तान है?

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बाद में सफाई दी। कहा- अकाउंट हैक कर लिया गया था। हालांकि, तब तक यह पोस्ट वायरल हो चुका था। पोस्ट में इमरान के उस बयान का मीम भी शेयर किया गया जिसमें उन्होंने मुल्क से कहा था- आपने घबराना नहीं है।

अफसरों ने कहा- हमारे पास कोई चारा नहीं
ट्वीट में अफसरों ने पूछा कि महंगाई सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ रही है, ऐसे में आपको क्या लगता है कि हम सरकारी मुलाजिम कब तक चुप रहेंगे और कब तक बिना सैलरी के काम करेंगे? तीन महीने से सैलरी नहीं मिली। फीस न भरने के कारण बच्चों को मजबूरन स्कूल छोड़ना पड़ा। क्या यही आपका नया पाकिस्तान है? ऐसे ट्वीट के लिए माफी, लेकिन हमारे पास और कोई चारा नहीं है।

'आपने घबराना नहीं है' नारे का उड़ाया मजाक
ट्वीट के साथ जो वीडियो शेयर किया गया है उसमें इमरान के नए पाकिस्तान के नारे का मजाक उड़ाया गया है। जुलाई में राष्ट्र को संबोधित करते हुए इमरान ने महंगाई के मुद्दे का जिक्र किया था। इसी दौरान उन्होंने कहा था- आपने सबसे पहले घबराना नहीं है। उनके बयान की इस लाइन पर आज भी जोक्स और मीम्स बनाए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने तो इस पर पैरोडी भी बनाईं। एम्बेसी ने भी ट्वीट में यह पैरोडी एम्बेड की थी।

इमरान ने खुद माना था- इकोनॉमी बदहाल
पिछले दिनों इमरान खान ने खुद माना था कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति मुश्किल दौर से गुजर रही है। हमेशा की तरह उन्होंने इन हालात के लिए पुरानी सरकारों को जिम्मेदार ठहराया था। पाकिस्तान और IMF के बीच तीन महीने से बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। IMF ने बजट घाटा कम करने और टैक्स बढ़ाने के लिए कुछ बेहद सख्त शर्तें इमरान सरकार के सामने रखी हैं। दिक्कत ये है कि अगले साल होेने वाले आम चुनाव को देखते हुए इन्हें मानना नामुमकिन जैसा है। पाकिस्तान ने IMF से 3 किश्तों में 6 अरब डॉलर का लोन मांगा है।

सऊदी अरब ने 26 अक्टूबर को तीन अरब डॉलर का कर्ज मंजूर जरूर किया था, लेकिन सख्त शर्तों वाला यह लोन भी अब तक पाकिस्तान के स्टेट बैंक तक नहीं पहुंच सका है।