इराक / सरकार के विरोध में 1 महीने से प्रदर्शन जारी; अब तक 319 की मौत, 15 हजार जख्मी



प्रदर्शनकारियों ने बगदाद में इराकी सुरक्षाबलों द्वारा बनाई गई दीवार गिराई। प्रदर्शनकारियों ने बगदाद में इराकी सुरक्षाबलों द्वारा बनाई गई दीवार गिराई।
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प्रदर्शनकारियों ने बगदाद में इराकी सुरक्षाबलों द्वारा बनाई गई दीवार गिराई।प्रदर्शनकारियों ने बगदाद में इराकी सुरक्षाबलों द्वारा बनाई गई दीवार गिराई।

  • इराक में अक्टूबर से सरकार को बर्खास्त करने, भ्रष्टाचार खत्म करने, आर्थिक सुधार और रोजगार जैसी कई मांगों को लेकर प्रदर्शन
  • प्रदर्शन के कारण सरकार ने बगदाद समेत अन्य शहरों में कर्फ्यू लगाया और इंटनेट सेवा भी ठप कर दी थी

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2019, 03:37 PM IST

बगदाद. इराक की संसदीय मानवाधिकार समिति ने एक रिपोर्ट में कहा है कि पिछले महीने सरकार विरोधी प्रदर्शन की शुरुआत के बाद से इराक में 319 लोग मारे गए हैं। करीब 15 हजार जख्मी भी हुए हैं। अल-जजीरा के मुताबिक, शनिवार को प्रदर्शन के दौरान इराकी सुरक्षाबलों के साथ टकराव में बगदाद में चार प्रदर्शनकारी मारे गए। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कई टेंट जला दिए।

 

अल खलानी व्यावसायिक इलाके में लोगों पर सुरक्षाबलों ने गोला-बारूद भी फेंका। मानवाधिकार आयोग ने एक बयान में कहा कि हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान दक्षिणी शहर बसरा में शुक्रवार को दो लोग मारे गए। बसरा बगदाद से लगभग 450 किलोमीटर दूर है। प्रत्यक्षदर्शियों ने सीएनएन को बताया कि रविवार को सुरक्षाबलों ने गलती से एक इंटरमीडिएट स्कूल में गैस के गोले छोड़ दिए। इसमें करीब 23 छात्रा जख्मी हो गई।

 

प्रधानमंत्री ने इस्तीफा देने की बात कही थी

इराक के प्रधानमंत्री आदिल अब्दुल माहदी ने शनिवार को कहा था कि उनकी सरकार मंत्री स्तर पर महत्वपूर्ण संशोधन करेगी। युवाओं द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन से पूरा देश में उथल-पुथल का माहौल है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री ने कुछ दिन पहले इस्तीफा देने की बात कही थी।

 

लोगों ने देश के मौजूदा हालात के लिए नेताओं को दोषी ठहराया

इराक में अक्टूबर से सरकार को बर्खास्त करने, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने, आर्थिक सुधार करने और रोजगार के अवसर पैदा करने जैसी कई मांगों को लेकर प्रदर्शनकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हिंसा को देखते हुए इराकी सरकार ने बगदाद समेत अन्य शहरों में कर्फ्यू लगा दिया था और इंटनेट सेवा भी ठप कर दी थी। इराक के लोग मौजूदा राजनीतिक दलों को दोषी ठहरा रहे हैं। माना जाता है कि 2003 में पूर्व इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के पतन के बाद से देश में बेरोजगारी और आर्थिक तंगी जैसी समस्याएं बढ़ी हैं।

 

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