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श्रीलंका में बच्चे भी महफूज नहीं:पलायन कर भारत पहुंचे लोगों ने कहा- वहां कैसे रहें, हमारे बच्चों को किडनैप किया जा रहा

कोलंबो7 महीने पहले
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श्रीलंका में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। इसकी वजह से पलायन भी जारी है। सोमवार को आठ श्रीलंकाई भारत के रामेश्वरम पहुंचे। पुलिस इन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। ये सभी लोग जान जोखिम में डालकर फाइबर बोट से रामेश्वरम कोस्ट पहुंचे।

इन लोगों का कहना है कि श्रीलंका में जो हालात हैं, उनमें परिवार चलाना नामुमकिन हो गया है। इससे भी बड़ी बात यह है कि इन लोगों के बच्चे भी वहां सुरक्षित नहीं हैं। भारत पहुंचे लोगों का आरोप है कि उनके बच्चों को किडनैप किया जा रहा है।

बच्चों को सफेद वैन में कर रहे किडनैप
भारत पहुंची एक महिला शशिकला ने कहा- हमारे पास परिवार पालने का कोई रास्ता नहीं है। महंगाई आसमान छू रही है। केरोसिन खरीदने के लिए हमें चार दिन लाइन में लगना पड़ा। दो लीटर तेल के लिए बच्चों को दांव पर नहीं लगा सकते।

एक सफेद वैन में बच्चों को किडनैप किया जा रहा है। हमें डर के साए में जीना पड़ रहा है। हम अपने ही देश से परेशान हो चुके हैं, यही वजह है कि हमें श्रीलंका छोड़कर भारत आना पड़ा।

रोजमर्रा से जुड़ी चीजें भी नहीं मिल पा रही, सार्वजनिक परिवहन ठप
लोगों को रोजमर्रा से जुड़ी चीजें भी नहीं मिल पा रही हैं या कई गुना महंगी मिल रही हैं। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है, जिससे वह जरूरी चीजों का आयात नहीं कर पा रहा है। देश में अनाज, चीनी, मिल्क पाउडर, सब्जियों से लेकर दवाओं तक की कमी है। पेट्रोल पंपों पर सेना तैनात करनी पड़ी है। 13 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट ठप हो गया है, क्योंकि बस के लिए डीजल नहीं है।

सिलेंडर की कीमत 4200 रुपए
श्रीलंका में महंगाई चरम पर है। चावल 500 रुपए और गेहूं 190 रुपए किलोग्राम बिक रहा है। एक किलोग्राम चीनी 290 रुपए, नारियल तेल 850 रुपए प्रति लीटर,जबकि एक अंडा 30 रुपए और 1 किलो मिल्क पाउडर की रिटेल कीमत 1900 रुपए तक पहुंच गई है। 12.5 किलो गैस सिलेंडर की कीमत 4200 रुपए हो चुकी है।

ज्यादा नोट छाप दिए, वैल्यू गिर गई
श्रीलंका के मौजूदा आर्थिक संकट को एक साल से अधिक हो गया है। अब लोगों को ये लग रहा है कि सरकार समितियां तो बना रही है, लेकिन कुछ ठोस कदम नहीं उठा पा रही है। सरकार ने कई सलाहकार समितियां बनाई हैं, समितियों के नीचे समितियां बनाई हैं,लेकिन हालात बदलते नहीं दिख रहे हैं। एक पत्रकार बताते हैं, " अर्थव्यवस्था गिरती ही जा रही है। इसकी एक वजह ये है कि बहुत अधिक नोट छाप दिए गए हैं। ब्याज दर बढ़ गई है। दूसरे देशों और वित्तीय संस्थानों का कर्ज बढ़ता जा रहा है। कर्ज चुकाने के लिए भी भी कर्ज लिए जा रहे हैं।"