• Hindi News
  • International
  • Preparation For Big Changes In Healthcare Corona Will Detect From Asthma To Cancer Only Through Breathing, Will Get Rid Of Giving Different Types Of Samples

हेल्थकेयर में बड़े बदलाव की तैयारी:ई-नोज ; सिर्फ सांसों के जरिए कोरोना, अस्थमा से लेकर कैंसर तक का पता लगा लेगी, तरह-तरह के सैंपल देने से छुटकारा मिलेगा

लंदन7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
‘आउलस्टोन’ की ई-नोज। - Dainik Bhaskar
‘आउलस्टोन’ की ई-नोज।

क्या यह संभव है कि बिना ब्लड या कोई और सैंपल दिए बीमारी का पता लगाया जा सके। आपको ये बात साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी लग सकती है। पर वैज्ञानिक इसे हकीकत में बदलने में जुटे हुए हैं। यह संभव हो सका है ‘ई-नोज’ (इलेक्ट्रॉनिक नोज) डिवाइस से। जो महज सांसों के जरिए कोरोना, अस्थमा, लिवर से जुड़ी बीमारियों के साथ कई तरह के कैंसर का भी पता लगा सकती है।

वैज्ञानिकों का दावा है कि यह डिवाइस अगले दो-तीन वर्षों में हेल्थकेयर में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। इससे लोगों को बीमारियों का पता लगाने केे लिए तरह-तरह के सैंपल देने से निजात मिल सकेगी। कई देशों में इसके क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं। पर सबसे ज्यादा आशाजनक नतीजे ब्रिटेन में ही मिले हैं। कैंब्रिज स्थित कैंसर रिसर्च यूके शोधकर्ताओं और डॉक्टरों के लिए ब्रीद टेस्ट कर रही है।

बीमारी पहचानने के साथ इस टेक्नोलॉजी के जरिए अनुमान लगाया जा रहा है कि मरीज को किस नई दवा से खास फायदा मिलेगा या उपचार काम भी कर रहा है या नहीं। ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस से जुड़े और यूरोप के कई अस्पतालों में लंग कैंसर का पता लगाने के लिए ब्रीद टेस्ट की मदद ली जा रही है। इस डिवाइस में एक सिलिकॉन का डिस्पोजेबल मास्क कैमरे के आकार के गैजेट से जुड़ा होता है।

इस मास्क में लगे सेंसर सांस का विश्लेषण करते हैं। बायोटेक कंपनी आउलस्टोन के सीईओ बिली बॉयले बताते हैं कि उनकी डिवाइस लिवर की बीमारियों के साथ कोलोन कैंसर का पता लगाने में भी सक्षम है। हमारे द्वारा छोड़ी गई सांसों में करीब 3500 वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वीओसी), गैस के कण और ड्रॉपलेट्स मौजूद रहते हैं। हर स्थिति में इन वीओसी की रासायनिक प्रकृति अलग होती है।

ई-नोज एआई के जरिए इसी रसायन के व्यूह को पहचानती है। कंसल्टंट पीडियाट्रिक चेस्ट फिजिशियन डॉ. एंड्रयू बुश कहते हैं कि यह तथ्य तो साबित हो चुका है कि हमारी सांसों में मौजूद रसायन सेहत की स्थिति बता देते हैं। आउलस्टोन की डिवाइस में हमने इसी को आधार बनाकर काम किया है।

सांसों में अमोनिया का स्तर ज्यादा यानी लिवर-किडनी से जुड़ी समस्या

नीदरलैंड्स के रेडबाउंड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के प्रो. पीटर सीर्सेमा बताते हैं कि आंत और कोलोन के कैंसर का पता तो सांसों में हो रहे रासायनिक बदलाव से लगा ही रहे हैं। पर अब लिवर और किडनी की समस्या वाले लोगों की सांसों में अमोनिया का उच्च स्तर जैसी समस्या भी पता लगने लगी है।

जर्मनी के एयरसेंस ने पेन3 ई-नोज डिवाइस को पीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव नतीजों के जरिए वायरस पहचानना सिखाया। वह ई- नोज 80 सेकेंड बाद ही कोरोना को पहचानने में सक्षम हो गई। शोधकर्ताओं ने माना है कि भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ई-नोज रियल टाइम निदान में सक्षम हो सकती है।