खतरों से निपटने को तैयार हम:रूस ने शुरू की S-400 मिसाइल सिस्टम की सप्लाई, 400 किमी की दूरी तक टारगेट को तबाह कर सकता है

6 महीने पहले

रूस ने सतह से हवा में मार करने वाले S-400 मिसाइल सिस्टम भारत को सप्लाई करना शुरू कर दिया है। रूस और भारत ने अक्टूबर 2018 में S-400 की सप्लाई को लेकर एक डील की थी। यह मिसाइल सिस्टम 4 अलग-अलग मिसाइलों से लैस है जो दुश्मन के जंगी जहाज, ड्रोन, ​विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों को 400 किमी की दूरी पर मार सकता है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन्हें पहले पश्चिमी सीमा के करीब तैनात किया जाएगा, जहां से यह पाकिस्तान और चीन के साथ पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं के खतरों से निपट सकता है।

फेडरल सर्विस फॉर मिलिट्री टेक्निकल कोऑपरेशन (FSMTC) के डायरेक्टर दिमित्री शुगेव ने बताया कि भारत को S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की सप्लाई समय पर दी जा रही है। FSMTC रूसी सरकार का मुख्य डिफेंस एक्सपोर्ट संगठन है। S-400 चीन और तुर्की में इस्तेमाल की जा रही हैं।

भारत के लिए क्यों जरूरी हैं S-400 मिसाइलें
यह मिसाइल सिस्‍टम एक साथ 36 टारगेट पर निशाना लगा सकता है। इन्हें ट्रकों पर जगह-जगह तैनात किया जाता है और एक जगह से दूसरी जगह आसानी से ले जाया जा सकता है। अमेरिका के पास भी इनके मुकाबले वाली कोई मिसाइल नहीं है। ये रूस की बनाई S-200 मिसाइलों और S-300 मिसाइलों का चौथा और ज्यादा मारक वाला वर्जन है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक S-400 दुनिया में मौजूद सभी बेहतर एयर डिफेंस सिस्टम में से एक है। इसमें लगा हुआ एडवांस रडार 400 किमी की दूरी तक लक्ष्य को देख सकता है और उसे नष्‍ट कर सकता है।

भारत खरीद रहा पांच S-400
भारत रूस से पांच S-400 डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है। भारतीय सेना के एक्सपर्ट इस साल जनवरी से ही रूस में इस सिस्टम को चलाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। भारत ने 2019 में इस सिस्टम के लिए रूस को 80 करोड़ डॉलर दिए थे। यह पूरा सौदा करीब 35 हजार करोड़ रुपए का है।

रूस के हथियार निर्यातक रोसोब्रोन एक्सपोर्ट के प्रमुख अलेक्जेंडर मिखेव के मुताबिक मध्य पूर्व, एशिया-प्रशांत क्षेत्र और अफ्रीका के सात देशों के साथ S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की सप्लाई को लेकर बातचीत चल रही है।