कर्ज की फांस:IMF ने पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर लोन देने के लिए 5 शर्तें रखीं, इनमें से 3 को पूरा करना मुश्किल

इस्लामाबादएक वर्ष पहले

दिवालिया होने के कगार पर खड़े पाकिस्तान को कर्ज मिलना भी मुश्किल हो गया है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने इमरान खान सरकार को 6 अरब डॉलर का लोन देने के लिए 5 शर्तों की फेहरिस्त थमा दी है। खास बात यह है कि पाकिस्तान अगर इन शर्तों को पूरा कर भी देता है तो उसे कर्ज मिलना तय नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि इन शर्तों के पूरा होने के बाद IMF बोर्ड सिर्फ मांग पर विचार के लिए बैठक बुलाएगा। यानी ये भी मुमकिन है कि कुछ नई शर्तें जोड़ दी जाएं।

बातचीत और सिर्फ बातचीत
इमरान खान 2018 में प्रधानमंत्री बने थे। अब तक चार फाइनेंस मिनिस्टर बदल चुके हैं। कोई भी मुल्क की माली हालत नहीं सुधार सका। अब तो सरकार के पास वित्त मंत्री ही नहीं है। शौकत तरीन संसद के लिए नहीं चुने जा सके तो कुर्सी छोड़ना पड़ी और अब प्रधानमंत्री के फाइनेंंस एडवाइजर हैं।

पाकिस्तान सरकार और IMF के बीच अप्रैल से बातचीत जारी है, लेकिन अब तक लोन नहीं मिल सका है। इसकी वजह पाकिस्तान का ट्रैक रिकॉर्ड भी है। IMF ने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान उसकी आर्थिक सुधार की शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक उसे 6 अरब डॉलर के लोन की एक भी किश्त नहीं मिलेगी।

इमरान खान ने तीन साल में चार फाइनेंस मिनिस्टर बदले। तरीन को फाइनेंस मिनिस्टर की कुर्सी इसलिए छोड़नी पड़ी, क्योंकि वो संसद के लिए नहीं चुने जा सके थे। (फाइल)
इमरान खान ने तीन साल में चार फाइनेंस मिनिस्टर बदले। तरीन को फाइनेंस मिनिस्टर की कुर्सी इसलिए छोड़नी पड़ी, क्योंकि वो संसद के लिए नहीं चुने जा सके थे। (फाइल)

अब कहां दिक्कत?
दरअसल, शौकत तरीन अपने ही बयानों की वजह से फंस गए हैं। सितंबर में उन्होंने 11 दिन तक वॉशिंगटन में IMF टीम से बातचीत की थी। इसके बाद कहा- एक हफ्ते में लोन अप्रूव हो जाएगा। करीब दो महीने गुजरे, कर्ज नहीं मिला। मंगलवार को मीडिया ने जब शौकत से इस बारे में सवाल किए तो वो झल्ला गए और IMF की शर्तों का पिटारा खोल दिया। कहा- मुझसे यह न पूछें कि लोन कब तक और कितना मिलेगा। IMF ने पांच शर्तें रखी हैं। हम दो पहले ही पूरी कर चुके हैं। बाकी के बारे में फैसला सरकार को करना है। डील तो डन हो चुकी है।

ये रहीं 5 शर्तें और उन पर फंसा मामला
IMF ने पिछले महीने ही यह पांच शर्तें पाकिस्तान सरकार के सामने रखी थीं। बिजली और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पहले ही महंगे किए जा चुके हैं। बाकी तीन मांगें- स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान संशोधन बिल लाना, टैक्स छूट रद्द करना और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को सरकारी दखलंदाजी से मुक्त करना हैं।

दिक्कत यह है कि इमरान सरकार को ये तीनों ही शर्तें पूरी करने के लिए संसद के पास जाना होगा। विपक्ष के सहयोग के बिना ये बिल पास नहीं हो सकते। सरकार अगर ऑर्डिनेंस के जरिए ये कोशिश करती है तो इसमें भी 6 महीने लगेंगे। तब तक पैसा कहां से आएगा।