पाक / एक्टिविस्ट्स की मांग- मोदी यूएन में सिंध-बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन का मामला उठाएं



बलूचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता ताज बलूच ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय अब तक पाक की नृशंसता पर चुप है।   -फाइल बलूचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता ताज बलूच ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय अब तक पाक की नृशंसता पर चुप है। -फाइल
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बलूचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता ताज बलूच ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय अब तक पाक की नृशंसता पर चुप है।   -फाइलबलूचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता ताज बलूच ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय अब तक पाक की नृशंसता पर चुप है। -फाइल

  • पाक कार्यकर्ताओं ने कहा- यूएन को पाक के प्रांतों में मानवाधिकार उल्लंघन की जांच के लिए टीम भेजनी चाहिए
  • जेनेवा में कार्यक्रम के दौरान अफगानिस्तान के कार्यकर्ताओं ने भी पाक के आतंक का मुद्दा उठाया

Dainik Bhaskar

Sep 17, 2019, 09:46 AM IST

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के एक्टिविस्ट्स ने मांग की है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिंध, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्तिस्तान में होने वाले मानवाधिकार उल्लंघन का मामला संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामने उठाएं। पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के कार्यकर्ताओं ने भी मोदी से इंसाफ दिलाने की मांग की है।

 

अमेरिका में सिंधी फाउंडेशन के निदेशक सूफी लगहरी ने जेनेवा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि सिंध में परेशानी यह है कि वहां डर है। सबसे बड़ी चुनौती लोगों से डर खत्म करने की है। हम चाहते हैं कि मोदी यूएन में सिंध का मुद्दा उठाएं, क्योंकि भारत को अपना नाम (सिंधु घाटी सभ्यता के कारण) हमारे क्षेत्र से मिला है।  

 

पाक सेना प्रांतों में नरसंहार कर रही

इस कार्यक्रम में पीओके, बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। बलूचिस्तान के मानवाधिकार आयोग के प्रमुख ताज बलूच ने कहा कि प्रांत में स्थितियां लगातार बिगड़ी हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय हमारे ऊपर की जा रही नृशंसता पर चुप है। पहले यह सिर्फ किडनैपिंग तक सीमित था। फिर ‘मारो और गायब करो’ और अब गांवों को जलाने का काम शुरू हो गया है। इसे नरसंहार कहते हैं। उन्होंने कहा कि यूएन और मानवाधिकार संस्थानों को बलूचिस्तान आ कर जांच करनी चाहिए। उन्हें पाक सेना को इंसानियत के खिलाफ अपराधों से रोकना होगा।

 

अफगानिस्तान में पाक की छवि आतंक फैलाने वाले देश की
अफगानिस्तान से पत्रकार बिलाल सरवरी भी अमेरिका में रखे गए इस कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने कहा कि अफगान में पाक की भूमिका एक विनाशकारी देश की रही हैं। उन्होंने कहा कि 2001 में तालिबान को सरकार से हटाने के बाद हमारे पास नया सफर शुरू करने का मौका था। लेकिन पाकिस्तान ने अपनी छवि सड़क किनारे बम लगाने वाले और आत्मघाती हमलों को अंजाम देने वाले देश की बनाई। सरवरी ने बताया कि जिहाद के नाम पर अफगानिस्तान में सभाएं होती हैं और फंड इकट्ठा किए जाते हैं। 

 

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