पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

फ्रांस छह देशों को बेच चुका यह लड़ाकू विमान, भारत को 25% छूट का दावा

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
  • राहुल का आरोप- यूपीए ने एक राफेल की कीमत 500-600 करोड़ तय की, भाजपा का दावा इसे हथियारों सहित 1600 करोड़ रुपए में खरीद रहे
  • फाइटर प्लेन की डील को घोटाला बताकर कांग्रेस लगातार मोदी सरकार को घेर रही
  • ‘भास्कर’ के सवालों पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा- राफेल पर सरकार का फैसला एकतरफा
  • केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ‘भास्कर’ से कहा- यूपीए सरकार तो 10 साल में कोई विमान ही नहीं खरीद पाई थी

इंटरनेशनल डेस्क. फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे पर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश में है। उसका कहना है कि यह डील महंगी है और इसमें घोटाला हुआ है। वहीं, मोदी सरकार का दावा है कि यह डील महंगी नहीं है। इसकी लागत में राफेल में तैनात होने वाली मिसाइलों की कीमत भी शामिल है।

 

सितंबर 2016 में भारत-फ्रांस के बीच 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए डील हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सौदा 7.8 करोड़ यूरो (करीब 58,000 करोड़ रुपए) में फाइनल हुआ। ऐसे में माना जा रहा है कि भारत को यह विमान सस्ता पड़ रहा है। वहीं, फ्रांस का दावा है कि बाकी देशों के साथ पहले हुई डील के मुकाबले इस सौदे में हमने भारत को 25% की छूट दी है।

 

रक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि फ्रांस ने 2015 में मिस्र को 24 राफेल बेचे थे। यह सौदा 5.9 अरब डॉलर में हुआ था। इसके बाद 2018 में कतर ने मय मिसाइल के 24 राफेल विमान खरीदे। इसके लिए 7 अरब डॉलर में डील हुई। ब्राजील, लीबिया, मोरक्को और स्विट्जरलैंड भी फ्रांस से राफेल खरीद चुके हैं।

 

देश राफेल सौदे की कुल कीमत एक राफेल की कीमत
मिस्र 24 42 हजार करोड़ रु. 1750 करोड़ रु.
कतर 24 50 हजार करोड़ रु. 2083 करोड़ रु
*भारत 36 58 हजार करोड़ रु. 1611 करोड़ रु.
(*भारत के सौदे की अनुमानित कीमत)

       

राफेल से जुड़े करार की शर्तों को गोपनीय रखा गया है। ऐसे में फ्रांस और भारत दोनों ही विमान की सही कीमत नहीं बता रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि सितंबर 2019 में पहला राफेल भारत पहुंचेगा। भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए राफेल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

यूपीए सरकार की डील क्या थी? : एनडीए सरकार का दावा है कि यूपीए सरकार के दौरान सिर्फ विमान खरीदना तय हुआ था। उस डील के मसौदे में स्पेयर पार्ट्स, हैंगर्स, ट्रेनिंग सिम्युलेटर्स, मिसाइल या हथियार खरीदने का कोई प्रावधान शामिल नहीं था। फाइटर जेट का मेंटेनेंस काफी महंगा होता है। इसके स्पेयर पार्ट्स महीनों बाद मिल पाते हैं, जिसकी प्रक्रिया काफी लंबी होती है। दावा है कि यूपीए सरकार की डील में पायलट ट्रेनिंग के लिए अलग से सिम्युलेटर मिलने, उसके रखरखाव और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी पर बात नहीं हुई थी।

 

मोदी सरकार ने क्या डील की? : मोदी सरकार ने राफेल की जो डील तय की है, उसमें राफेल के साथ मेटिओर और स्कैल्प मिसाइलें भी मिलेंगी। मेटिओर 100 किलोमीटर, जबकि स्कैल्प 300 किलोमीटर तक सटीक निशाना साध सकती हैं। इनमें ऑन बोर्ड ऑक्सीजन रिफ्यूलिंग सिस्टम भी लगा है। सरकार का दावा है कि राफेल बनाने वाली ‘दसॉल्त’ कंपनी इसे भारत की भौगोलिक परिस्थितियों और जरूरतों के हिसाब से डिजाइन करेगी। इसमें लेह-लद्दाख और सियाचिन जैसे दुर्गम इलाकों में भी इस्तेमाल करने लायक खास पुर्जे लगाए जाएंगे। कांग्रेस इन दावों को झूठा करार देती है। 

 

2003 में पहली बार हुई थी डील : भाजपा का दावा है कि 2003 में वाजपेयी सरकार ने राफेल को खरीदने के लिए मंजूरी दी थी। 2004 से 2012 तक यूपीए सरकार ने राफेल को लेकर फ्रांस की दो पार्टियों से बात भी की, फिर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। 2016 में मोदी सरकार ने यह डील फाइनल की। 

 

भास्कर के सवालों पर पक्ष, विपक्ष और विशेषज्ञ
 

क्या राफेल सौदा महंगा नहीं पड़ रहा? : कांग्रेस ने 10 साल तक रूस से नेगोशिएट किया, एक विमान नहीं खरीद सके। मोदी सरकार और फ्रांस के बीच हुई राफेल डील और यूपीए सरकार की डील की बेसिक कीमत में 9% का अंतर है। सभी सुविधाओं से लैस विमान अब हमें 20% सस्ता पड़ रहा है। - रविशंकर प्रसाद, कानून मंत्री

 

क्या डील पहले से बेहतर नहीं? : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने झूठ बोला कि सुविधाएं बढ़ने से राफेल की कीमत 526 करोड़ से बढ़कर 1,600 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई। वायुसेना से सलाह लिए बिना 126 राफेल की जगह सिर्फ 36 लड़ाकू विमान खरीदने का एकतरफा फैसला किया गया है। सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को ‘ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी’ से दरकिनार किया गया। - रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस प्रवक्ता

 

क्या विमान की कीमतों पर इतना असर पड़ता है? : जैसे कार के अलग-अलग वैरिएंट की कीमतें अलग-अलग होती हैं, वैसा ही मामला लड़ाकू विमानों के साथ भी होता है। कहा जा रहा है कि भारत को मिलने वाले राफेल पूरी तरह से लोडेड वर्जन हैं। डील की शर्तों मसलन रखरखाव, वॉरंटी और स्पेयर पार्ट्स आदि के हिसाब से कीमतों पर असर पड़ सकता है। - कर्नल (रिटायर्ड) यूएस राठौर

 

एचएएल विवाद क्यों है? : मोदी सरकार ने सभी तरह के इक्विपमेंट से लैस राफेल का सौदा किया है। इस हिसाब से इसे महंगा नहीं कह सकते हैं। बात एचएएल को ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी नहीं देने की है। दसॉल्त ने खुद ही एचएएल के साथ काम करने से इनकार किया है। इसके लिए फ्रांस की यह कंपनी सुखोई में होने वालों हादसों का हवाला देती है। - कर्नल (रिटायर्ड) दानवीर सिंह, इंडियन डिफेंस रिव्यू जर्नल के असिस्टेंट एडिटर 

 

राफेल पर राहुल v/s जेटली

 

भ्रष्टाचार के दबाव में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने झूठ बोला। सरकार जानबूझकर राफेल सौदे की सही कीमत देश को नहीं बता रही।

राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष

 

राहुल बेसिक एयरक्राफ्ट की कीमतों की तुलना हथियारों से लैस राफेल एयरक्राफ्ट की कीमतों से कर रहे हैं। उन्होंने सात भाषणों में इसकी अलग-अलग कीमतें बताईं। वे मसखरे शहजादे हैं जो झूठ फैला रहे हैं।

अरुण जेटली, वित्त मंत्री

 

राफेल यानी तूफान

  • राफेल का फ्रेंच में मतलब तूफान होता है। दसॉल्त कंपनी इसी नाम से लड़ाकू विमान बनाती है।
  • राफेल विमान एक मिनट में 60 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। इसकी रेंज 3700 किमी है।
  • यह विमान 2200 से 2500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है।
  • वायुसेना के पास विमानों की 32 स्क्वॉड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वॉड्रन की है। राफेल से नई स्क्वॉड्रन खड़ी हो सकेगी। 
0

आज का राशिफल

मेष
मेष|Aries

पॉजिटिव- आर्थिक दृष्टि से आज का दिन आपके लिए उपलब्धियां ला रहा है। उन्हें सफल बनाने के लिए आपको दृढ़ निश्चयी होकर काम करना है। आज कुछ समय स्वयं के लिए भी व्यतीत करें। आत्म अवलोकन करने से आपको बहुत अधिक...

और पढ़ें