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पाक NSA की डिमांड:मोईद यूसुफ बोले- पाकिस्तान को बलि का बकरा न बनाए अमेरिका, हमें बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए

इस्लामाबाद10 महीने पहले
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अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तान में खुशी का माहौल है। यहां की सरकार, फौज और खुफिया एजेंसिया इसे अपनी जीत की तौर पर देख रही हैं। नए हालात में पाकिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) मोईद यूसुफ का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने अमेरिका को नसीहत देने की कोशिश की है। यूसुफ ने कहा- "अच्छा होगा अफगानिस्तान में अमेरिका हमें अपने पार्टनर की तरह ट्रीट करे। पाकिस्तान को बलि का बकरा न बनाया जाए।"

पाकिस्तान को खतरा ज्यादा
यूसुफ ने अमेरिकी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ को एक टेलिफोनिक इंटरव्यू दिया है। इसमें उन्होंने अमेरिका से कहा है कि उसे पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्ते रखने की जरूरत है और यही दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा- "अफगानिस्तान में अस्थिरता और हिंसा पाकिस्तान के लिए खतरनाक हो सकती है। हमारे यहां आतंकवाद बढ़ सकता है, रिफ्यूजी प्रॉब्लम बढ़ सकती है। हमारी इकॉनॉमी पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रही है। इन सबकी वजह से यह और खराब हो सकती है।"

पाकिस्तान दया का मोहताज नहीं
एक सवाल के जवाब में यूसुफ ने कहा- "क्या इन हालात में अमेरिका को पाकिस्तान के साथ नहीं होना चाहिए? पाकिस्तान दया का मोहताज नहीं है। मैं तो अमेरिका के भले की बात कर रहा हूं। 9/11 के हमलों से हमारा कोई लेनादेना नहीं था। इसके बावजूद हमने आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ी और इसका शिकार बने। पुरानी बातों को भूलकर आगे देखना चाहिए। अगर हम पार्टनर नहीं बनेंगे तो इस क्षेत्र में स्थिरता नहीं आएगी।"

हम कसूरवार नहीं
यूसुफ मूल रूप से अमेरिकी नागरिक हैं। वॉशिंगटन में रहते हैं और उनके पास दोहरी नागरिकता है। इस पर पाकिस्तान में कई बार सवाल उठते रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- "अमेरिका के समर्थन वाली अशरफ गनी सरकार अपनी गलतियों से गिरी। इसके लिए हमें बलि का बकरा क्यों बनाया जा रहा है? हमने तो अफगान आर्मी से सरेंडर के लिए नहीं कहा। गनी को पाकिस्तान ने तो काबुल से नहीं भगाया। एक हफ्ते में अफगान सरकार क्यों गिरी? कोई तो झूठ बोल रहा है या हकीकत नहीं सुनना चाहता।"

तालिबान का साथ दे अमेरिका
यूसुफ ने आगे कहा- "अमेरिका को चाहिए कि वो अफगानिस्तान की नई तालिबान सरकार के साथ मिलकर काम करे। उसे परेशान न करे। तालिबान को अब पाकिस्तान की जरूरत नहीं है। अगर अफगानिस्तान को तन्हा छोड़ा गया तो वो फिर आतंकियों की पनाहगाह बन जाएगा। बचकानी गलतियां अब नहीं होनी चाहिए।"

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