पाक / आर्थिक प्रतिबंधों से बचने के लिए आतंकियों के खिलाफ नकली और कमजोर मुकदमे दर्ज करवा रही सरकार



जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा सरगना हाफिज सईद। (फाइल) जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा सरगना हाफिज सईद। (फाइल)
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जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा सरगना हाफिज सईद। (फाइल)जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा सरगना हाफिज सईद। (फाइल)

  • फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाक को टेरर फंडिंग पर रोक लगाने के लिए अक्टूबर तक का वक्त दिया
  • सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों के खिलाफ दायर मामले इतने कमजोर हैं कि उन पर कोई कार्रवाई की संभावना नहीं
  • एफएटीएफ ने पाक को ग्रे लिस्ट में रखा, आतंकियों पर कार्रवाई न करने के लिए ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है

Dainik Bhaskar

Aug 18, 2019, 12:38 PM IST

लाहौर. टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर लगाम लगाने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को पिछले साल अपनी ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा था। सितंबर में एफएटीएफ पाक को आतंकवाद पर ठीक ढंग से कार्रवाई न करने के लिए ब्लैकलिस्ट कर सकता है। इसको लेकर संस्था ने पाक को जनवरी में चेतावनी भी दी थी। हालांकि, इमरान सरकार ने अब इससे निपटने की नई तरकीब निकाल ली है। उसने आतंकियों के खिलाफ नकली और कमजोर मुकदमे दर्ज करवाने शुरू कर दिए हैं। 

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाक ऐसा कर एफएटीएफ को दिखाना चाहता है कि वह आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। जबकि कमजोर मामले होने की वजह से आतंकियों के छूटने के आसार ज्यादा हैं। न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, 1 जुलाई को लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकी के खिलाफ जमीन विवाद को लेकर मामला दर्ज किया गया। लेकिन केस इतना कमजोर है कि कोर्ट में आतंकी पर कोई कार्रवाई होने की संभावना नहीं है। 

 

एफआईआर में आतंकियों के नाम शामिल नहीं

पाक इन मामलों को इस तरह पेश कर रहा है जैसे वह आतंकियों की संपत्ति जब्त कर उनके लेन-देन पर रोक लगा रहा हो। लेकिन अभी तक आतंकी संगठन के सरगनाओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एफआईआर में लश्कर प्रमुख हाफिज सईद या आतंकी अब्दुल गफ्फार, हाफिज मसूद, आमिर हमजा और मलिक जफर इकबाल के नाम का जिक्र भी नहीं है, जबकि यह सब भी उस जमीन के मालिकों में शामिल थे। एफआईआर में आतंकी संगठन जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत का भी कोई जिक्र नहीं है। बल्कि एक जगह इसमें दावत-वल-इरशाद का जिक्र किया गया है जो कि जमात-उद-दावा का पुराना नाम है।

 

एफएटीएफ को भटकाना चाहता है पाक

कानूनविदों के मुताबिक, एफआईआर में जमीन विवाद से जुड़े लोगों के नाम नहीं दिया गया है और न ही उनके अपराध की टाइमलाइन दी गई है। इसके अलावा उनकी आतंकी गतिविधियों को बताने में भी काफी साधारण शब्द इस्तेमाल किए गए। इसके अलावा आतंकी संगठन की गतिविधियों पर जानकारी भी नहीं दी गई है, ताकि एफएटीएफ की आंखों में धूल झोंकी जा सके। 

 

पाक को पहले ही चेतावनी दे चुका है एफएटीएफ

पाक को ग्रे लिस्ट में रखने-हटाने या ब्लैकलिस्ट में डालने के मुद्दे पर एफएटीएफ अक्टूबर के पहले हफ्ते में बैठक कर सकता है। इससे पहले एफएटीएफ ने जून में हुई बैठक के बाद पाक को चेतावनी देते हुए कहा था कि वह आतंकियों को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। संस्था ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा- अगर वह अक्टूबर 2019 तक एक्शन प्लान लागू नहीं कर सका तो उसे नतीजे भुगतना होंगे। इस पर पाक ने कहा- देश ग्रे लिस्ट से बाहर आने के लिए न सिर्फ संस्था के हर निर्देश पर अमल करने के लिए तैयार है बल्कि अपनी ओर से एक्शन प्लान लागू करने के प्रयास भी कर रहा है।

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