UNGA में पाक की बौखलाहट:इमरान खान बोले- कश्मीर में भारत ने जबरन कब्जा किया; भारत का जवाब- UN के मंच से झूठ फैला रहा पाकिस्तान

इस्लामाबाद8 महीने पहले

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शनिवार तड़के संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। जो तय माना जा रहा था, वही हुआ। इमरान ने कश्मीर और अफगानिस्तान पर ही भाषण का फोकस रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीर में एकतरफा कदम उठाकर भारत ने जबरिया कब्जा किया है। इमरान के इस बयान का भारत ने करारा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय डिप्लोमेट स्नेहा दुबे ने कहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से भारत के अभिन्न हिस्से हैं और रहेंगे। इनमें पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से भी शामिल हैं। पाकिस्तान को इन्हें तुरंत छोड़ देना चाहिए।

दुबे ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश जानते हैं कि पाकिस्तान का इतिहास आतंकियों को पालने और उनकी मदद करने का रहा है, यह पाक की नीति में शामिल है। ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल भारत के खिलाफ झूठ फैलाने और दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए किया है।

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इमरान का इस्लामोफोबिया और कश्मीर राग
संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए इमरान खान ने कहा कि अमेरिका में 9/11 हमलों के बाद दुनियाभर के दक्षिण पंथियों (राइट विंग) ने मुसलमानों पर हमले शुरू कर दिए। भारत में इसका सबसे ज्यादा असर है। वहां RSS और भाजपा मुस्लिमों को निशाना बना रहे हैं। मुस्लिमों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। कश्मीर में एकतरफा कदम उठाकर भारत ने जबरिया कब्जा किया है।

मीडिया और इंटरनेट पर पाबंदी है। डेमोग्राफिक स्ट्रक्चर चेंज किया जा रहा है। मेजॉरिटी को माइनोरिटी में बदला जा रहा है। ये दुर्भाग्य है कि दुनिया सिलेक्टिव रिएक्शन देती है। यह दोहरे मापदंड हैं। सैयद अली शाह गिलानी के परिजनों के साथ अन्याय हुआ। मैं इस असेंबली से मांग करता हूं कि गिलानी के परिवार को उनका अंतिम संस्कार इस्लामी तरीके से करने की मंजूरी दी जाए।

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इमरान खान ने UNGA में कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का भी जिक्र किया।
इमरान खान ने UNGA में कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का भी जिक्र किया।

भारत से बातचीत के लिए तैयार
इमरान ने आगे कहा- हम भारत से अमन चाहते हैं, लेकिन भाजपा वहां दमन कर रही है। अब गेंद भारत के पाले में है। भारत को कश्मीर में उठाए गए कदमों को वापस लेना होगा। कश्मीर में बर्बरता बंद और डेमोग्राफिक चेंज बंद करना होगा। भारत सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। इससे इस क्षेत्र का सैन्य संतुलन बिगड़ रहा है। दोनों देशों के पास न्यूक्लियर हथियार हैं।

अफगानिस्तान पर भी बोले इमरान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान के हालात पर कहा- वहां बिगड़े हालात के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कीमत हमने चुकाई है। 80 हजार लोग मारे गए, 120 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। हमने अमेरिका के लिए जंग लड़ी। 1983 में प्रेसिडेंट रोनाल्ड रीगन ने मुजाहिदीन को हीरो बताया था। जब सोवियत सेनाएं वहां से चली गईं तो अमेरिका ने अफगानिस्तान को अकेला छोड़ दिया।

अमेरिका पर बरसते हुए इमरान ने कहा- हम पर प्रतिबंध लगाए गए। बाद में यही मुजाहिदीन, जिन्हें हमने ट्रेंड किया था, वो हमारे खिलाफ ही खड़े हो गए। हम पर हमले करने लगे। हमसे कहा जाता है कि आप तालिबान की मदद करते हैं। आज भी 30 लाख पश्तून पाकिस्तान में रहते हैं। उनकी तालिबान से सहानूभूति है। अमेरिका ने पाकिस्तान में 480 ड्रोन हमले किए। इससे बहुत नुकसान हुआ। जो लोग मारे गए वो अमेरिका के बजाय पाकिस्तान से बदला लेते हैं। हमें अपनी राजधानी को किले में तब्दील करना पड़ा।

इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान में 30 लाख पश्तून रहते हैं, उनकी तालिबान से हमदर्दी है।
इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान में 30 लाख पश्तून रहते हैं, उनकी तालिबान से हमदर्दी है।

तालिबान को मान्यता देने का राग
खान ने आगे कहा- हमारे पास मजबूत सेना और दुनिया की बेहतरीन इंटेलिजेंस एजेंसी है। पाकिस्तान के बारे में दुनिया ने दो लफ्ज तारीफ के नहीं कहे, बल्कि हमें हर चीज का कसूरवार ठहरा दिया गया। अफगानिस्तान का सैन्य समाधान नहीं है। ये मैं बाइडेन के सीनेटर रहते वक्त उन्हें बता चुका हूं। आज ये सोचने की जरूरत है कि तीन लाख अफगान आर्मी क्यों हारी? तालिबान क्यों आए। अब क्या किया जाए। दो रास्ते हैं। अगर हमने अफगानिस्तान को अकेला छोड़ा तो अगले साल तक आधे से ज्यादा अफगान गरीबी रेखा के नीचे होंगे। अगर ऐसा हुआ तो अफगानिस्तान फिर आतंकवाद की पनाहगाह बन जाएगा।

ये वक्त है जब तालिबान हुकूमत को दुनिया स्वीकार करे और उसे मान्यता दे। तालिबान के वादों पर भरोसा करें। उन्होंने रिफॉर्म का वादा किया है। अगर ऐसा हुआ तो सबकी जीत होगी। 20 साल में जो हुआ उससे क्या हासिल हुआ? अफगानिस्तान को मदद की जरूरत है। अब इसमें देर की गई तो यह भारी पड़ सकती है।

वॉशिंगटन क्यों नहीं आए इमरान?
जो बाइडेन को अमेरिकी राष्ट्रपति बने करीब 9 महीने हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने दुनिया के लगभग हर राष्ट्राध्यक्ष से बातचीत की है। हैती और युगांडा जैसे गरीब और छोटे देशों के राष्ट्राध्यक्ष तो उनसे मिल भी चुके हैं, लेकिन इमरान से बाइडेन न तो मिले और न ही फोन पर बातचीत की। इमरान को इस वजह से घर और बाहर जगहंसाई का सामना करना पड़ रहा है। इस पर अकसर उनके मीम्स भी बनते हैं।

इस बार रिकॉर्डेड स्पीच
इमरान 2019 में पहली बार प्रधानमंत्री के तौर पर अमेरिका गए थे। तब उन्होंने UN में भाषण दिया था। इस दौरान कश्मीर का जिक्र किया था। इस बार इमरान अमेरिका नहीं गए, बल्कि उनका रिकॉर्डेड भाषण हुआ। माना जा रहा है कि अमेरिका और पाकिस्तान के तनावपूर्ण रिश्तों को देखते हुए इमरान अमेरिका और UN नहीं गए, क्योंकि बाइडेन ने मोदी की मेजबानी तो की, लेकिन इमरान से मिलना तो दूर 9 महीने में एक बार फोन तक नहीं किया।

2019 में क्या हुआ था
इमरान ने संयुक्त राष्ट्र में भाषण के दौरान नियमों का मजाक बना दिया था। हर राष्ट्राध्यक्ष के भाषण के लिए 15 मिनट तय थे। नरेंद्र मोदी ने इसी अवधि में भाषण पूरा किया। इमरान ने बोलना शुरू किया तो 50 मिनट नहीं रुके। इस दौरान डायस पर लगा रेड बजर ब्लिंक करता रहा और इमरान उसे अनदेखा करते रहे।

नियमानुसार अगर किसी राष्ट्राध्यक्ष को कुछ मिनट ज्यादा चाहिए होते हैं तो उसे सभापति से इसकी अनुमति लेनी होती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने तो इसकी भी जहमत नहीं उठाई।

डायस पर दो बटन
डायस पर दो बजर थे। पहला ग्रीन- जो शुरुआत में ब्लिंक होता है तो नेता बोलना शुरू करता है। दूसरा रेड- इसका अर्थ है कि आपका वक्त समाप्त हुआ। भाषण खत्म करें। लेकिन इमरान 50 मिनट तक बोलते रहे। 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने 35 मिनट भाषण दिया था। इसके लिए पहले ही मंजूरी ले ली गई थी। 2019 में वो सिर्फ 15 मिनट बोले। एक और खास बात। इमरान की सुई भारत, कश्मीर और भाजपा-आरएसएस पर अटकी रही थी। दूसरी तरफ, भारतीय प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान का जिक्र तक नहीं किया।

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