यूक्रेन में एक करोड़ घरों में बिजली नहीं:रूसी मिसाइलों ने तबाह की एनर्जी सप्लाई, -20 डिग्री तापमान में घर छोड़ने को मजबूर 30 लाख लोग

कीव9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

रूस के खिलाफ जंग के बीच यूक्रेन के लाखों लोग इस साल कड़कड़ाती ठंड की चुनौती का भी सामना करेंगे। 271 दिनों से चल रहे युद्ध के बीच WHO ने एक चेतावनी जारी की है। इसमें बताया है कि यूक्रेन में चल रही एनर्जी क्राइसिस के कारण यहां ठंड से लाखों लोगों की जान का खतरा है।

दरअसल, हाल ही के हफ्तों में रूस ने यूक्रेन के कई ऊर्जा केंद्रों को तबाह कर दिया है। जिसके चलते वहां घरों में बिजली और एनर्जी के दूसरे संसाधानों की भारी कमी हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के रीजनल डायरेक्टर हैन्स हेनरी क्लयूग ने बताया कि यूक्रेन के आधे से ज्यादा ऊर्जा केंद्रों को गहरा नुकसान पहुंचा है। वहीं कुछ पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। इससे लोगों की हेल्थ पर गहरा असर पड़ रहा है।

खार्कीव में बिजली नहीं होने के कारण गैस स्टोव से घर और खुद को गर्म करने की कोशिश कर रही बुजुर्ग महिला
खार्कीव में बिजली नहीं होने के कारण गैस स्टोव से घर और खुद को गर्म करने की कोशिश कर रही बुजुर्ग महिला

यूक्रेन में एक करोड़ लोग बिना बिजली रह रहे

कीव में एक प्रेस कांफ्रेंस में क्लयूग ने यह भी बताया कि फिलहाल कीव में एक करोड़ लोग बिना बिजली के रहने को मजबूर हैं, जबकि 30 लाख लोग ठंड से बचने के लिए अपना घर छोड़ सकते हैं। यूक्रेन में ठंड जानलेवा हो सकती है। एक अनुमान के मुताबिक इस साल वहां के कई इलाकों का तापमान -20 डिग्री से भी कम जा सकता है। इससे बिना बिजली के निपटना नामुमकिन है।

बढ़ती ठंड के कारण कीव के पास अपने शहर इर्पिन को छोड़कर जाने को मजबूर बुजुर्ग व्यक्ति
बढ़ती ठंड के कारण कीव के पास अपने शहर इर्पिन को छोड़कर जाने को मजबूर बुजुर्ग व्यक्ति

मेंटल हेल्थ पर भी पड़ रहा गहरा असर

यूक्रेन युद्ध में लगातार तबाह हो रहे ऊर्जा केंद्रो के चलते लोगों में तनाव बढ़ रहा है। लोग बिजली कटौती से परेशान हैं। WHO के मुताबिक सर्दियों में यूक्रेन के लोगों को कई तरह के इंफेक्शनस का खतरा हो सकता है, जो अस्पतालों की कमी के कारण औऱ गंभीर हो जाएगा। कोरोना के चलते निमोनिया और सांस से जुड़ी गंभरी बीमारियां विकराल रूप ले सकती हैं। एक आंकड़े में दावा किया गया है कि रूस ने फरवरी से लेकर अब तक यूक्रेन के 100 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्र तबाह किए हैं। जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।