फूड क्राइसिस से जूझ रही दुनिया के लिए अच्छी खबर:यूक्रेन से 26 हजार टन मक्का लेकर शिपमेंट रवाना, रूस इस पर हमला नहीं करेगा

मॉस्को18 दिन पहले
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फूड क्राइसिस से परेशान दुनिया के लिए रूस और यूक्रेन की जंग के बीच एक अच्छी खबर आई है। सोमवार को यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से 26 हजार टन मक्का लेकर एक बड़ा शिपमेंट रवाना हुआ। यह मंगलवार को तुर्की के इंस्ताबुल पोर्ट पहुंचेगा। वहां इसकी जांच होगी इसके बाद इसे अफ्रीका के लिए रवाना किया जाएगा।

रूस और यूक्रेन की जंग 24 फरवरी को शुरू हुई थी। तब से ही यूक्रेन ने फूड एक्सपोर्ट बंद कर दिया था, क्योंकि रूस उसके बंदरगाहों पर हमले कर रहा था। पिछले दिनों तुर्की के दखल के बाद रूस-यूक्रेन के बीच ग्रीन पैक्ट हुआ। इसके तहत दुनिया में जंग से बढ़ रहे फूड क्राइसिस को रोकने के लिए फूड एक्सपोर्ट पर सहमति बनी।

UN ने भी दिया दखल
UN और तुर्की ने मिलकर रूस और यूक्रेन के बीच यह ग्रीन पैक्ट कराया है। रूस और यूक्रेन दोनों ही अफ्रीका समेत दुनिया के कई देशों को फूड सप्लाई में अहम रोल अदा करते हैं। यही वजह है कि अफ्रीका के कई गरीब देशों में भुखमरी का खतरा पैदा हो गया था। रूस ब्लैक सी में यूक्रेन के पोर्ट्स को निशाना बना रहा था। इसकी वजह से यूक्रेन का अनाज वहां से एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की में जांच के बाद यूक्रेन के इस शिपमेंट को लेबनान भेजा जाएगा। इसका कुछ हिस्सा अफ्रीका को भी मिलेगा। रूस ने समझौते में वादा किया है कि वो किसी फूड शिपमेंट पर हमला नहीं करेगा।

22 जुलाई को अंकारा में तुर्की के विदेश मंत्री से बातचीत के दौरान रूस के विदेश मंत्री लावरोव। इसी बातचीत के बाद रूस-यूक्रेन के बीच ग्रीन पैक्ट हुआ।
22 जुलाई को अंकारा में तुर्की के विदेश मंत्री से बातचीत के दौरान रूस के विदेश मंत्री लावरोव। इसी बातचीत के बाद रूस-यूक्रेन के बीच ग्रीन पैक्ट हुआ।

दुनिया को बड़ी राहत मिलेगी
यूक्रेन के एक अफसर ने कहा- हम कॉर्न एक्सपोर्ट करने वाले दुनिया के चौथे बड़े देश हैं। फूड क्राइसिस से फूड सिक्योरिटी का रास्ता तय करना बेहद जरूरी है। यूक्रेन अपनी जिम्मेदारी समझता है। तुर्की के डिफेंस मिनिस्टर हुलुसई अकार ने कहा- इंस्ताबुल में रूस, यूक्रेन, तुर्की और UN के अफसर मौजूद रहेंगे। इनके सामने शिपमेंट की जांच होगी। इसके बाद इसे आगे जाने दिया जाएगा।

अकार ने कहा- अगर हम इस तरह की कोशिश नहीं करते तो 150 साल बाद दुनिया भुखमरी का शिकार हो जाती। अब यह कोशिश की जानी चाहिए कि किसी तरह यह जंग भी खत्म हो। इस सदी में जंग की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

रूस और यूक्रेन अफ्रीका की जरूरत का 40% फूड एक्सपोर्ट करते हैं। जंग की वजह से यहां गेहूं के दाम इस साल 60% तक बढ़ चुके हैं।
रूस और यूक्रेन अफ्रीका की जरूरत का 40% फूड एक्सपोर्ट करते हैं। जंग की वजह से यहां गेहूं के दाम इस साल 60% तक बढ़ चुके हैं।

22 लाख टन का भंडार
UN और वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और यूक्रेन के पास 22 लाख टन अनाज और दूसरे एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स रिजर्व हैं। जंग की वजह से इन्हें ब्लैक सी से नहीं निकलने दिया जा रहा है। सोमवार को पहले शिपमेंट की रवानगी के बाद उम्मीद है कि जल्द ही यह समझौता पूरा किया जाएगा और दुनिया को फूड क्राइसिस से राहत मिलेगी। इसकी वजह से पलायन का खतरा भी बढ़ रहा था।

22 जुलाई को रूस और यूक्रेन के बीच ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव पैक्ट यानी समझौता हुआ था। इसके तहत यूक्रेन गेहूं और मक्का निर्यात कर सकेगा। फिलहाल, यह समझौता चार महीने का है। हालात बेहतर रहे तो इसे आगे बढ़ाया जाएगा।