दावा / समुद्र में टाइटैनिक का रेक बहुत तेजी से खराब हो रहा, 2030 तक सब खत्म हो जाएगा



Titanic Wreck: Scientists Visited Titanic Wreckage Site; Newfoundland, North Atlantic Ocean
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Titanic Wreck: Scientists Visited Titanic Wreckage Site; Newfoundland, North Atlantic Ocean

  • अंतरराष्ट्रीय खोजकर्ताओं की पांच सदस्यीय टीम पिछले दिनों अटलांटिक महासागर में डूबे टाइटैनिक जहाज पर पहुंची
  • खोजकर्ताओं का दावा- मैटल ईटिंग बैक्टीरिया, सॉल्टी वॉटर और ऑशेनिक करंट जहाज को सात में पूरी तरह बर्बाद कर देंगे
  • टाइटैनिक 107 साल पहले कनाडा के न्यूफाउंडलैंड तट के पास डूबा था,  इसमें 2224 लोग सवार थे और 1500 मारे गए 

Dainik Bhaskar

Aug 23, 2019, 05:54 PM IST

न्यूयॉर्क. अंतरराष्ट्रीय खोजकर्ताओं की सब्मर्सिबल्स पांच सदस्यीय टीम पिछले दिनों अटलांटिक महासागर में 12467 (3800 मीटर) फीट की गहराई में डूबे टाइटैनिक जहाज पर पहुंची। इनका दावा है कि जहाज का ऊपरी ढांचा (रेक) बहुत तेजी से नष्ट हो रहा है। इसे  मैटल ईटिंग (धातु खाने वाला) बैक्टीरिया, खारा पानी और समुद्री जलधाराएं (ऑशनिक करंट) धीरे-धीरे खत्म कर रहे हैं। 2030 तक सब खत्म हो जाएगा। 

 

इनका यह भी कहना है कि पिछले 15 साल में इस तक पहुंचने वाली पहली टीम हैं। इन्होंने इसका एक वीडियो भी जारी किया है। इससे पहले 2005 में दो सदस्यीय सब्मर्सिबल्स टीम  टाइटैनिक के रेक तक पहुंची थी।

कप्तान का कमरा और बाथ टब लगभग खत्म

  1. इस टीम के सदस्य और टाइटैनिक इतिहासकार पार्क स्टीफेंसन ने कहा कि जहाज के  कैप्टन का रूम लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुका है। बाथ टब टाइटैनिक की सबसे पसंदीदा चीज भी थी, जो अब नहीं है। पूरा डेक गिर रहा है। टीम के फुटेज में दिख रहा है। जहाज का धनुष पूरी तरह से बर्फ की परत जैसी सिल्ट से ढक गया है। इसे मैटल बैक्टीरिया खत्म कर रहे हैं।’’
     

    The captain's bathtub

     

  2. इस अभियान के वैज्ञानिक लॉरी जॉनसन ने कहा, ‘‘जहाज के मलबे का समय के साथ क्षरण होना तय है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। टाइटैनिक जहाज 1912 में कप्तान एडवर्ड स्मिथ के नेतृत्व में एक आईवर्ग से टकराकर अटलांटिक महासागर में डूब गया था। इस पर क्रू समेत 2224 लोग सवार थे। ये भी साउथम्टन से न्यूयॉर्क जा रहे थे। इसमें करीब 1500 लोगों की मौत हो गई थी। जहाज पर पहुंचकर गोतखोरों की टीम ने 100 साल से अधिक पुराने हादसे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। टाइटैनिक उस समय का सबसे बड़ा और एडवांस्ड जहाज था। ’’

  3. वैज्ञानिकों की टीम ने बताया, ‘‘जहाज के रैक के चारों और घूमना काफी चुनौतिपूर्ण रहा। यहां स्थिति काफी खराब थी। समुद्री जलधाराओं के बीच यहां ज्यादा देर टिकना मुश्किल हो रहा था। लगभग 4 किलोमीटर की गहराई में रोशनी की कमी और मौजूद दबाव को सहना इंसानों के बस से बाहर था। हमने जाना, यहां मौजूद अति सुक्ष्म बैक्टीरिया ने 50 हजार टन से अधिक लोहे को चूरे में बदल दिया है। इस चूरे को समुद्री जलधाराएं अपने साथ बहाकर दूर ले गई हैं। इसी आधार पर अनुमान लगाया है कि 2030 तक जहाज के डैक पर कुछ नहीं बचेगा।’’

  4. सब्मर्शिबल अभियान के प्रमुख और कैलाडन ओशनिक कंपनी के सीईओ विक्टर वेस्कोवो के मुताबिक, ‘‘यह बहुत बड़ा रेक है, मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह कितना बड़ा होगा। यह सब देखना असाधारण था। सबसे आश्चर्यजनक तो तब था जब मैं टाइटैनिक के किनारे था और पनडुब्बी की चमकदार लाइट जहाज के एक ग्लास से टकराकर मेरी आंखों तक आई। तब मुझे ऐसा लगा जैसे जहाज मुझ पर झपट पड़ा था। यह वाकई अद्भुत था।’’विक्टर ने बताया, 1985 में जब टाइटैनिक के मलबे की खोज की गई तो पाया गया कि यह समुद्र तल तक पहुंचने से पहले टूट गया था। अभी यह दो हिस्सों में 600 मीटर की दूरी पर मौजूद है।

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