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पराली का धुआं / जालंधर की पराली की आग से पाकिस्तान की आब-ओ-हवा हुई खराब, मंत्री ने किया ये ट्वीट



अलावलपुर में जलाई गई पराली। कागजों में ही चल रही है प्रशासन की जागरूकता मुहिम। - भास्कर अलावलपुर में जलाई गई पराली। कागजों में ही चल रही है प्रशासन की जागरूकता मुहिम। - भास्कर
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अलावलपुर में जलाई गई पराली। कागजों में ही चल रही है प्रशासन की जागरूकता मुहिम। - भास्करअलावलपुर में जलाई गई पराली। कागजों में ही चल रही है प्रशासन की जागरूकता मुहिम। - भास्कर

  • जिला प्रशासन ने 18 लाेगाें के खिलाफ पीपीसीबी और 18 अन्य के खिलाफ केस दर्ज करवाया
  • 257 सरपंचाें काे नाेटिस भी जारी किया, डीसी वीके शर्मा ने कहा- माना जाएगा सरपंच और एसएचओ काे जिम्मेदार

Dainik Bhaskar

Nov 07, 2019, 03:24 PM IST

जालंधर. धान की फसल उठाने के बाद पराली को आग लगाने का सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। इससे जहां राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के राज्याें की आब-ओ-हवा खराब हो चुकी है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और कैप्टन अमरिंदर सिंह में इस बात को लेकर ठनी हुई है, इसी बीच सीमा पार से भी पंजाब पर निशाने साधे जाने का क्रम शुरू हो गया है। पाकिस्तान के विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री चौ. फवाद हुसैन ने ट्वीट करके प्रदूषण के लिए जालंधर में पराली जलाए जाने को जिम्मेदार बताया है।

 

 

 

जालंधर जिले में 2 दिन में महिला समेत 48 किसानों पर केस दर्ज

पराली जलाने काे लेकर सुप्रीम काेर्ट की फटकार के बाद जालंधर जिले में बड़े स्तर पर कार्रवाई हुई है। दाे दिन में एक महिला समेत 48 लाेगाें के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। 18 लाेगाें के खिलाफ पीपीसीबी और 18 अन्य के खिलाफ जिला प्रशासन ने केस दर्ज करवाया है। पीपीसीबी ने गांव रायपुर में महिला किसान अख्तियार कौर के खिलाफ केस दर्ज कराया। धारा 188 के तहत दर्ज केस में गिरफ्तारी के बाद जमानत पर छाेड़ दिया गया। जिला प्रशासन ने 257 सरपंचाें काे नाेटिस भी जारी किया है। डीसी वीके शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यदि जिले के किसी गांव में पराली जलाई जाती है तो उसके लिए सरपंच के साथ ही इलाके के एसएचओ काे जिम्मेदार माना जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से 257 सरपंचों को नोटिस जारी किया गया है। संवेदनशील 65 गांवों में प्रशासनिक अधिकारी व पराली प्रबंधन को लेकर गठित की गई कमेटियों के सदस्य अपने सहायक अमले के साथ 24 घंटे निगरानी करेंगे, ताकि गांवों में पराली जलाने की कोई घटना न हो।

 

भास्कर का रियलिटी चेक: 150 में से 80 सरपंचों ने कहा- हमारे यहां जागरूक करने कोई नहीं आया, 70 बोले- गांव से सिर्फ वैन ही निकली: जिले में किसानों को जागरूक करने के लिए 1100 में से 954 गांवों में नोडल अधिकारी नियुक्त हैं। एसडीएम से लेकर तहसीलदार तक पराली जलाने के मामलों की निगरानी में लगे हैं और जागरूकता वैनें भी चल रही हैं। इसके बावजूद जिले के 50% गांव प्रशासन की कागजों में ही चल रही जागरूकता मुहिम से अनजान हैं। दैनिक भास्कर ने 150 गांवों का रियलिटी चेक किया तो पाया कि 80 से अधिक गांवों में कोई जागरूक करने ही नहीं गया। जबकि 70 सरपंच बोले कि उनके गांव से वैन निकली जरूर लेकिन जागरूकता संबंधी किसी को कुछ समझ नहीं आया। इसके अलावा सिर्फ 20 फीसदी गांवों में ही मीटिंगें हो सकीं। भास्कर की पहल के बाद प्रशासन भी एक्टिव हुआ और बुधवार की देर शाम तक कई गांवों के सरपंचों को प्रशासन द्वारा फोन और एसएमएस करके मीटिंगें करने की जानकारी दी गई।

 

जांच के लिए एसडीएम के नेतृत्व में पांच टीमें बनाई
पराली जलाने के मामलों की जांच के लिए एसडीएम के नेतृत्व में 5 अलग-अलग विभागों की टीमें बनाई गई हैं। इनमें खेतीबाड़ी, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, पुलिस, रेवेन्यू और पावरकाॅम शामिल हैं। जिले में कुल 2.41 लाख हेक्टेयर जमीन है। इसमें 1.70 लाख हेक्टेयर पर धान की रोपाई होती है। ऐसे में लाखों टन पराली जलती है। प्रशासन की मानें तो दरिया एरिया की तरफ पराली जलाने के अधिक केस सामने आते हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में अधिक सतर्कता बरती जा रही है।

 

 

 

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