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पाकिस्तान की दुनिया को धमकी:NSA बोले- तालिबान को फौरन मान्यता नहीं दी गई तो दोहराया जा सकता है 9/11, बाद में पलटे

इस्लामाबाद/लंदन9 महीने पहले

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तान बेहद खुश नजर आ रहा है। आलम ये है कि उसके नेता आए-दिन ऊलजुलूल बयानबाजी कर रहे हैं। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) मोईद यूसुफ ने अब दुनिया को खुली धमकी दी है। एक इंटरव्यू में यूसुफ ने कहा- पाकिस्तान चाहता है कि दुनिया के देश जल्द से जल्द अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार को मान्यता दें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हमारे सामने एक और 9/11 का खतरा है। जैसे ही इस बयान से बवाल मचा तो वो पलट गए, सफाई देने लगे।

अमेरिका में 2001 में 11 सितंबर को आतंकियों ने एयरक्राफ्ट हाईजैक करके वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया था। इसका मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन था। हमले में 3 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। 10 साल बाद लादेन को अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद में कमांडो ऑपरेशन में मार गिराया था। इन हमलों के बाद ही अमेरिका ने अफगानिस्तान में फौज भेजी थी, जिसके लौटने का 31 अगस्त को आखिरी दिन है।

अमेरिका में 2001 में 11 सितंबर को आतंकियों ने एयरक्राफ्ट हाईजैक करके वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया था। इसका मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन था। हमले में 3 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे।
अमेरिका में 2001 में 11 सितंबर को आतंकियों ने एयरक्राफ्ट हाईजैक करके वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया था। इसका मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन था। हमले में 3 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे।

पश्चिमी देशों को पाकिस्तान की वॉर्निंग
मोईद ने शनिवार को ब्रिटिश अखबार ‘संडे टाइम्स’ की जर्नलिस्ट क्रिस्टीना लैम्ब को इंटरव्यू दिया। इसी दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- अगर दुनिया और खासतौर पर पश्चिमी देश अफगानिस्तान में तालिबान की नई सरकार को फौरन मान्यता नहीं देते हैं तो इससे एक और 9/11 का खतरा है।

लैम्ब ब्रिटेन ही नहीं, बल्कि दुनिया की जानी-मानी पत्रकारों में से एक मानी जाती हैं। उन्हें कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। फिलहाल, वे संडे टाइम्स में इंटरनेशनल अफेयर्स की इंचार्ज और चीफ कॉरस्पॉन्डेंट हैं।

मई 2011 में अमेरिकी सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में लादेन को मारा था। लादेन अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन था जिस तक पहुंचने में अमेरिका को 6 साल से भी ज्यादा समय लगा।
मई 2011 में अमेरिकी सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में लादेन को मारा था। लादेन अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन था जिस तक पहुंचने में अमेरिका को 6 साल से भी ज्यादा समय लगा।

विवाद बढ़ा तो बचाव में आया दूतावास
जैसे ही इस बयान ने तूल पकड़ा, वैसे ही यूसुफ बचाव में आ गए। उनके ऑफिस की तरफ से एक बयान के जरिए सफाई देने की कोशिश की गई। इसमें कहा गया- मोईद के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने सिर्फ यह कहा था कि तालिबान के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर 1990 के दशक जैसे हालात फिर पैदा हो सकते हैं।

मामला इतना संवेदनशील हो गया कि लंदन स्थित पाकिस्तानी दूतावास को भी इस मामले में दखल देना पड़ा। दूतावास ने एक औपचारिक पत्र भेजकर संडे टाइम्स से इंटरव्यू के कथित विवादित हिस्से को सही करने या उसे हटाने को कहा।

अखबार ने बयान हटाने से इनकार किया
बहरहाल, पाकिस्तान की इस कवायद का संडे टाइम्स पर कोई असर नहीं हुआ। उसने साफ कर दिया कि जो इंटरव्यू पब्लिश किया गया है, वो बिल्कुल सही है और उससे किसी तरह की छेड़खानी नहीं की गई है। खुद क्रिस्टीना लैम्ब ने कहा- यूसुफ ने जो कुछ कहा, वो रिकॉर्ड पर है। उसके टैप मौजूद हैं।

यूसुफ का पूरा बयान क्या था
यूसुफ के बयान को दुनिया के कई मीडिया हाउस ने चलाया। उन्होंने कहा था- मेरे शब्द नोट कर लीजिए। अगर 1990 के दशक की गलतियां दोहराईं गईं, अफगानिस्तान को तन्हा छोड़ा गया तो फिर नतीजा भी वही होगा। एक और 9/11 का खतरा होगा। अफगान आतंकी संगठन दुनिया के लिए खतरा बन जाएंगे।

संडे टाइम्स ने अपनी हेडलाइन में लिखा- पाकिस्तान के एनएसए की धमकी: अगर तालिबानी सरकार को मान्यता नहीं दी गई तो एक 9/11 हमले का खतरा। खास बात यह है कि कुछ दिनों पहले यूसुफ ने ‘स्काय न्यूज’ के एक इंटरव्यू में भी यही बात कही थी।

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