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इमरान की बड़ी फजीहत:विजिट के एक महीने बाद भी सऊदी अरब ने कर्ज नहीं दिया, मंत्री बोले- शायद इस हफ्ते मिल जाए पैसा

इस्लामाबाद2 महीने पहले

दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान का सऊदी अरब ने एक तरह से मजाक बना दिया है। प्रधानमंत्री इमरान खान की सऊदी अरब यात्रा को एक महीने से ज्यादा गुजरा, अब तक वादे के मुताबिक पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर कर्ज (कैश रिजर्व) और 1.2 अरब डॉलर का उधारी पर तेल नहीं मिला। अब इमरान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी सोशल मीडिया पर उम्मीद जता रहे हैं कि प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान शायद इस हफ्ते पाकिस्तान को कैश रिजर्व मुहैया करा दें। वैसे रोचक यह भी है कि पाकिस्तान सरकार को इस कैश रिजर्व पर 3.2% की दर से सालाना ब्याज भी देना होगा।

कुछ तो गड़बड़ है
फौज और सरकार के डर से पाकिस्तान का मेन मीडिया इस मसले पर खुलकर कुछ नहीं बता रहा, लेकिन यूट्यूब पर मौजूद सीनियर जर्नलिस्ट बता रहे हैं कि इस डील में सबकुछ ठीक नहीं है। इसे कुछ पॉइंट्स में समझने की कोशिश करते हैं।

  • इमरान 23 अक्टूबर को सऊदी अरब गए थे और 26 को दोपहर लौट आए।
  • हैरानी की बात है कि इन तीन दिनों में किसी डील पर दोनों देशों की तरफ से कोई बयान नहीं आया।
  • उस दौरान पाकिस्तान का सरकार समर्थक मीडिया कहने लगा- ये तो धार्मिक यात्रा है।
  • इमरान के मुल्क लौटने के 6 दिन बाद सऊदी अरब ने यह ऐलान किया कि वो पाकिस्तान को कुल पांच अरब डॉलर का सशर्त कर्ज दे रहा है।
  • सीनियर जर्नलिस्ट नजम सेठी ने कहा- सऊदी प्रिंस को इमरान से नहीं, आर्मी चीफ से मतलब है। जब तक बाजवा ने कर्ज को हरी झंडी नहीं दिखाई, तब तक इसका ऐलान नहीं किया गया।
  • आमतौर पर सऊदी सरकार ऐलान के तीन से पांच दिन के भीतर चेक जारी कर देती है, इस बार एक महीने से ज्यादा हो चुका है। चेक नहीं मिला।
तीन साल पहले सऊदी प्रिंस सलमान जब पाकिस्तान आए थे तो इमरान ने उनके लिए कार ड्राइव की थी। बाद में सऊदी ने अपना कर्ज चुकाने को कहा था। (फाइल)
तीन साल पहले सऊदी प्रिंस सलमान जब पाकिस्तान आए थे तो इमरान ने उनके लिए कार ड्राइव की थी। बाद में सऊदी ने अपना कर्ज चुकाने को कहा था। (फाइल)

अब देरी हुई तो बड़ी मुश्किल
अगर सऊदी अरब सरकार इस हफ्ते तक पाकिस्तान को कैश रिजर्व नहीं देती तो इमरान सरकार के सामने बहुत बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। इसकी वजह यह है कि IMF और पाकिस्तान सरकार के बीच अब तक डील फाइनल नहीं हुई है। मामला कुछ हद तक काबू में है, लेकिन फाइनल ये तभी हो सकेगा जब IMF का एग्जीक्यूटिव बोर्ड समझौते को हरी झंडी दे देगा। बोर्ड मीटिंग की तारीख अभी तय नहीं है। बहुत मुमकिन है कि ये शायद नए साल में ही हो। सवाल ये है कि अगर सऊदी ने भी कैश रिजर्व नहीं दिया और IMF भी 1 अरब डॉलर की किश्त जारी नहीं करता तो इमरान सरकार रोजाना के खर्च के लिए पैसा कहां से लाएगी?

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि क्राउन प्रिंस ने जनरल बाजवा से बातचीत के बाद इमरान सरकार को कर्ज देने का फैसला किया। (फाइल)
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि क्राउन प्रिंस ने जनरल बाजवा से बातचीत के बाद इमरान सरकार को कर्ज देने का फैसला किया। (फाइल)

पैसा सिर्फ दिखाने के लिए, खर्च नहीं कर सकते
सऊदी अरब ने पाकिस्तान को कुल 4.2 अरब डॉलर का कर्ज या कहें फौरी मदद मुहैया कराने का वादा किया है। सऊदी-पाकिस्तान के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि सऊदी ने पाकिस्तान को ब्याज पर कर्ज दिया हो और लौटाने की मियाद भी तय की हो।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 4.2 में से 3 अरब डॉलर कैश रिजर्व (सेफ डिपॉजिट) है। बाकी 1.2 अरब डॉलर की ऑयल सप्लाई मिलेगी। मजे की बात यह है जो कैश रिजर्व है, वह सिर्फ साख यानी बैंक में दिखावे के लिए है। इसे खर्च नहीं किया जा सकता। यानी इमरान सरकार चाहे भी तो इसे खर्च नहीं कर सकती।

पुराना अनुभव, बेहद कड़वा
दो साल पहले भी सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर कर्ज दिया था। जब इमरान ने मलेशिया और तुर्की के साथ मुस्लिम देशों का अलग संगठन बनाने की साजिश रचनी चाही तो सऊदी ने ये पैसा फौरन वापस मांगा। तब कोई मोहलत भी नहीं दी गई। नतीजा ये हुआ कि इमरान सरकार ने चीन से मनमानी ब्याज दर (खुलासा नहीं) पर कर्ज लिया और सऊदी को लौटाया। इसके बाद साल भर तक दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट रही। बड़ी मुश्किल से अब मेल-मुलाकात मुमकिन हो पाई है।