सियासत से दूर रहो:PAK फौज और ISI का अफसरों को फरमान- नेताओं से मिलना बंद करें, वरना नतीजे भुगतने होंगे

इस्लामाबाद5 महीने पहले

पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा और ISI चीफ लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम ने अपने अफसरों से कहा है कि वो हर हाल में सियासत और सियासतदानों से दूर रहें। इस आदेश के मुताबिक, अफसरों से कहा गया है कि वो नेताओं से बातचीत भी न करें तो बेहतर है। इस आदेश को काफी दिन तक सीक्रेसी एक्ट के तहत गुप्त रखा गया, लेकिन अब यह लोगों के सामने आ गया है।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी के नेता सरकार गिरने के बाद से ही फौज और खुफिया एजेंसी ISI को निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर जनरल बाजवा और नदीम अंजुम के खिलाफ ट्रेंड्स चलाए जा रहे हैं।

पाकिस्तानी फौज के बारे में मशहूर है कि वो मुल्क में जिसे चाहे सत्ता तक पहुंचा सकती है। अब जनरल बाजवा सियासी शतरंज से सेना को दूर रखना चाहते हैं।
पाकिस्तानी फौज के बारे में मशहूर है कि वो मुल्क में जिसे चाहे सत्ता तक पहुंचा सकती है। अब जनरल बाजवा सियासी शतरंज से सेना को दूर रखना चाहते हैं।

बाजवा की पैनी नजर
पाकिस्तान की वेबसाइट ‘द न्यूज’ के मुताबिक, जनरल बाजवा इमरान खान के दौर से ही इस पक्ष में थे कि फौज की इमेज को सुधारा जाए। पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में यह माना जाता है कि मुल्क में वही पार्टी सरकार बना सकती है जो फौज के इशारों पर चलने को तैयार हो। इमरान की सरकार गिराने के बाद फौज के खिलाफ जबरदस्त माहौल बनाया गया तो जनरल बाजवा भी अपने विभाग की इमेज सुधारने पर मजबूर हो गए।

पिछले कई महीने से बाजवा मुल्क की सियासत और इसमें फौज के रोल पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर फौज के खिलाफ की जाने वाली बयानबाजी का भी नोटिस लिया। अब इस बारे में एक्शन लिया गया है।

इमरान के साथ जनरल बाजवा (दाएं) और लेफ्टिनेंट फैज हमीद। फैज हमीद के ट्रांसफर के मुद्दे पर ही इमरान और बाजवा के बीच टकराव हुआ था। (फाइल)
इमरान के साथ जनरल बाजवा (दाएं) और लेफ्टिनेंट फैज हमीद। फैज हमीद के ट्रांसफर के मुद्दे पर ही इमरान और बाजवा के बीच टकराव हुआ था। (फाइल)

क्या हैं आदेश
रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल बाजवा और ISI चीफ लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम के बीच पिछले दिनों एक अहम मीटिंग हुई। पाकिस्तान के सीनियर जर्नलिस्ट अंसार अब्बासी के मुताबिक, इसी मीटिंग में फैसला हुआ कि तमाम आर्मी कमांडर्स और दूसरे आला अफसरों को यह दो टूक बता दिया जाए कि वो सियासत और सियासतदानों से बिल्कुल दूर रहें। अफसरों से ये भी कहा गया है कि वो नेताओं से मिलने और बातचीत करने से परहेज करें।

मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि अगले साल आम चुनाव होने हैं और इसके पहले कई सीटों पर उपचुनाव यानी बाय इलेक्शन हैं। फौज के न्यूट्रल होने की बात इमरान सरकार के गिरने के पहले ही शुरू हो चुकी थी।

इमरान खान ने फौज के न्यूट्रल होने पर तंज कसते हुए कहा था- कोई इंसान तो न्यूट्रल नहीं हो सकता, ऐसी उम्मीद तो जानवर से ही की जा सकती है। (फाइल)
इमरान खान ने फौज के न्यूट्रल होने पर तंज कसते हुए कहा था- कोई इंसान तो न्यूट्रल नहीं हो सकता, ऐसी उम्मीद तो जानवर से ही की जा सकती है। (फाइल)

अब ये मामला क्यों उठा
इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की नेता यास्मिन राशिद ने रविवार को आरोप लगाया था कि लाहौर में पोस्टेड एक सेक्टर कमांडर उपचुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इमरान सरकार में विदेश मंत्री रहे शाह महमूद कुरैशी ने भी इन्डायरेक्टली इसी तरह के आरोप लगाए। खुद खान फौज के न्यूट्रल होने की तुलना जानवरों से कर चुके हैं।

इमरान ने पिछले दिनों कहा था कि उनके कई कैंडिडेट्स को असरदार लोगों के टेलिफोन कॉल्स आ रहे हैं। इसके बाद फौज की तरफ से एक बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया- हमारा सियासत और सियासतदानों से कोई लेनादेना नहीं है। हमें इस तरह के मामलात में न घसीटा जाए।

पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के बारे में कहा जाता है कि वो भी फौज की सौदेबाजी के चलते ही सत्ता में आए हैं। (फाइल)
पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के बारे में कहा जाता है कि वो भी फौज की सौदेबाजी के चलते ही सत्ता में आए हैं। (फाइल)

सबूत तो फौज के खिलाफ
पाकिस्तान बनने के बाद अब तक आधा वक्त ऐसा गुजरा, जबकि यहां सैन्य शासन रहा। जनरल अयूब के दौर-ए-हुकूमत से परवेज मुशर्रफ तक का दौर फौज की ताकत के बेजा इस्तेमाल के सबूत हैं। इमरान के बारे में तो साफ तौर पर कहा जाता है कि उन्हें प्रयोग के तौर पर सत्ता में लाया गया था। ISI के पूर्व चीफ जनरल फैज हमीद के ट्रांसफर के मसले पर उनकी जनरल बाजवा से ठन गई। बतौर अंजाम इमरान को सत्ता गंवानी पड़ी। इसके बाद से ही खान फौज को लेकर बेहद हमलावर हैं।