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15 लाख साल पुरानी बर्फ के नमूनों से वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन के बारे में पता लगाएंगे

2 वर्ष पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।
  • ऑस्ट्रेलियाई अंटार्कटिक डिवीजन (एएडी) के वैज्ञानिक बर्फ की परत को 3 किमी तक ड्रिल करेंगे
  • पुरानी बर्फ के अध्ययन से लाखों साल पुरानी जलवायु के बारे में पता लगाया जा सकेगा: वैज्ञानिक

वॉशिंगटन. वैज्ञानिक अंटार्कटिका में करीब 15 लाख साल पुरानी बर्फ की मदद से पृथ्वी के इतिहास का पता लगाएंगे। उनका कहना है कि लाखों साल पुरानी बर्फ की जांच से उस समय की जलवायु के बारे में अंदाजा लगाया जा सकेगा। ऑस्ट्रेलियाई अंटार्कटिक डिवीजन (एएडी) के वैज्ञानिक इस रहस्य को जानने के लिए बेहद उत्साहित हैं।

1) सतह में 3 किलोमीटर तक ड्रिल किया जाएगा

वैज्ञानिकों ने सोमवार को बताया कि बर्फिले महादेश की सतह में तीन किलोमीटर तक ड्रिल किया जाएगा। ग्लेशियोलॉजिस्ट टास वैन ओमेन ने कहा कि हम अगले कुछ सालों में जलवायु विज्ञान की बड़ी समस्याओं को हल करने में सक्षम होंगे। माना जा रहा है कि जिस बर्फ का अध्ययन किया जाएगा, वह करीब 15 लाख साल पुरानी है।

वैन ओमेन ने कहा कि हम बर्फ के टुकड़ों के बीच फंसे छोटे बुलबुलों का अध्ययन करेंगे। ये छोटे बुलबुले पिछले वातावरण के टाइम कैप्सूल हैं। हम ऐसे बर्फ से पहले के समय का अध्ययन करेंगे। साथ ही समझने का प्रयास करेंगे कि 10 लाख साल पहले जब जलवायु बदल रही थी, तब कार्बन डाइऑक्साइड की स्थिति क्या थी।

ओमेन ने कहा कि करीब 10 लाख साल पहले पृथ्वी पर आईसएज 40 हजार साल के चक्र से एक लाख साल के चक्र में बदल गई। उन्होंने कहा कि यह सब कार्बन डाईऑक्साइड के कारण हुआ। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि बर्फ में फंसे बुलबुलों से यह जानने में मदद मिलेगी कि कार्बन डाईऑक्साइड से पृथ्वी की जलवायु पर क्या प्रभाव होगा।

स्टेनलेस स्टील, एल्यूमीनियम, कांस्य और टाइटेनियम से ड्रिल बनाया गया है। यह -55 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी काम कर सकता है। इसका निर्माण अंतरराष्ट्रीय और ऑस्ट्रेलियाई तकनीक से किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पुरानी बर्फ में गहराई तक पहुंचना आसान नहीं होगा। ड्रिलिंग का काम 2021 में शुरू होने की उम्मीद है। इसमें करीब चार साल लगेंगे।

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