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खुशी / संसद में नागरिकता संशोधन बिल पास, शरणार्थी महिला ने बेटी का नाम ‘नागरिकता’ रखा

बच्ची का जन्म सोमवार को हुआ था और परिवार ने उसका नाम ‘‘नागरिकता’’ रखने का फैसला किया। बच्ची का जन्म सोमवार को हुआ था और परिवार ने उसका नाम ‘‘नागरिकता’’ रखने का फैसला किया।
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बच्ची का जन्म सोमवार को हुआ था और परिवार ने उसका नाम ‘‘नागरिकता’’ रखने का फैसला किया।बच्ची का जन्म सोमवार को हुआ था और परिवार ने उसका नाम ‘‘नागरिकता’’ रखने का फैसला किया।

  • नागरिकता संशोधन बिल दोनों सदनों में पास होने के बाद दिल्ली में 750 पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों ने जश्न मनाया
  • बेटी की दादी मीरा दास ने सोमवार को बिल को लोकसभा में पास होने के लिए मन्नत मांगी थी और उस दिन उपवास भी रखा

Dainik Bhaskar

Dec 12, 2019, 10:27 AM IST

नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन बिल बुधवार को जैसे ही संसद से पास हुआ, दिल्ली के मजनूं का टीला में रहने वाले 750 पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों ने खूब जश्न मनाया। खुशी इतनी कि यहां रहने वाली पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी महिला ने नागरिकता संशोधन बिल पास होने की खुशी में दो दिन पहले जन्मी अपनी बेटी का नाम ही नागरिकता रख दिया। नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में सोमवार को और राज्यसभा में बुधवार को पास हुआ। अब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा।

बेटी की दादी मीरा दास ने बताया कि बच्ची का जन्म सोमवार को हुआ था और परिवार ने उसका नाम ‘‘नागरिकता’’ रखने का फैसला किया। मीरा ने भी लोकसभा में विधेयक के पारित होने की मन्नत मांगी थी और उस दिन उपवास भी रखा। मीरा ने कहा, “यह मेरी सबसे बड़ी इच्छा थी कि नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 संसद में पारित हो।” मां आरती ने कहा कि हम सात साल से नागरिकता के पीछे भाग रहे थे। मेरी बेटी के जन्म के बाद हमारा यह सपना पूरा हो गया। हम खुश हैं। हम भी इस देश के नागरिक कहलाएंगे।

नागरिकता संशोधन कानून क्या है? 
नागरिकता कानून 1955 में आया था। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है। भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती है। उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने के प्रावधान हैं। संशोधित विधेयक में पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक शरणार्थियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को नागरिकता मिलने का समय घटाकर 11 साल से 6 साल किया गया है। मुस्लिमों और अन्य देशों के नागरिकों के लिए यह अवधि 11 साल ही रहेगी।

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