सफाई / पाकिस्तान ने कहा- ननकाना साहिब मामले को सांप्रदायिक रंग देना गलत, वो दो मुस्लिम गुटों का विवाद था

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आयशा फारूखी के मुताबिक, ननकाना साहिब मामला दो मुस्लिम गुटों का विवाद था। (फाइल) पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आयशा फारूखी के मुताबिक, ननकाना साहिब मामला दो मुस्लिम गुटों का विवाद था। (फाइल)
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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आयशा फारूखी के मुताबिक, ननकाना साहिब मामला दो मुस्लिम गुटों का विवाद था। (फाइल)पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आयशा फारूखी के मुताबिक, ननकाना साहिब मामला दो मुस्लिम गुटों का विवाद था। (फाइल)

  • ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर उन्मादी भीड़ ने शुक्रवार को पथराव किया था, भारत में इस पर तीखी प्रतिक्रिया हुई
  • पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा- यह दो गुटों के बीच चाय की दुकान पर शुरू हुआ विवाद था

दैनिक भास्कर

Jan 04, 2020, 06:26 PM IST

इस्लामाबाद. पाकिस्तान ने अपने यहां ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हुए हमले पर सफाई दी। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आयशा फारूखी के मुताबिक, ननकाना साहिब मामले को सांप्रदायिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह दो मुस्लिम गुटों का आपसी विवाद था जो नजदीक की एक चाय की दुकान पर शुरू हुआ था। शुक्रवार को सिखों के इस पवित्र धर्मस्थल पर उन्मादी भीड़ ने हमला किया था। इस दौरान धर्मस्थल पर काफी पथराव किया गया और भड़काऊ नारेबाजी भी हुई थी। भारत में इस मामले पर सख्त प्रतिक्रिया हुई। 

प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की
‘द डॉन’ ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आयशा का बयान प्रकाशित किया। फारूखी ने घटना पर सफाई देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, “पंजाब प्रांत की सरकार के मुताबिक, ननकाना साहिब में दो मुस्लिम गुटों के बीच झड़प हुई। यह विवाद एक चाय की दुकान पर शुरू हुआ था। स्थानीय जिला प्रशासन ने फौरन मामले में दखल दिया। आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग देने की साजिश हो रही है। गुरुद्वारे को कोई क्षति नहीं पहुंची।” ननकाना साहिब सिखों के पहले गुरू गुरू नानक देव जी का जन्म स्थान भी है।     

फंस गए थे सिख श्रद्धालू
पाकिस्तान के सैकड़ों कट्टरपंथियों ने शुक्रवार शाम सिखों के पवित्र धर्मस्थल ननकाना साहिब गुरुद्वारे को घेरकर पथराव किया था। प्रदर्शनकारियों ने सिखों को भगाने और ननकाना साहिब का नाम बदलने की धमकी भी दी। घटना पर भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से नाराजगी जाहिर करने के बाद मामले में पाकिस्तानी सरकार ने हस्तक्षेप किया। इमरान सरकार के अफसरों ने प्रदर्शनकारियों से समझौता कर गुरुद्वारे के बाहर से भीड़ हटाई। 35 सिख श्रद्धालू इस दौरान यहां फंसे थे। इन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। 

कहां से शुरू हुआ विवाद
करतारपुर कॉरिडोर के उद्धाटन (9 नवंबर) से चार दिन पहले ननकाना साहिब गुरुद्वारे के ग्रंथी की बेटी जगजीत कौर को मो. हसन नाम के मुस्लिम युवक ने अगवा कर उसका धर्म परिवर्तन कराया और फिर निकाह कर लिया। तब लड़की के पिता ने करतारपुर में धरना देने की चेतावनी दी थी। इसके चलते पुलिस ने लड़की को वापस पिता के पास भिजवा दिया था। हसन रसूखदार परिवार से है। बाद में कुछ लोगों ने उसकी ताकत पर सवाल उठाए। कहा कि कैसे बंदे हो जो लड़की चली गई। इसके बाद उस युवक ने दोबारा लड़की को अगवा कर लिया। विरोध में सिखों ने प्रदर्शन किया, जिसे स्थानीय मुसलमानों ने समुदाय के खिलाफ मान लिया। इसी वजह से गुरुद्वारा साहिब पर पथराव किया गया।  

उल्टा आरोप सिखों पर
सिख समुदाय के प्रदर्शन के बाद लड़की को अगवा करने वाले हसन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। शुक्रवार को प्रदर्शन के बाद देर रात उसे रिहा कर दिया गया। भीड़ ने कहा, मर्जी से इस्लाम कबूलकर शादी करने वाली लड़कियों को लेकर सिख समुदाय बेवजह हंगामा खड़ा करता है। प्रदर्शनकारियों ने सिखों को भगाने, गुरुद्वारा ढहाने व शहर का नाम बदलकर गुलाम अली मुस्तफा रखने की धमकी दी थी।

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