11 फरवरी को चौथी क्वॉड समिट:तीन दिन के दौरे पर ऑस्ट्रेलिया जाएंगे जयशंकर; ड्रैगन बोला- कोल्ड वॉर की मानसिकता रखते हैं क्वॉड देश

मेलबर्न6 महीने पहले
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चीन ने मेलबर्न में होने जा रही क्वॉड बैठक को लेकर प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान का कहना है कि भारत सहित क्वॉड के सभी सदस्य लोगों को गुमराह कर रहे हैं। ये सभी देश चीन से कोल्ड वॉर की मानसिकता रखते हैं। बता दें कि विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर 10 से 13 फरवरी तक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रहेंगे।

यहां वो ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्रियों के साथ मेलबर्न में 11 फरवरी को चौथी क्वॉड बैठक (Quad summit 2022) में शामिल होंगे। इस मीटिंग में कोरोना महामारी, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी, चीन और जलवायु परिवर्तन समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। 2 फरवरी को जयशंकर ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री से बातचीत करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय मसलों के साथ चीन की विस्तारवादी नीति पर भी चर्चा हो सकती है।

क्वॉड देशों के लिए चिंता बना चीन
दरअसल, चीन सभी क्वॉड देशों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। ऑस्ट्रेलिया अपनी जमीन, इंफ्रास्टक्चर और राजनीति में चीन की बढ़ती रुचि से परेशान है। भारत चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक ताकत को चुनौती के रूप में देख रहा है। जापान, चीन की विस्तारवादी नीति से चिंतित है, वहीं अमेरिका फिर से चीन के इंडो-पेसिफिक रीजन में प्रभुत्व हासिल करने के लिए परेशान है।

चीन की विस्तारवादी नीति पर भी होगी चर्चा
चीन की विस्तारवादी नीति पर भी होगी चर्चा

इन चुनौतियों पर होगा विचार-विमर्श
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, क्वॉड के सदस्य देशों के विदेश मंत्री अब तक के सहयोग की समीक्षा करेंगे। नए एजेंडे पर विचार किया जाएगा। इस दौरान कोविड-19, सप्लाई चेन, जरूरी टेक्नोलॉजी और क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

क्या है क्वॉड
क्वाड का मतलब 'क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग' है। भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका इसके सदस्य हैं। क्वॉड का मकसद एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए प्रयास करना है। साल 2007 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो अबे की पहल पर ये तैयार किया गया था। 2019 में पहली क्वॉड बैठक हुई थी।

फिलिपींस भी जाएंगे जयशंकर
ऑस्ट्रेलिया के बाद 13 फरवरी को जयशंकर फिलिपींस पहुंचेंगे। बतौर विदेश मंत्री यह उनकी पहली फिलिपींस यात्रा होगी। यहां वो फिलीपींस के विदेश मामलों के सचिव तियोदोरो एल लोक्सिन जूनियर के साथ बैठक करेंगे।

खास बात यह है कि भारत के विदेश मंत्री फिलिपींस के ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के बाद पहली बार फिलिपींस पहुंच रहे हैं, जिसके चलते यह यात्रा काफी अहम मानी जा रही है। बता दें कि फिलीपींस ने हाल ही में ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल को लेकर भारत के साथ 37.5 करोड़ अमेरीकी डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

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