रूसी खतरे की जद में फिनलैंड-स्वीडन:नाटो बोला- रूस इनके अधिकार छीन रहा, लेकिन बिना मेंबर बने हम इन्हें सुरक्षा नहीं दे सकते

7 महीने पहले

नाटो के सेक्रेटरी जनरल जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने यूक्रेन युद्ध के बाद स्वीडन और फिनलैंड को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है- यूक्रेन पर हमले के बाद फिनलैंड और स्वीडन को रूस से सबसे ज्यादा खतरा है। इसीलिए उन्हें जल्द ही नाटो ज्वाइन कर लेना चाहिए।

दरअसल, फिनलैंड और स्वीडन लंबे समय से नाटो के देशों के साथ खड़े रहे हैं, लेकिन दोनों इसके मेंबर नहीं है। अगर इन पर किसी भी तरह का हमला होता है, तो इसे नाटो के सभी देशों पर हमला नहीं माना जाएगा। यानी नाटो उन्हें ग्रपु सिक्योरिटी की गारंटी नहीं दे सकता।

दोनों देशों पर हमला कर सकता है रूस
स्टोल्टेनबर्ग ने गुरूवार को कहा, जिस तरह रूस दोनों देशों को नाटो में शामिल न होने को लेकर धमकी दे रहा है। उन्हें अपने फैसले लेने से रोक रहा है। उससे ये साफ तौर पर जाहिर है कि वो एक देश के मौलिक आधिकारों को छीन रहा है। रूस नाटो में शामिल होने के फैसले को लेकर दोनों देशों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई कर सकता है। साथ ही नाटो से जु़ड़ने के फैसले को बदलने का दबाव भी बना सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि हम फिनलैंड और स्वीडन के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं। वो नाटों में शामिल होना या नहीं, ये उनका खुद का फैसला होगा। अगर वो नाटो की सदस्यता के लिए अप्लाई करते हैं तो हम उनका खुली बाहों से स्वागत करते हैं।

सुरक्षा के लिए वैकल्पिक तरीकों की तलाश
स्टोल्टेनबर्ग ने कहा कि नाटो इनकी सुरक्षा को लेकर परेशान हैं, इसीलिए हम उनके सदस्य बनने से पहले ही उन्हें सुरक्षा देने के दूसरे तरीके ढूंढ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश लंबे समय से नाटो के मेंबर बनने की इच्छा जताते आ रहे हैं। लेकिन जब तक ये नाटो की मेंबरशिप के लिए अप्लाई नहीं करेंगे, तब तक उनकी सुरक्षा कर पाना मुश्किल होगा।

संगठन का मेंबर बने बिना दोनों देशों की मदद करना मुश्किल-नाटो (गूगल)
संगठन का मेंबर बने बिना दोनों देशों की मदद करना मुश्किल-नाटो (गूगल)

स्वीडन-फिनलैंड के साथ काम करने तैयार
आगे उन्होंने कहा -मुझे भरोसा है कि इस समय का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। दोनों देशों के साथ काम करने का ये सही समय साबित होगा। लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि वे फिनलैंड और स्वीडन की मदद किस तरह करेंगे?

संकट में अमेरिका बन सकता है मददगार
वॉशिंगटन के अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका फिनलैंड और स्वीडन को कोई सुरक्षा गारंटी तो नहीं देगा, लेकिन इन देशों से अमेरिका ने कई तरह के दोतरफा समझौते किए हुए हैं। जिसके तहत अमेरिका नाटो के देशों से स्वीडन और फिनलैंड को मदद दिलवा सकता है।

नाटो की मेंबरशिप लेने में समय लगता है
स्वीडन और फिनलैंड ने पहले भी नाटो का मेंबर बनने की बात कही है, लेकिन मेंबरशिप के लिए अप्लाई करने के बाद नाटो के मेंबर सभी 30 देशों की सहमति जरूरी होती है। जब तक सभी मेंबर्स अप्रूवल नहीं देते, तब तक नाटो खुलकर उनकी मदद नहीं कर सकता। उन्होंने आगे कहा कि अगर स्वीडन और फिनलैंड मेंबरशिप के लिए फौरन अप्लाई कर देते है, तो बाकी देश जल्द ही इसे अप्रूव करने की प्रक्रिया को पूरा कर पाएंगे।

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