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स्कूली छात्राओं को बाल काले नहीं होने पर निकाला जा रहा, विद्यार्थी बोले-आंदोलन करेंगे

9 महीने पहले
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  • बच्चों पर ड्रेस कोड की सख्ती के कारण अभिभावक मानवाधिकार आयोग में जाने को मजबूर
  • कुछ दिनों पहले यहां महिलाओं के चश्मा पहनने पर पाबंदी लगी थी

टोक्यो . जापान में कुछ दिनों पहले ही कई बड़ी कंपनियों ने कार्यस्थल पर महिलाओं के चश्मा पहनने पर पाबंदी लगा दी थी। अब वहां स्कूली विद्यार्थियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन विद्यार्थियों की मांग है कि उन्हें ‘ब्लैक कोसुकू’ परंपरा की पाबंदी से मुक्ति दिलाई जाए।
 
विद्यार्थियों का आरोप है कि जापान के अधिकांश स्कूल बोर्ड में छात्राओं को यह कहकर घर भेज दिया जाता है कि उनके बाल काले नहीं हैं। छात्रों से कहा जा रहा है कि उनके बालों की लंबाई कम है, छात्राओं को किस कलर के अंतर्वस्त्र पहनने चाहिए, किस कलर के नहीं, लंबी यात्रा पर जाने के लिए स्कूल को दो महीने पहले सूचना दी जाए.. आदि। विद्यार्थियों का कहना है कि अगर बोर्ड तत्काल पाबंदियों को नहीं हटाता, तो वे सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर जाएंगे।
 

जापान सख्त ड्रेस कोड के लिए दुनियाभर में जाना जाता है

  • जापान में छात्रों के सड़काें पर किसी भी प्रकार के प्रदर्शन को लेकर पाबंदी है। उधर, सरकार ने कहा है कि अप्रैल 2020 से नए सत्र से सभी पाबंदियों को खत्म कर दिया जाएगा। जापान सख्त ड्रेस कोड के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। यहां स्कूलों में भी विद्यार्थियों को ड्रेस कोड अनिवार्य किया गया है।
  • जिफू प्रांत के स्कूल एजुकेशन बोर्ड ने पिछले माह एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें पाया गया कि 61 हाईस्कूलों में से 90% से अधिक ने नियमों को इतना सख्त बना दिया है, कि अभिभावक उनकी शिकायतें मानवाधिकार आयोग से कर रहे हैं। शिक्षा बोर्ड की अधिकारी मासूकी इशिगामी ने कहा कि यह सारी पाबंदियां स्कूल बोर्ड ने परिस्थितियों को देखकर ही लगाई थीं।
  • अब अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र से इसे हटा दिया जाएगा। उधर, विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की फिजूल पाबंदियां तत्काल खत्म की जाए। लोग इस तरह की पाबंदी को दकियानूसी और पुराने जमाने की साेच बता रहे हैं।

 

महिलाएं बोलीं- सरकार तय नहीं कर सकती हम क्या करें
जापान में सार्वजनिक संस्थाओं में कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू है। पुरुषों को सूट और डार्क कलर के जूते जबकि महिलाओं को स्कर्ट के साथ हाई हील्स पहनना जरूरी है। ट्विटर पर एक यूजर शोमिजू ताकाहाशी ने लिखा- ‘लड़कियों को अब इस बात की भी आजादी नहीं रही कि क्या पहनें, क्या नहीं। सरकार तय नहीं कर सकती कि हम क्या करें, क्या नहीं? आजादी के क्या यही मायने हैं?’

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