तालिबान को फिर पाकिस्तान का साथ:इस्लामिक देशों की समिट में अफगान तालिबान को बुलाया, मुस्लिम देशों से मान्यता दिलाने की कोशिश

इस्लामाबादएक महीने पहले

दुनिया में अलग-थलग पड़ी अफगानिस्तान की तालिबान हुकूमत को फिर पाकिस्तान का साथ मिला है। इस्लामाबाद में 19 दिसंबर को ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द इस्लामिक कंट्रीज (OIC) की समिट होने वाली है। पाकिस्तान ने अफगान तालिबान को इसमें शामिल होने का न्योता दिया है।

अब देखना ये है कि बाकी मुस्लिम देश इस पर क्या रिएक्शन देते हैं। इसकी वजह यह है कि तालिबान हुकूमत को अब तक पाकिस्तान समेत दुनिया के किसी देश ने मान्यता नहीं दी है। मुमकिन है कि कुछ देश इस समिट से ही दूरी बना लें, या फिर पाकिस्तान तालिबान को दिया न्योता वापस ले ले।

अफगानिस्तान की इकोनॉमी की फिक्र
अफगानिस्तान की फॉरेन मिनिस्ट्री के मुताबिक, अफगान इकोनॉमी, बैंकिंग सिस्टम और उसके दूसरे देशों से रिश्ते इस समिट का बड़ा मुद्दा हो सकते हैं। हम चाहते हैं कि समिट में इन मुद्दों पर सभी देश और दूसरे संगठन विचार करें। इसीलिए पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को इस मीटिंग में शामिल होने का न्योता भेजा है।

जानकारी के मुताबिक, OIC में शामिल मुस्लिम देशों के अलावा अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन और वर्ल्ड बैंक को भी समिट में बुलाया गया है। कुछ मानवाधिकार संगठन भी इसमें शामिल हो सकते हैं। हालांकि अब तक किसी देश ने न्योते पर कुछ नहीं कहा है।

अफगान तालिबान के नेता मुल्ला बरादर (बीच में काली पगड़ी में)। अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता में आए 100 दिन से ज्यादा हो गए हैं।
अफगान तालिबान के नेता मुल्ला बरादर (बीच में काली पगड़ी में)। अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता में आए 100 दिन से ज्यादा हो गए हैं।

अफगान लोगों को ही दिक्कत
अफगानिस्तान के संगठन नेशनल सॉलिडैरिटी मूवमेंट के अध्यक्ष सैयद इशाक गिलानी ने तालिबान को न्योते पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई मुस्लिम देश अफगानिस्तान की तालिबान हुकूमत को मान्यता देने को तैयार नहीं हैं। ज्यादातर देशों के अफगानिस्तान से अच्छे रिश्ते भी नहीं हैं।

तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के साथ ही अफगानिस्तान की हुकूमत पर कब्जा कर लिया था। मौलाना हसन अखुंद इसके नेता हैं। वह 2001 से ही यूनाइटेड नेशंस की बैन लिस्ट में हैं।

दिक्कत में आ सकता है पाकिस्तान
अफगानिस्तान की तालिबान हुकूमत को सत्ता में आए 100 दिन से ज्यादा हो गए हैं। अब तक किसी देश ने उसकी सरकार को मान्यता नहीं दी है। ज्यादातर देश चाहते हैं कि तालिबान हुकूमत महिला और मानवाधिकार पर अपने वादे पूरे करे और इसके सबूत दे। तालिबान अब तक ऐसा नहीं कर सका है।

पाकिस्तान लगातार दुनिया से गुहार लगा रहा है कि तालिबान हुकूमत को मान्यता दी जाए। ज्यादातर देश उसकी कोशिशों को शक की नजर से देख रहे हैं। OIC में अफगान तालिबान को बुलाकर पाकिस्तान एक बार फिर दुनिया की आंखों की किरकिरी बन सकता है।

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