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पाकिस्तान / मौलाना ने कहा- फौज ने हजारों लोगों को अगवा किया; इस मुल्क में सरकारी दहशतगर्दी



मौलाना फजल-उर-रहमान ने पहली बार फौज और आईएसआई पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। (फाइल) मौलाना फजल-उर-रहमान ने पहली बार फौज और आईएसआई पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। (फाइल)
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मौलाना फजल-उर-रहमान ने पहली बार फौज और आईएसआई पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। (फाइल)मौलाना फजल-उर-रहमान ने पहली बार फौज और आईएसआई पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। (फाइल)

आजादी मार्च के दौरान मौलाना ने सेना-आईएसआई का नाम लिए बगैर हजारों लापता लोगों का जिक्र किया

उन्होंने कहा- कई साल से ये लोग लापता हैं, इन्हें पूछताछ के नाम पर उठाया गया, इसका हिसाब कौन देगा

मौलाना 4 दिन से इस्लामाबाद में हैं, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच गतिरोध जारी है

Dainik Bhaskar

Nov 06, 2019, 01:04 PM IST

इस्लामाबाद. आजादी मार्च में सरकार से इस्तीफे की मांग कर रहे मौलाना फजल-उर-रहमान ने पहली बार फौज और आईएसआई पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। मंगलवार रात समर्थकों को संबोधित करते हुए मौलाना ने कहा- दहशतगर्दी के नाम पर कितने लोगों को उठाया गया। किसी को 12 तो किसी 15 साल हो गए। ये लोग अब भी लापता हैं। क्या किसी महकमे को ये हक है कि वो हजारों लोगों को उठाए और उनका कभी पता न चले। मौलाना ने कहा- सच्चाई ये है कि पाकिस्तान में सरकारी दहशतगर्दी है। बता दें कि मानवाधिकार संगठन भी पाकिस्तानी फौज पर यही इल्जाम लगाते हैं। कई आंदोलन भी हुए। लेकिन, सेना ने कभी जवाब नहीं दिया।

 

सिंध और बलूचिस्तान में सबसे ज्यादा मामले
रहमान के संगठन जमीयत-उलेमा का आजादी मार्च 27 अक्टूबर को शुरू हुआ था। उनके समर्थक चार दिन से इस्लामाबाद में हैं। मंगलवार रात मौलाना ने पहली बार सेना का नाम लिए बगैर उसकी जवाबदेही तय करने की मांग की। पाकिस्तान में फौज और आईएसआई द्वारा गैरकानूनी तौर पर लोगों को उठा लेना आम बात है। बलूचिस्तान और सिंध में तो यह बहुत बड़ा मुद्दा है। मौलाना ने इसी का जिक्र किया। पाकिस्तान के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2019 तक 6227 लोग लापता थे।

अंजाम वक्त बताएगा
मौलाना ने समर्थकों को संबोधन में कहा, “कितने लोग हैं। जो दहशतगर्दी के नाम पर उठाए गए हैं। ये आज भी लापता हैं। क्या किसी महकमे (इशारा सेना और आईएसआई की तरफ) को ये हक है कि वो सिर्फ शक की बुनियाद पर किसी भी पाकिस्तान को उठा लें। ये लोग 12 या 15 साल से लापता हैं। किसी को नहीं मालूम कि ये कहां हैं? उसकी बूढ़ी मां और बच्चे लौटने की राह देख रहे हैं। उनकी आंखों के पर्दे टूट चुके हैं। लेकिन, इन जालिमों को तरस नहीं आता। वो इन परिवारों को ये नहीं बताते कि ये बच्चे उनकी हिरासत में हैं। अगर वो दोषी हैं तो अदालतों में पेश क्यों नहीं करते। लेकिन, यहां तो अदालतें और नैब सिर्फ नेताओं के लिए हैं। सच्चाई ये है कि यहां रियासती (फौज और खुफिया एजेंसी) दहशतगर्दी है। इनका क्या अंजाम होगा? ये वक्त बताएगा।” 

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