पुतिन की चेतावनी:रूसी राष्ट्रपति बोले- अमेरिका युद्ध के लिए उकसा रहा है, यूक्रेन का नाटो में शामिल होना दुनिया के लिए खतरा

मास्को6 महीने पहले

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस साल पहली बार यूक्रेन संकट पर प्रतिक्रिया दी है। पुतिन ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका रूस को यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू करने के लिए उसका रहा है। वो रूस की तरक्की पर लगाम लगाना चाहता है। इसके लिए आर्थिक प्रतिबंध लगाने का बहाना खोज रहा है और इस लक्ष्य को पाने के लिए यूक्रेन का इस्तेमाल कर रहा है।

पुतिन ने मंगलवार को कहा- अगर यूक्रेन को नाटो में शामिल किया गया तो यह न सिर्फ रूस बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरनाक साबित होगा। यूक्रेन नाटो की सैन्य तकनीक और हथियार का इस्तेमाल क्रीमिया को वापस छीनने में कर सकता है। जिससे रूस और नाटो ब्लॉक के बीच युद्ध हो सकता है।

रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाना चाहता है अमेरिका

पुतिन ने मंगलवार को हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका हमे यूक्रेन के साथ युद्ध के लिए उकसा रहा है।
पुतिन ने मंगलवार को हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका हमे यूक्रेन के साथ युद्ध के लिए उकसा रहा है।

पुतिन ने मास्को में हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा- हम पर प्रतिबंध लगाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे कि पहले हमें किसी संघर्ष में उलझा दे और फिर यूरोप में अपने सहयोगियों को मजबूर करे कि हम पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं।

फिलहाल अमेरिका में इस पर चर्चा भी चल ही रही है। इन सभी सवालों को गहराई से देखें तो यह साफ हो जाता है कि इससे एक नेगेटिव डेवलपमेंट होगा। हम इससे बचना चाहते हैं।

सभी देशों के हित का ध्यान रखा जाए

1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद यूक्रेन को स्वतंत्रता मिली। 2014 में रूस ने यूक्रेन के कंट्रोल वाले क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। इसके बाद से दोनों देशों के संबंध खराब हो गए।
1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद यूक्रेन को स्वतंत्रता मिली। 2014 में रूस ने यूक्रेन के कंट्रोल वाले क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। इसके बाद से दोनों देशों के संबंध खराब हो गए।

रूस के मुताबिक, सभी देशों के हितों को ध्यान रखते हुए इस समस्या को हल करने का एक तरीका खोजा जाना चाहिए। अमेरिका और नाटो ने पिछले हफ्ते रूस की मांगों पर लिखित जवाब दिया था। इस पर पुतिन ने कहा कि इसमें भी रूस की प्रमुख चिंताओं को नजरअंदाज कर दिया गया था। बता दें रूस ने सैन्य कार्रवाई के जरिए 2014 में यूक्रेन से क्रीमिया को छीन लिया था।

आखिर बार पिछले साल बयान दिया था

पुतिन ने आखिरी बार यूक्रेन मुद्दे पर पिछले साल 23 दिसंबर को बयान दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका मिसाइलों के साथ हमारे घर की चौखट तक आ गया था।
पुतिन ने आखिरी बार यूक्रेन मुद्दे पर पिछले साल 23 दिसंबर को बयान दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका मिसाइलों के साथ हमारे घर की चौखट तक आ गया था।

पुतिन ने आखिर बार इस मुद्दे पर पिछले साल 23 दिसंबर को बयान दिया था। तब वे काफी ज्यादा आक्रामक मोड में थे, लेकिन मंगलवार को उनका रुख बदला हुआ नजर आया। पुतिन ने कहा- मुझे उम्मीद है कि हम इस परेशानी का हल ढूंढ लेंगे। हालांकि यह आसान नहीं है, हम इसे समझते हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जल्द ही मास्को का दौरा कर सकते हैं।

क्रेमलिन के प्रवक्ता, दिमित्री एस. पेसकोव ने मीडिया से कहा कि रूसी अधिकारी यूक्रेन संकट को कम करने के लिए अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में एक औपचारिक मसौदा तैयार कर रहे है। पुतिन ने मंगलवार को इटली के प्रधान मंत्री मारियो ड्रैगी से भी टेलीफोन पर बात की। इटली के PMO के मुताबिक, पुतिन ने कहा कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो गंभीर नतीजे सामने आएंगे।

भारत और चीन को धन्यवाद
बता दें कि यूक्रेन विवाद को लेकर UNSC में वोटिंग भी हई। वोटिंग के दौरान अमेरिका और रूस के डिप्लोमैट आपस में भिड़ गए। भारत ने इस वोटिंग से दूरी बनाई रखी। जिस पर रूस के डिप्लोमैट ने भारत को धन्यवाद कहा है कि। रूसी डिप्लोमैट ने सोशल मीडिया पर लिखा- अपने 4 सहयोगियों चीन, भारत, गैबॉन और केन्या का धन्यवाद, जो मतदान से पहले अमेरिकी दबाव के बावजूद डटे रहे।

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