चीन में जिनपिंग गद्दी छोड़ो के नारे लगे:सख्त लॉकडाउन के खिलाफ 13 शहरों में प्रदर्शन, अनलॉक करने की डिमांड

बीजिंग2 महीने पहले

चीन में जीरो कोविड पॉलिसी के खिलाफ लोग सड़क पर उतर आए हैं। बीजिंग से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब 13 बड़े शहरों तक पहुंच गए हैं। पुलिस इन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज से लेकर लोगों को गिरफ्तार तक कर रही है, लेकिन लोगों का गुस्सा खत्म नहीं हो रहा है। रविवार रातभर लोग सड़कों पर प्रदर्शन करते रहे।

इस दौरान लोग नारेबाजी करते हुए लॉकडाउन हटाने और आजादी देने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा- हमें फ्रीडम ऑफ प्रेस, फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन, फ्रीडम ऑफ मूवमेंट चाहिए। हमें हमारी आजादी दे दो। लोग राष्ट्रपति शी जिनपिंग से इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।

पहले समझते हैं, ये प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं
चीन में लगातार कोरोना बढ़ रहा है। 27 नवंबर को कोरोना के 40 हजार मामले सामने आए हैं। ये अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। चीन में अब एक्टिव केस का आंकड़ा 3 लाख के पार हो गया है। इसके चलते जिनपिंग सरकार ने कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं।

सख्त लॉकडाउन से 66 लाख लोग घरों में कैद हैं। ये लोग खाने के सामान के लिए भी बाहर नहीं निकल सकते। रोज होने वाले कोविड टेस्ट से भी नाराजगी बढ़ रही है। जो लोग सरकार के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

सबसे पहले देखें प्रोटेस्ट की 3 तस्वीरें...

ये फोटो बीजिंग की है। रविवार की रात भर लोग सड़कों पर बैनर लेकर खड़े रहे। इन पर लिखा है- नीड ह्यूमन राइट, नीड फ्रीडम।
ये फोटो बीजिंग की है। रविवार की रात भर लोग सड़कों पर बैनर लेकर खड़े रहे। इन पर लिखा है- नीड ह्यूमन राइट, नीड फ्रीडम।
बीजिंग में प्रदर्शनकारियों ने बिल्डिंग आग हादसे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। लोग जिनपिंग सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते भी दिखे।
बीजिंग में प्रदर्शनकारियों ने बिल्डिंग आग हादसे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। लोग जिनपिंग सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते भी दिखे।
बीजिंग में प्रदर्शनकारी पाबंदियों को तोड़ते दिखाई दिए। लोगों ने मास्क नहीं पहना था।
बीजिंग में प्रदर्शनकारी पाबंदियों को तोड़ते दिखाई दिए। लोगों ने मास्क नहीं पहना था।

अब इस पूरे मामले को सिलसिलेवार समझते हैं...

1. पहले वो वजह, जिससे लोगों का गुस्सा भड़का
चीन में 10 महीनों से जीरो कोविड पॉलिसी लागू है। कई तरह की पाबंदियां हैं, लेकिन गुस्सा तब भड़क गया, जब चीन के शिंजियांग में 25 नवंबर को एक बिल्डिंग की 15वीं मंजिल में आग लगी गई। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई। लॉकडाउन की वजह से राहत समय पर नहीं पहुंच सकी। लोगों ने आरोप लगाया कि अफसरों ने लापरवाही की। इसके बाद बीजिंग में लोग सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन शुरू हो गए।

यह फोटो उसी बिल्डिंग की है, जहां आग से 10 लोगों की मौत हो गई।
यह फोटो उसी बिल्डिंग की है, जहां आग से 10 लोगों की मौत हो गई।

2. नए लचीले नियम नहीं मान रहे अफसर
नए नियमों में लोगों को प्रतिबंधों से ढील दी गई है और इसे अर्थव्यवस्था को कम नुकसान पहुंचाने वाला बनाया गया है, लेकिन कोविड केस बढ़ने के कारण स्थानीय अधिकारी सख्त नियमों को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। नियमों में छूट की बजाय अधिकारी पूर्व की तरह जीरो कोविड नीति की ओर ही लौट रहे हैं।

3. कितने शहरों में फैला प्रदर्शन
प्रदर्शन राजधानी बीजिंग से शुरू हुआ और लॉन्चो, शियान, चोंगकिंग, वुहान, झेंगझोऊ, कोरला, होटन, ल्हासा, उरुमकी, शंघाई, नानजिंग, शिजियाझुआंग तक पहुंच गया। यहां पिछले तीन दिनों से लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

4. जिनपिंग गद्दी छोड़ो के नारे लगा रहे
लोग जिनपिंग गद्दी छोड़ो, कम्‍युनिस्‍ट पार्टी गद्दी छोड़ो, शिनजियांग को अनलॉक करो, चीन को अनलॉक करो, पीसीआर टेस्‍ट नहीं चाहिए, प्रेस की आजादी चाहिए जैसे नारे लगा रहे हैं।

5. लोग ब्लैंक व्हाइट पेपर क्यों दिखा रहे
प्रदर्शनकारी असंतोष जताते हुए खाली सफेद कागज (ब्लैंक व्हाइट पेपर) लेकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। बीजिंग में भी स्टूडेंट्स ब्लैंक व्हाइट पेपर लेकर साइलेंट प्रोटेस्ट करते दिखे। ये एक तरह से सेंसरशिप या गिरफ्तारी से बचने के तौर पर किया जाने वाला विरोध है।

ये तस्वीर नानजिंग शहर की एक यूनिवर्सिटी की है। यहां स्टूडेंट्स ने ब्लैंक व्हाइट पेपर लेकर प्रदर्शन किया।
ये तस्वीर नानजिंग शहर की एक यूनिवर्सिटी की है। यहां स्टूडेंट्स ने ब्लैंक व्हाइट पेपर लेकर प्रदर्शन किया।
ये तस्वीर गुआंगजौ शहर की है। यहां महीनों से घरों में कैद लोगों ने कोरोना पाबंदियां हटाने की मांग की।
ये तस्वीर गुआंगजौ शहर की है। यहां महीनों से घरों में कैद लोगों ने कोरोना पाबंदियां हटाने की मांग की।
बीजिंग में भी लोगों ने सफेद कागज लेकर प्रदर्शन किए। लोगों को 'हमें डिक्टेटरशिप की बजाय डेमोक्रेसी चाहिए' कहते सुना गया।
बीजिंग में भी लोगों ने सफेद कागज लेकर प्रदर्शन किए। लोगों को 'हमें डिक्टेटरशिप की बजाय डेमोक्रेसी चाहिए' कहते सुना गया।

विरोध पर चीनी मीडिया चुप
चीनी मीडिया इस विरोध प्रदर्शन को लेकर चुप है। वहां विरोध से जुड़ी कोई खबरें नहीं दिखाई जा रही हैं। हालांकि चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में एक आर्टिकल पब्लिश हुआ है, जिसमें ये कहा गया है कि वेस्टर्न मीडिया जीरो कोविड पॉलिसी से जुड़े इस मामले को हवा दे रहा है। फुदान यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी के हवाले से इसमें लिखा गया है- आपसी मतभेद के चलते वेस्टर्न कंट्रीज चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की निंदा कर रही हैं।

प्रदर्शन कवर कर रहा BBC का पत्रकार गिरफ्तार, रिहाई से पहले पुलिस ने पीटा
शंघाई में विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे BBC के एक पत्रकार एड लॉरेंस को चीन की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। थोड़ी ही देर बाद उसके साथ मार-पीट की गई, फिर उसे रिहा कर दिया गया। BBC के मुताबिक पुलिस ने उसके हाथ बांधे, पीटा और उसे लात भी मारीं। इधर, चीनी अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि एड लॉरेंस ने गिरफ्तारी के समय नहीं बताया था कि वो पत्रकार है। उसके पास आईडेंटिटी और प्रेस कार्ड भी नहीं था।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस अपनी गाड़ियों में जबरदस्ती डाल कर ले जा रही है। तस्वीर में-शंघाई में एक प्रदर्शनकारी को पकड़कर ले जाती पुलिस।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस अपनी गाड़ियों में जबरदस्ती डाल कर ले जा रही है। तस्वीर में-शंघाई में एक प्रदर्शनकारी को पकड़कर ले जाती पुलिस।

अब शंघाई में विरोध प्रदर्शन के फोटो देखें...
चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई में कोरोना से हाहाकार मच हुआ है। शंघाई चीन के साथ दुनिया के अन्य देशों के आर्थिक कारोबार के लिए भी काफी महत्व रखता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से देश की आर्थिक रफ्तार पर असर पड़ रहा है।

एक्सपर्ट के मुताबिक चीन की GDP में 20% योगदान देने वाला क्षेत्र इस वक्त भी लॉकडाउन या सख्त पाबंदियों से गुजर रहा है। उसके केंद्रीय बैंक भी अगले साल चीन की ग्रोथ को 4.3% से घटाकर 4% आंक रहे हैं।

शंघाई में एक प्रदर्शनकारी ने कहा- मैंने पिछले 15 सालों में शंघाई में इतने बड़े पैमाने पर कोई विरोध प्रदर्शन नहीं देखा।
शंघाई में एक प्रदर्शनकारी ने कहा- मैंने पिछले 15 सालों में शंघाई में इतने बड़े पैमाने पर कोई विरोध प्रदर्शन नहीं देखा।
विरोध प्रदर्शन बढ़ता देख शंघाई में पुलिस अधिकारियों ने उरुमकी जाने वाली सड़क को बंद कर दिया।
विरोध प्रदर्शन बढ़ता देख शंघाई में पुलिस अधिकारियों ने उरुमकी जाने वाली सड़क को बंद कर दिया।

लंदन में भी प्रदर्शन
चीन की जीरो कोविड पॉलिसी के खिलाफ लंदन में भी प्रदर्शन देखे गए। यहां चीनी दूतावास के बाहर 27 सितंबर को सैकड़ों लोग जुटे। लोग 25 नवंबर को शिंजियांग की इमारत में आग लगने से मारे गए 10 लोगों की मौत का भी विरोध कर रहे थे। चीन में अधिकतर लोग सख्त कोरोना प्रतिबंधों को इन मौतों की वजह बता रहे हैं। हालांकि चीनी प्रशासन इस आरोप को ख़ारिज कर रहा है। आयरलैंड के डबलिन, ब्रिटेन के शेफील्ड, कनाडा के टोरंटो और अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भी प्रदर्शन हो रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने शिंजियांग में हुए हादसे में मारे गए लोगों को फूलों और मोमबत्तियों के जरिए श्रद्धांजलि दी।
प्रदर्शनकारियों ने शिंजियांग में हुए हादसे में मारे गए लोगों को फूलों और मोमबत्तियों के जरिए श्रद्धांजलि दी।

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