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रिपोर्ट में खुलासा:नींद, रिश्तों से लेकर पालन-पोषण तक में समस्याएं पैदा कर रही फेसबुक

न्यूयॉर्क22 दिन पहले
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कंपनी के सबसे बड़े बाजार भारत और फिलीपींस में समस्याओं का सामना कर रहे यूजर्स का आंकड़ा करीब 25% है। - Dainik Bhaskar
कंपनी के सबसे बड़े बाजार भारत और फिलीपींस में समस्याओं का सामना कर रहे यूजर्स का आंकड़ा करीब 25% है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक अपने यूजर की जिंदगी में मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा कर रहा है। यह खुलासा एक अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक के आंतरिक शोध में शोधकर्ताओं ने पाया है कि उसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले 290 करोड़ यूजर्स में से करीब 36 करोड़ लोग लत जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।

इसी के चलते 8 में से 1 यानी 12.5% यूजर्स को नींद, काम, पालन-पोषण की दिक्कतें या रिश्तों में दरार पड़ने की समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। फेसबुक के सबसे आकर्षक बाजारों में से एक अमेरिका में करीब लगभग 10% यूजर्स इस परेशानी से जूझ रहे हैं। कंपनी के सबसे बड़े बाजार भारत और फिलीपींस में समस्याओं का सामना कर रहे यूजर्स का आंकड़ा करीब 25% है। फेसबुक मानती है कि इस्तेमाल में उसका प्लेटफॉर्म समस्याग्रस्त है।

12.5 फीसदी यूजर को लगता है कि वह फेसबुक की लत के शिकार हो चुके, इनकी संख्या करीब 36 करोड़

दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तुलना में कहीं ज्यादा खतरनाक है फेसबुक
रिपोर्ट के मुताबिक यूजर्स के लिए फेसबुक किसी भी अन्य प्रमुख सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म की तुलना में बदतर है। इससे यूजर्स को किसी नशे जैसी लत लगती है। इसी कारण यूजर्स बार-बार इस पर लौटने के लिए छटपटाते हैं। आंतरिक शोध के दस्तावेजों में कहा गया है कि फेसबुक के स्वामित्व वाली पैरेंट कंपनी मेटा के इंस्टाग्राम या वॉट्सएप जैसे किसी एक सोशल मीडिया एप का जरूर इस्तेमाल करते हैं।

वैसे तो फेसबुक की प्रतिस्पर्धा वाले ट्विटर या स्नैपचैट भी लोगों के जीवन में कई मायनों में परेशानियां पैदा करते हैं। लेकिन फेसबुक इस मामले में बहुत आगे है। फेसबुक लोगों को तनावग्रस्त बनाती है, उन्हें एकाग्र नहीं रहने देती और एक तरह से दबाव में रखती है। इस कारण लोग किसी भी चैट या कमेंट का जवाब देने के लिए अपने फोन पर आतुर रहते हैं।

यूजर्स की उत्पादकता प्रभावित हो रही; टीम ने सोशल मीडिया से ब्रेक का सुझाव दिया
फेसबुक पर कितने लोगों को इस्तेमाल में परेशानी का अनुभव होता है, इसके लिए कंपनी ने आंतरिक शोध कराया था। इसके दस्तावेजों के अनुसार, अध्ययन में कहा गया है कि यूजर फेसबुक पर चैट, फोटो या कमेंट देखने के लिए बार-बार लॉगइन करते हैं, तो इससे उनका काम प्रभावित होने लगता है। वे दिए गए टास्क को भी पूरा करना बंद कर देते हैं।

इससे यूजर की उत्पादकता प्रभावित होती है। अगर अपना काम करते हैं, तो रात में एप स्क्रॉल के कारण नींद पूरी नहीं ले पाते। इसका असर रिश्तों पर हो रहा है। इन परेशानियों के बाद यूजर्स की समस्याओं को दूर करने के लिए फेसबुक टीम ने कई सुधारों का सुझाव दिया। इनमें यूजर को सोशल मीडिया से ब्रेक लेने और सूचनाओं को दोबारा पाने के लिए कुछ विकल्प देने की सुविधा पर विचार होना चाहिए।

25 फीसदी भारतीय यूजर तो अमेरिका में इसके 10% यूजर्स मनोवैज्ञानिक दिक्कतों का सामना कर रहे हैं

किसी सूचना या सर्च के बारे में लगातार नोटिफिकेशन भेजने से पड़ती है लत
शोधकर्ताओं ने मेट्रिक्स पर फेसबुक के फोकस की दिशा के बारे में चिंता जताई। इसमें एक व्यक्ति द्वारा एप लॉग इन करने की संख्या भी शामिल है, जिसे कंपनी एक सत्र कहती है। शोधकर्ता ने लिखा कि फेसबुक यूजर को बार-बार पेज पर आने के लिए मजबूर करने वाले नोटिफिकेशन या सूचनाएं भेजता रहता है। यानी यूजर द्वारा बहुतायत देखी जाने वाली खबर, वीडियो या कमेंट काे वह किसी नशे के डोज की तरह परोसता है।

दूसरी ओर, मेटा में रिसर्च प्रमुख, उपाध्यक्ष, प्रतिती रायचौधरी ने कहा कि फेसबुक का समस्याग्रस्त इस्तेमाल का लत से लेना-देना नहीं है। यह ठीक वैसे ही है जैसे लोग टीवी और स्मार्टफोन जैसी बहुत सारी तकनीकों के साथ परेशानी का सामना करते हैं। कंपनी ने कहा कि अखबार ने आंतरिक दस्तावेजों में से चुनिंदा अंश को समस्या के रूप में पेश किया है।

लत ऐसी कि एप बाथरूम तक में लॉगइन होता है
अध्ययन में 22 वर्षीय एक युवती ने बताया कि मैं हर दिन, हर पल फेसबुक लॉगइन करती हूं। यहां तक कि नहाने के वक्त भी फेसबुक पर रहती हूं। वहीं, 36 वर्षीय एक एनालिस्ट ने कहा कि मैं 2004 से इस प्लेटफाॅर्म पर हूं। मुझे पता ही नहीं लगा कि कब फेसबुक ने मुझे बाकी दुनिया से मानसिक तौर पर अलग कर दिया। फेसबुक के शोध में शामिल रहे शोधकर्ताओं ने पिछले साल मार्च में वेल-बीइंग टीम के भंग होने के महीनों बाद आंतरिक शोध के निष्कर्षों को साझा किया था।

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