भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना रूस:सऊदी अरब और इराक को पीछे छोड़ा, पाकिस्तान अब तक डिस्काउंट मांग रहा

नई दिल्लीएक महीने पहले
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भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने के मामले में रूस ने इराक और सऊदी अरब को पीछे छोड़ दिया है। एनर्जी कार्गो ट्रैकर वोर्टेक्स (ECCV) की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने अक्टूबर में भारत को रोजाना 9 लाख 35 हजार 556 बैरल कच्चे तेल की सप्लाई की है।

यह बढ़त यूक्रेन युद्ध के कारण में मॉस्को पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद हुई है। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि भारत को इराक 20.5% और सऊदी अरब 16% यानी कुल 36.5% कच्चा तेल सप्लाई किया है। भारत ने जहां रूस से सबसे ज्यादा तेल मंगाया है, वहीं पाकिस्तान अब भी रूस से डिस्काउंट की मांग पर अटका हुआ है।

डॉन का दावा- USA का प्रतिबंध नहीं
पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की खबर के मुताबिक USA के प्रवक्ता ने बताया, अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया है। उम्मीद है कि ये देश अपनी परिस्थितियों के आधार पर सही डिसीजन लेंगे। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की ताकत को कम करने के लिए हम भारत समेत यूरोपीय देशों के साथ बातचीत करते रहेंगे। बता दें कि यूक्रेन युद्ध से पहले, दिसंबर 2021 में रोजाना रूस ने भारत को केवल 36 हजार 255 बैरल कच्चा तेल एक्सपोर्ट किया। इराक ने 1 लाख 05 हजार मिलियन बीपीडी और सऊदी अरब ने 952,625 का सप्लाई किया था।

पश्चिमी देशों के विरोध का भारत को फायदा मिला
भारत अपनी 85 फीसदी पेट्रोलियम जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे देशों पर डिपेंड है। जब पश्चिम देशों ने रूस के कच्चे तेल की सप्लाई को रोकने की कोशिश की। जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में उछाल आया और रूस की इकोनॉमिक्स गड़बड़ाने लगी।

ऐसे में व्लादिमिर पुतिन ने अपने देश की अर्थव्यवस्था को अच्छा बनाए रखने के लिए सस्ते में तेल बेचकर एशियाई देशों को अपने ग्राहक बनाने का फैसला किया था। भारत और चीन ने इस बात का फायदा उठाया और दोनों ही रूसी तेल के सबसे बड़े ग्राहक बन गए। इसे भारत की कूटनीतिक जीत भी कहा जा सकता है।

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