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मैंगो डिप्लोमेसी:आम भेजकर रिश्तों में जमी खटास दूर कर रहा पाकिस्तान; चीन, अमेरिका, कनाडा ने लौटाए

इस्लामाबाद7 महीने पहले
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पाक के परममित्र देश चीन को ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ रास नहीं आई है। उसने पाकिस्तान की ओर से भेजे गए आम वापस लौटा दिए हैं। - Dainik Bhaskar
पाक के परममित्र देश चीन को ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ रास नहीं आई है। उसने पाकिस्तान की ओर से भेजे गए आम वापस लौटा दिए हैं।
  • आर्थिक तंगी से जूझ रही इमरान सरकार ने 32 देशों में भेजे हैं आम
  • आम वापस करने वालों की सूची में नेपाल, मिस्र और श्रीलंका भी शामिल

वैश्विक महामारी के दौर में जहां दुनिया कोरोना संक्रमण से परेशान है। वहीं पाकिस्तान फलों के राजा यानी आम के जरिए दुनियाभर के देशों से अपने संबंध सुधारने में लगा है।

दरअसल, आर्थिक तंगी से जूझ रही पाकिस्तान की इमरान सरकार ने नई कूटनीतिक रणनीति अपनाई है। इसके तहत उसने दुनिया के 32 देशों में चौसा आम तोहफे में भेजे हैं। लेकिन उसके परममित्र देश चीन को पाकिस्तान की ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ रास नहीं आई है। उसने पाकिस्तान की ओर से भेजे गए आम वापस लौटा दिए हैं।

खास बात यह है कि आम लौटाने वाले देशों में चीन अकेला नहीं है। अमेरिका, कनाडा, नेपाल, मिस्र और श्रीलंका ने भी पाकिस्तान की ओर से तोहफे में भेजे गए आमों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। हालांकि, इसके पीछे कोरोना को रोकने के लिए लागू क्वारेंटाइन नियम का हवाला दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नई कूटनीति के तहत पाकिस्तान दुनियाभर के देशों को तोहफे में चौसा आम भेज रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पाक द्वारा भेजे जाने वाले आमों की किस्मों में पहले ‘अनवर रत्तोल’ और ‘सिंधारी’ किस्में भी खेप का हिस्सा थीं। लेकिन बाद में दोनों को हटा दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमण के बाद किस्तापान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ अपनाकर इन देशों से अपना संबंध मजबूत करना चाहता है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति के लिए भी भेजे थे, नहीं मिली प्रतिक्रिया

ये आम पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉ. आरिफ अल्वी की ओर से 32 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के लिए भेजे गए थे। पाक विदेश मंत्रालय की सूची में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भी नाम था। लेकिन फ्रांस ने इस रणनीति पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

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